सोशल मीडिया पर सिंधिया के भाजपा छोडने की अटकलें, पीए ने बताया निराधार / Shivpuri News

शिवपुरी। बीते दो दिन से सोशल मीडिया पर जमकर हंगामा मचा हुआ है पूरे देश की राजनीति में इस हंगामे के चलते भूचाल आ गया है आये भी आखिर क्योे न आखिर मामला  ज्योतिरादित्य सिंधिया से जुडा हुआ है।

सोशल मीडिया पर इंडिया टीवी के कथित ट्वीट से प्रदेश की राजनीति में हडक़म्प मच गया। इस ट्वीट में सूत्रों के हवाले से भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के जल्द ही भाजपा छोडऩे की अटकलों को बल दिया गया था। ट्वीट में लिखा गया था कि सिंधिया भाजपा छोडऩे की तैयारी में हैं और उन्होंने भाजपा आलाकमान को अल्टीमेटम दे दिया है कि मंत्री बनाओ या परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे शिवराज।

इनके कारण इज्जत भी गई और कुछ मिला भी नहीं। मामा और मोदी ने मिलकर फंसाया। चूकि यह ट्वीट इंडिया टीवी के ट्वीटर हैंडल से जारी किया गया था। इस कारण इसे 2700 से ज्यादा बार रिट्वीट ट्वीट किया गया और 11000  से ज्यादा यूजर ने लाइक किया। सिंधिया के निज सचिव पुरूषोत्तम पाराशर ने वायरल ट्वीट को फर्जी बताते हुए कहा कि सिंधिया के  भाजपा छोडऩे की खबरें निराधार हैं और उन्हें कांग्रेस ने छपवाया और प्रसारित किया है।

बताया जाता है कि जिस ट्वीटर हैंडल से यह ट्वीट किया गया र्है वह न्यूज चैनल इंडिया टीवी का आधिकारिक ट्वीटर हैंडल नहीं है।

पूर्व मंत्री ओर सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की उपस्थिति में 11 मार्च को भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले वह 18 साल तक कांग्रेस में रहे और गुना लोकसभा सीट से चार बार सांसद रहे। हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में वह अपने अनुयायी केपी यादव से पराजित हो गए थे।

इसके बाद कांग्रेस मेें उनकी पूछपरख कम हो गई थी और प्रदेश राजनीति में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी ने उन्हें हांसिए पर ढकेल दिया था। आरोप है कि सिंधिया समर्थक मंत्रियों के साथ भी दोयम व्यवहार होने लगा था। उनके राज्यसभा टिकट में भी अडचने लगाई जाने लगी थी।

जिसके चलते सिंधिया ने कांग्रेस छोडक़र भाजपा ज्वाईन कर ली थी। हालांकि कांग्रेस मेें वह राहुल गांधी के काफी निकट माने जाते थे। कांग्रेस पार्टी छोड़ते उन्होंने कहा था कि अब कांग्रेस वह पार्टी नहीं है  जो कभी हुआ करती थी और कांग्रेस में उनके सपने टूट गए हैं। सिंधिया और उनके समर्थक विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे और समर्थक विधायकों ने विधायक पद से इस्तीफा देकर कमलनाथ सरकार को अल्पमत में ला खड़ा किया था और इस तरह से प्रदेश में भाजपा सरकार बनाने में सिंधिया की अहम भूमिका रही थी। लेकिन कोरोना महामारी के चलते देशव्यापी लॉकडाउन के कारण राज्यसभा चुनाव टल गए।

हालांकि भाजपा ने सिंधिया की उम्मीदवारी की घोषणा कर दी थी। लॉकडाउन के कारण सिंधिया समर्थक विधायक भी मंत्री नहीं बन पाए। सिंधिया के केन्द्रीय मंत्री बनने मेें भी यहीं अड़चने थी। इसी कारण उनके कांग्रेस में पुन: जाने की अटकलों को बल मिल गया और जब यह दावा एक प्रमुख चैनल के कथित ट्वीटर हैंडल से जारी ट्वीट में किया गया तो इस पर लोगों ने एकाएक अविश्वास नहीं किया।

इसी को आधार बनाकर समाचार छापे गए और हैडिंग दी गई कि सिंधिया की दोस्ती भाजपा को पड़ी महंगी। एक समाचार का शीर्षक था 22 विधायकों के साथ खुद के ही षडय़ंत्र में फंसे महाराज। सिंधिया के पर्सनल अस्सिटेंट पाराशर ने अपनी प्रतिक्रिया में सिंधिया के भाजपा छोडऩे के समाचारों को फेक न्यूज बताया और आरोप लगाया कि ये समाचार कांग्रेस ने छपवाए और प्रसारित किए हैं।