शिवपुरी के सरकारी स्कूलों में साइंस से स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग के टीचर पढ़ाएंगे, शिक्षा विभाग के चौंकाने वाले नियम / Shivpuri News

शिवपुरी। अब जो स्टूडेंट साईंस विषय का चुनाव अपना भविष्य बनाने के लिए करेंगें वह शिक्षा विभाग का एक मुर्खो जैसा निर्णय को सहेंगें। उन बच्चो को साईंस विशेषज्ञ टीचर नही बल्कि टैक्निकल शिक्षा वाले टीचर जैसे इंजीनिरिंग करने वाले टीचर पढा सकते है। यह निर्णय क्यो लिया जा रहा हैं,और इससे बच्चो को क्या फायदा इसका ठोस जबाब किसी के पास नही है।

शिक्षा विभाग अर्थात बच्चो के भविष्य का निर्माण करने वाला विभाग,अब साईंस के बच्चे को साईंस स्पेशलिस्ट टीचर नही पढा कर कोई इंजीनियर टाईप का टीचर साईंस की शिक्षा देगा तो बच्चे आगे का कॉम्पिटशन कैसे फायट करेंगें। साईंस वही बच्चे लेते हैं जो मेडिकल की फिल्ड में जाना चाहते हैं अब वे नटबुल्ट,या हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर,लोहा रेत गिट्टी के मास्टर से मानव की बॉडी के स्ट्रेक्चर का ज्ञान अर्जित करेंगेें। 

यह है मामला ऐसे समझें इस अनसुलझे सवाल को

सहित प्रदेशभर के सैकड़ों उम्मीदवार वर्ग-1 के तहत हो रही उच्च माध्यमिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। आरोप है कि पात्रता की शर्ते पूरी नहीं करने के बावजूद अलाइड विषय वाले वालों को नौकरी देने की तैयारी की जा रही है, जिससे मूल विषय के क्वालीफाई उम्मीदवारों का हक छिन जाएगा।

शिक्षा विभाग ने 17 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया से पूर्व जो नियम बनाए थे, उनका उल्लंघन किया जा रहा है। जैसे- जीव विज्ञान विषय के लिए नियमानुसार केवल मूल विषय के अभ्यर्थियों को पात्र माना जा गया हैं। 28 अगस्त 2018 को जारी हुए शासन के आदेश की कंडिका 1.1 में लिखा है कि मूल विषय वाले ही पात्र माने जाएंगे , लेकिन मेरिट लिस्ट में आए कई उम्मीदवार निर्धारित योग्यता नहीं रखते हैं।

यानी, वे तकनीकी शिक्षा वाले हैं , लेकिन मेरिट में ऊपर होने के कारण उन्हें विज्ञान जैसे विषयों में प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नियम विरुद्ध यदि तकनीकी शिक्षा वाले प्रतिभागियों की नियुक्ति विज्ञान शिक्षक के रूप में कर दी तो वह हायर सेकंडरी के विद्यार्थियों को विज्ञान कैसे पढ़ा पाएंगे ? इसी तरह अन्य विषयों को लेकर भी विसंगति सामने आ रही है, जो मूल विषय ( कोर सब्जेक्ट ) के उत्तीर्ण आवेदकों के अधिकारों का हनन है ।

जबकि छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में हाल ही में शिक्षकों की भर्ती की गई, जिनमें मूल विषय के अभ्यर्थियों को पात्र माना गया। युवाओं का कहना है कि हम लोगों ने बड़ी मुश्किल से वर्ग -1 के लिए क्वालीफाई किया और विषय विशेषज्ञ की दक्षता रखते हैं।

शासन के नियमों से परे जाकर अब हमारी जगह दूसरे विषय वालों को रखा जा रहा हैं। इससे हमारे हक पर तो डाका डाला ही जा रहा हैं।