कैसे बनेंगी महिलाएं आत्मनिर्भर:गोबर से बना रही लकडियों को खरीदने तैयार नहीं,अधिकारी भी नहीं कर रहे सहयोग - Shivpuri News

शिवपुरी। एक और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी लगातार अपने भाषणों में वैश्कि महामारी कोरोना के समय से नागरिकों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, इसके चलते लगातार जिले में स्वसहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा हैं। वहीं शिवपुरी नगर पालिका द्वारा आजीविका मिशन के माध्यम लगभग 100 से 200 समूह बनबा कर तैयार कर दिए गए। 

लेकिन उन समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दो समूहों को टेंडर निकाले गए जिनमें शिव गौरी स्वसहायता समूह एवं जय अम्बे स्वसहायता समूह को शिवपुरी गौ शाला में गायों के गोबर के माध्यम से गोबर की लकड़ी बनाने एवं गमले के लिए कार्य देकर प्रेरित किया लेकिन दोनों स्वसहायता समूहों ने काम ले लिया और कार्य भी प्रारंभ कर दिया। 

जिससे महिलाओं को आजीविका की आसबंधी थी, लेकिन नगर पालिका एवं आजीविका मिशन द्वारा किए गए वायदे से अब अधिकारी मुकर रहे हैं क्योंकि न तो इन समूहों द्वारा बनाए गए गोबर की लकड़ी को कोई खरीद रहा हैं न ही उनका सहयोग कर रहे हैं। इस कारण वह महिलाओं का लगातार मनोबल टूटता जा रहा हैं। लेकिन सीएमओ के इस आश्वासन के बाद भी आज तक न तो मुक्तिधाम में गोबर की लकड़ी का उपयोग किया गया और न ही अलाव जलाने के लिए गोबर की लकड़ी खरीदी गई जिससे महिलायें काफी परेशान नजर आईं ऐसी स्थिति में महिलायें कैसे आत्मनिर्भर बन सकेंगी और समूह बनाने का उद्देश्य कैसे पूरा हो सकेगा?

3 माह में तीन हजार रूपए बिकी गोबर की लकड़ी

जय अम्बे व शिव गौरी स्वसहायता समूह की महिला रजनी चौहान, ऊषा कुशवाह, मनीषा कुशवाह, शकुन कुशवाह, सोनू भार्गव, रायश्री बाथम ने बताया कि हम जून माह से यह लकड़ी बनाने का काम कर रहे हैं। प्रत्येक दिन 300 लकड़ी बनाई जाती हैं, जिसमें 7-8 महिलायें काम करती हैं। हम सुबह 8 बजे से 11 बजे तक शिवपुरी गौ शाला में कार्य करते हैं, लेकिन तीन माह में सिर्फ 1 क्विंटल लकड़ी रेन बसेरा बस स्टेण्ड पर शिवपुरी नगर पालिका द्वारा खरीदी गई। बांकी लकड़ी का स्टोक गौ शाला में ही कमरे में रखा हुआ हैं हमारी लकड़ी को कोई भी खरीदने नहीं आ रहा हैं, ऐसी स्थिति में हम अपने परिवार का जीवन यापन कैसे करें। जबकि हमको गौ शाला आने के लिए प्रत्येक दिन 50 रूपए ऑटो खर्च भी देना पड़ता हैं। ऐसी स्थिति में हमारी आजीविका का साधन ही नहीं बचा हैं। 

पेड़ों को कटने से बचाने के लिए शिवपुरी में गोबर की लकडिय़ां बनाने की कि पहल 

नगर पालिका सीएमओ गोविन्द भार्गव ने चर्चा करते हुए बताया कि पूरे विश्व में पेड़ो के लगातार हो रहे कटाव से पर्यावरण को पहुंच रही क्षति से बचाने के लिए उपाय तलाशे। क्योंकि हिंदू धर्म में मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी की बड़ी मात्रा में आवश्यकता पड़ती है और इसके लिए पेड़ों को बड़ी मात्रा में काटा जा रहा है। लेकिन पेड़ो के कटाव को रोकने के लिए गोबर से लकडिय़ां बनाने का तरीका काफी हद तक सार्थक दिखाई दिया। जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण मध्यप्रदेश के शिवपुरी शहर में देखा गया है जहां गौ शाला में गाय के गोबर से बने उपलों के उपयोग की दिशा में पहल की गई है। यहां हर रोज गाय के गोवर को लकड़ीनुमा आकार दिया जा रहा है जिसका प्रयोग शिवपुरी की नगरपालिका द्वारा मुक्ति धाम में अंतिम संस्कार के साथ-साथ सर्दी के मौसम में अलाव जलाने के लिए किया जा रहा है।

इनका है कहना -
शिवपुरी शहर में स्थित गौ शाला में गाय के गोबर से लकडिय़ा तैयार की जा रही है जिसका उपयोग फिलहाल मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के लिए किया जा रहा है और साथ ही ठंड से बचाव के लिए रात को अलाव भी इसी गोबर की लकड़ी के जलाए जा रहे हैं 
गोविंद भार्गव, सीएमओ, नगर पालिका शिवपुरी