चुनाव में टिकिट और पार्टी में वजन की चाह में कई सिंधिया समर्थक भाजपा में शामिल नहीं हुए / Shivpuri News

शिवपुरी। पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोडऩे और भाजपा में शामिल होने के बाद उनके अधिकांश समर्थक उनके साथ ही भाजपा में चले गए थे। लेकिन शिवपुरी जिले के जिन दो विधानसभा क्षेत्रों पोहरी और करैरा में विधानसभा चुनाव होना है। वहां कई कट्टर सिंधिया समर्थक अभी भी कांग्रेस में बने हुए हैं और सिंधिया द्वारा उन्हें इस्तीफा देने का आदेश देने के बाद भी उन्होंने कांग्रेस नहीं छोड़ी है।

इन नेताओं को भरोसा है कि कांग्रेस में रहकर उन्हें टिकट की अधिक आशा है। जबकि भाजपा में तो कांग्रेस छोड़कर आए पूर्व विधायकों का टिकट पक्का है। करैरा, पोहरी के अलावा शिवपुरी के वे सिंधिया समर्थक नेता भी अभी पार्टी में बने हुए हैं। जिन्हें लग रहा है कि अब कांग्रेस में उनकी अधिक पूछपरख होगी। क्योंकि सिंधिया के मुंह लगे लोग सभी भाजपा में चले गए हैं।

जहां तक पोहरी विधानसभा क्षेत्र का सवाल है पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला और उनके सुपुत्र आलोक शुक्ला, 2008 का विधानसभा चुनाव लड़े एनपी शर्मा, कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष विनोद धाकड़ एड., कांगे्रस के पूर्व कार्यवाहक जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण धाकड़ और जनपद पंचायत पोहरी के अध्यक्ष प्रधुम्र वर्मा, पूर्व विधायक गणेश गौतम कट्टर सिंधिया समर्थक माने जाते थे। सिंधिया हरिवल्लभ शुक्ला को अपने लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस में लाए थे।

सिंधिया ने ही उन्हें 2013 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में पोहरी से चुनाव लड़ाया था। पूर्व मंडी अध्यक्ष एनपी शर्मा को भी सिंधिया ने 2008 में पोहरी से कांग्रेस का विधानसभा टिकट दिया था। जहां तक लक्ष्मीनारायण धाकड़ का सवाल है सिंधिया ने उन्हें शिवपुरी ग्रामीण मंडल का ब्लॉक अध्यक्ष बनाया। जनपद पंचायत पोहरी के अध्यक्ष प्रधुम्र सिंह वर्मा भी कट्टर सिंधिया समर्थक हैं। लेकिन इसके बाद भी सिंधिया के साथ उनका न जाना आश्चर्यजनक नहीं है।

इसका कारण यह है कि शीघ्र ही विधानसभा चुनाव होने हैं और जहां तक भाजपा का सवाल है यह तय है कि इस पार्टी का टिकट 2018 में विजयी हुए कांग्रेस के पूर्व विधायक सुरेश राठखेड़ा को मिलेगा। वह सिंधिया के साथ ही भाजपा में आए हैं। पूर्व विधायक गणेश गौतम शिवपुरी से दो बार विधायक रह चुके हैं। लेकन कहीं न कहीं पोहरी से चुनाव लडऩे की उनकी महत्वाकांक्षा है। इसी कारण वह भी सिंधिया के साथ भाजपा में नहीं गए। ऐसे में कांग्रेस टिकट की आशा मेें ये सिंधिया समर्थक कांग्रेस में बने हुए हैं।

जहां तक करैरा का सवाल है यहां पर भी उपचुनाव होना  है और सिंधिया के साथ यहां के उस समय के कांग्रेस विधायक जसवंत जाटव ने भी पार्टी और विधायक पद से इस्तीफा दिया तथा वह भाजपा में शामिल हुए और उनका भाजपा से टिकट पक्का माना जा रहा है। ऐसी स्थिति में कई सिंधिया समर्थक कांग्रेसी भाजपा मेें इसलिए नहीं गए क्योंकि वहां टिकट की कोई संभावना नहीं है।

इनमें पूर्व विधायक शंकुतला खटीक, सेवानिवृत डिप्टी कलेक्टर केएल राय, योगेश करारे, दिनेश परिहार, मानसिंह फौजी आदि शामिल हैं। शंकुतला खटीक को तो सिंधिया ने 2013 में विधानसभा का टिकट दिया था और चुनाव जितवाया था। मानसिंह फौजी, केएल राय भी सिंधिया के नजदीकी माने जाते हैं। नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष अनिल शर्मा अन्नी भी कांग्रेस में बने हुए हैं और उन्होंने भी सिंधिया का हाथ छोड़ दिया है। अनिल शर्मा अन्नी को लगता है कि कांग्रेस में उनकी अब अधिक पूछपरख होगी।