घातक हैं ब्राह्मण जाति के कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के लिए समीकरण: पढिए पूरा खाका / POHRI NEWS

शिवपुरी। पोहरी विधानसभा क्षेत्र में नबंवर 2018 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने अनपेक्षित रूप से भाजपा के धाकड़ उम्मीदवार के मुकाबले धाकड़ उम्मीदवार को ही टिकट देकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। पोहरी विधानसभा क्षेत्र में पिछले 10 चुनावों में अभी तक या तो धाकड़ उम्मीदवार या ब्राह्मण उम्मीदवार विजयी होता रहा है ।

1977 से अब तक 5 बार ब्राह्मण और पांच बार धाकड़ उम्मीदवार विधायक बनने में सफल रहे हैं। इस तरह से यदि कांग्रेस धाकड़ उम्मीदवार पर दाव लगाती तो भाजपा ब्राह्मण उम्मीदवार को टिकट देती। लेकिन 1993 में कांग्रेस ने आश्चर्यजनक रूप से भाजपा के निवर्तमान विधायक जगदीश वर्मा के मुकाबले उन्हीं की जाति की बैजंती वर्मा को टिकट देकर जीत हांसिल की थी। 1993 से कांग्रेस न तो पोहरी में 1998 न 2003  न 2008 और न ही 2013 में जीतने में सफल रही।

2018 में कांग्रेस ने भाजपा के धाकड़ जाति के उम्मीदवार निवर्तमान विधायक प्रहलाद भारती के मुकाबले सजातीय उम्मीदवार सुरेश राठखेड़ा को टिकट देकर 25 साल बाद जीत हासिल की। ऐसे में सवाल यह है कि क्या पोहरी विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उसी रणनीति पर काम करेगी और फिर धाकड़ उम्मीदवार को टिकट देगी। क्योंकि भाजपा का उम्मीदवार तो लगभग तय है और भाजपा प्रत्याशी निश्चित रूप से 2018 में जीते कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश राठखेड़ा होंगे।

पोहरी विधानसभा क्षेत्र में धाकड़ प्रत्याशियों की बदोलत भाजपा ने तीन चुनाव जीते हैं। जबकि कांग्रेस के धाकड़ उम्मीदवार दो बार विजयी हुए हैं। दोनों बार कांग्रेस के धाकड़ जाति के उम्मीदवारों ने भाजपा के निवर्तमान विधायकों को पराजित किया। इस बार भी 2018 चुनाव में जीते कांग्रेस विधायक भाजपा प्रत्याशी हैं। इसलिए ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या निर्वतमान विधायक जीत पाएगा।

कांग्रेस ने जिस तरह से 1993 और 2018 के चुनाव जीत हासिल की थी , उसी तरह से इस चुनाव में भी वह उसी रणनीति पर काम करेंगी और धाकड़ उम्मीदवारों को टिकट देगी। कांग्रेस के पास धाकड़ उम्मीदवारों की कमी नहीं है। जो धाकड़ उम्मीदवार रेस में हैं वह फ्रेश केंडिडेट हैं और अभी तक कभी चुनाव नहीं लड़े हैं तथा उनकी छवि अच्छी मानी जाती है ।

इनमें मुख्य रूप से युवा विनोद धाकड़ एडवोकेट,जिला कांग्रेस के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण धाकड़,जनपद अध्यक्ष प्रधुम्र वर्मा और ई शिशुपाल वर्मा  के नाम शामिल हैं। विनोद धाकड़ को तो सूत्रों के अनुसार 2008 में भाजपा ने भी टिकट का ऑफर दिया था। लेकिन उन्होंने उस समय भाजपा टिकट लेने से इंकार कर दिया था । उस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद भारती विजयी हुए थे।

श्री धाकड़ हिम्मतगढ़ के निवासी हैं और उनका क्षेत्र में अच्छा प्रभाव माना जाता है। जहां तक लक्ष्मीनारायण धाकड़ का सवाल है वह मिलनसार छवि के हैं और एडवोकेट हैं ।वह भी मूल रूप से पोहरी विधानसभा क्षेत्र के निवासी हैं और चुनाव लडने की उनके मन में वर्षो से इच्छा है। लेकिन टिकट न मिलने के कारण वह मनमसोस कर रह जाते हैं।उनके रास्ते की बाधा सिर्फ एज फैक्टर हो सकती है।

जहां तक जनपद अध्यक्ष प्रधुम्र वर्मा का सवाल है वह भले ही कांग्रेस में हैं लेकिन यह माना जाता है कि उनके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से अच्छे रिश्ते हैं।इस कारण उन्हें टिकट देने के प्रति कांग्रेसी शंकालू भी नजर आ रहे हैं।

ब्राहम्मण पोहरी में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में 1977 से अब तक दो बार विजयी हुए हैं और यह जीत 1980,1985 के चुनाव में हांसिल की गई। इसके बाद कभी भी कांग्रेस के ब्राह्मण उम्मीदवार को जीत हासिल नहीं हुई। पोहरी में कांग्रेस का ब्राह्मण उम्मीदवार 35 वर्षों से विजयी नहीं हुआ । 1980 में कांग्रेस के हरिवल्लभ शुक्ला और 1985 में स्व.हिमाशु शर्मा विजयी हुए थे। जहां तक भाजपा के ब्राह्मण उम्मीदवारों का सवाल है तो भाजपा के ब्राह्मण उम्मीदवार 1977 और 1998 में विजयी हुए।

1977 में उस समय भाजपा जनता पार्टी के उम्मीदवार दामोदर शर्मा और 1998 में नरेंद्र बिरथरे विजयी हुए थे। एक बार 2003 में समानता दल के ब्राह्मण उम्मीदवार हरिवल्लभ शुक्ला भी विजयी हुए थे। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पोहरी में वर्तमान परिस्थिति में कांग्रेस के लिए धाकड़ उम्मीदवार अधिक मुफिद हैं।