बिना टेंडर और स्वीकृति के 64 लाख की सड़क का हो रहा था निर्माण: विरोध हुआ तो मशीनरी लेकर फरार ठेेकेदार - Shivpuri News

शिवपुरी। इस खबर में आरईएस के भ्रष्टाचार का काला चिठ्ठा बहार आ रही हैं। अभी तक आपने खबर पढी होगी की टेंडर होने के बाद भी सडको का काम ठेकेदार शुरू नही करते,लेकिन इस खबर में बिना टेंडर और स्वीकृति के ही ठेकेदार सडक बनाने लगा,यह सडक नियमानुसार मनरेगा से बननी थी और इसको मजदूर बनाते। जब विरोध हुआ तो ठेकेदार अपनी मशीनरी लेकर फरार हो गया। 

अब सवाल उठता हैं कि बिना टेंडर और स्वीकृती के ठेकेदार सडक का निर्माण क्यो कर रहा था सडक बजट 64 लाख रूपए बताया जा रहा हैं। अब निर्माण करने वाली कंपनी का मालिक पागल तो होगा नही जो बिना टेंडर के सडक का निर्माण कर लाखाो रूपए फसता। 

आरईएस के किस अधिकारी के कहने से इस सडक का निर्माण कैसे शुरू हुआ यह सवाल बडा हैं और जिले में कितनी सडके टेंडर से पूर्व बन गई यह जांच का विषय हैं। यह स्पष्ट हैं कि सडको के बनने के बाद टेंडर लगाए गए होंगें वह भी फेेक विज्ञप्ति प्रकाशित करके,बाद में मोटा पैसा विभाग से ठेकेदार ने वसूला होगा। आरईएस मे कौनसे अधिकारी इस गैंग में शामिल हैं यह जांच का विषय हैं। फिलहाल मूल खबर की ओर चलते है।। 

इंदरगढ़ की सरपंच कमलेश सुरेश जाटव ने बताया कि कुछ लोगों ने आकर जेसीबी लगाकर नाड से देव स्थान तक 3 किमी की सड़क बनाने की शुरुआत कर दी । हमने पूछा कि यह कौन सी सड़क बन रही है , तो ठेकेदार बोला कि नाड से लेकर कालीमाटी देव स्थान तक का 3 किमी लंबा यह सड़क मार्ग है जिसके लिए नरेरा से आरईएस द्वारा 64 लाख स्वीकृत किए हैं। इसलिए इस सड़क को बनाने दो। 

सरपंच कमलेश सुरेश जाटव ने जब कहा कि यह तो मनरेगा का काम है और इस सड़क को तो मजदूर बनाएंगे। आप अपना डोली डंगा उठाओ। सरपंच की मानें तो ठेकेदार ने गुस्से में आकर कहा कि वह सड़क तो बनाकर रहेगा । जिसमें दम हो वह रोककर देख ले। वह इतना राजनीतिक रसूख रखता है कि वह अपना भुगतान भी करवा लेगा।

इसके बाद गांव के सरंपच ने पंचनामा बनाकर सीधी शिकायत आरईएस के ईई राजीव पांडेय से की तो वह बोले कि न तो मस्टर तैयार हुए हैं और न ही हमने कोई स्वीकृति दी हैं। फिर सड़क का निर्माण वहां कैसे हो रहा है। आप खुद रुकवाइए। यह सूचना मिलते ही आरईएस के ईई राजीव पांडेय ने अधीनस्थ अमले को मौके की जांच पड़ताल के लिए भेजा और काम करने वाले की जेसीबी जब्त कर उस पर एफआईआर करने की बात भी कही, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकारी मौके पर पहुंचने वाले हैं। 

यह खबर न जाने ठेकेदार को कैसे लग गई और वहां अधिकारी पहुंचते उससे पहले ही जेसीबी और मजूदरों को लेकर वहां से रफूचक्कर हो गया। इसके बाद अधिकारियों ने गांव में पंचनामा बनाया और कोई कार्रवाई नहीं की । 

गांव वालों ने हिटैची के फोटो लेकर और मौका मुआयना करने के दौरान मिले निशानों को दिखाकर कहा कि देखिए साहब यह जेसीबी मशीन से सड़क की खुदाई के निशान हैं जो अभी खोदे हैं। कहीं से इन्हें खबर मिल गई इसलिए भाग गए। इसके बाद अधिकारियों ने मौका मुआयना की रिपोर्ट तैयार की और गांव वालों का पंचनामा भी तैयार किया है जिसे अधिकारियो को सौपा गया हैं। 

लेकिन इस मामले में बड़ा सवाल यह है कि कहीं अधिकारियों से मिली भगत से तो यह काम नहीं हो रहा था,जिसमें सड़क बनाने के बाद आखिर में इसी सड़क के नाम पर मस्टर तैयार हो जाते और भुगतान भी निकल जाता। ऐसे में गांव के लोगों के साथ यदि सरपंच जागरूक न होता तो इस मामले का पता किसी को न चलता । 

इनका कहना हैं
हमें कल शाम सूचना मिली थी कि गांव में जेसीबी से सड़क बनाई जा रही है। हमने सुबह होते ही वहां जांच दल भेजा , लेकिन मौके पर कोई नहीं मिला। खुदाई के निशान हैं। गांव का पंचनामा हमने बनाया है। हम मामले की जांच करा रहे हैं , लेकिन इस सड़क को बनाने की न तो हमने स्वीकृति दी है और न ही हमने मस्टर जारी किए हैं । 

हमने आचार संहिता लगने से पहले गांव में 3 किमी लंबी सड़क नाड से काली माटी देव स्थान तक स्वीकृत कराई थी। इसके न तो मस्टर जारी हुए और न विभाग ने स्वीकृति दी। इसके बाद भी यहां हिटैची से सड़क बनाने कई ठेकेदार आ गए। इसकी शिकायत आरईएस के ईई से की और टीम जब तक यहां आई तब तक जेसीबी लेकर ठेकेदार मौके से भाग गया।
कमलेश सुरेश जाटव सरपंच