कोरोना काल में थम जाएगें जननी एक्सप्रेस के पहिए, वेंडर्स ने कलेक्टर को चेतावनी दी / Shivpuri News

शिवपुरी। इन दिनों कोरोना को लेकर संकट मडरा रहा है। चारों और एक वायरस ने तहलका मचा रखा है। हर कोई इस वायरस से बचने के उपायों में जुटा हुआ है। सरकार हर संभव मदद का दावा कर रही है परंतु धरातल पर स्थिति दयनीय हैै। मजदूर पलायन कर रहे है। लोगों के सामने खाने का संकट है। जिससे प्रशासन पुरी तरह से लड रहा है  इसी बीच एक ऐसी खबर जिला चिकित्सालय से शिवपुरी से आई जहां अब प्रसूताओं के लिए जीवन दायनी बनी जननी एक्सप्रेस के पहिए थमने वाले है।

अगर ऐसा हुआ तो पूरे शिवपुरी जिले में प्रसूताओं के सामने एक बडा संकट खडा होना तय है। भले ही मप्र में एस्मा को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने लागू कर रखा है परंतु ठेकेदार की मनमानी से तंग आकर जननी एक्सप्रेस वेंडरों ने 18 मई से जननी एक्सप्रेस के पहिए थामने की धमकी जिला प्रशासन को दी है। अगर 18 मई तक इनकी सुनवाई नहीं हुई तो यह अपना काम बंद कर देंगे।

जारी प्रेस नोट में जननी एक्सप्रेस वेंडर  और स्टाफ ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराते हुए बताया है कि प्रदेश भर में इस कोरोंना महामारी के दौर में जहां 108 जननी एक्सप्रेस दिन रात एक कर लगातार सेवाएं दे रही हैं वहीं इनको संचालित करने वाली कंपनी ज़िक़ित्ज़ा हेल्थ केयर लिमिटेड मुंबई की दमनकारी नीतियों से तंग आकर प्रदेश भर के जननी एक्सप्रेस वेंडर्स 18 मई से प्रदेश व्यापी बन्द करने की तैयारी में है।

मध्यप्रदेश में जननी एक्सप्रेस का टेंडर प्रदेश सरकार से ज़िक़ित्ज़ा हेल्थ केयर लिमिटेड मुंबई को मिला हुआ है। जिसने स्वास्थ्य विभाग से मिलने वाली राशि से लगभग आधी कीमत पर 800 जननी एक्सप्रेस के संचालन का जिम्मा प्रदेश भर में वेंडर्स को सौंपा है, तीन साल से अधिक समय से निर्वाध सेवा संचालन करने एवं शासन द्वारा चलाई जा रही इस अति आवश्यक सेवा को हितग्राहियों तक पहचाने मे प्रदेश के जननी वेंडर्स 24 घण्टे लगे हुये है।

ऐसे मे पिछ्ले कुछ महीनों से कंपनी ने अनावश्यक दबाव और पेमेंट में मनमाफ़िक भारी कटौती कर इनको परेशान करना शुरू कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि गाड़ियों का पेट्रोल खर्च और मेनटेनेंस भी मुश्किल से निकल रहा है और फायदे की जगह कर्मचारियों की सेलरी और गाड़ियों की किस्त जेब से भरनी पड़ रही है।

कंपनी ने अब घटिया किस्म के जीपीएस से बिलिंग लेना शुरू किया है। इसके साथ ही एग्रीमेंट से हटके ट्रिप सिस्टम लागू कर दिया है। जिससे एक गाड़ी पर हज़ार से साढ़े तीन हजार किलोमीटर तक का नुक़सान होता है जिससे मासिक राशि में पैंतीस से चालीस हज़ार रुपये की बिलिंग कम हो जाती है।

इस घटिया जी पी एस से एम्बुलेंस की वास्तविक लोकेशन भी ज्ञात नहीं होती जिस वज़ह से 108 कॉल सेंटर एम्बुलेंस चलाते हुए पायलेट को कई कई बार बे वजह कॉल करते है जिससे जननी एक्सप्रेस की दुर्घटनाओं में भी भारी इज़ाफ़ा हुआ है। पेट्रोल डीज़ल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से एम्बुलेंस संचालन का खर्च बढ़ गया है वहीं कंपनी ने वार्षिक इंक्रीमेंट राशि भी नहीं बढ़ाई है जोकि पिछ्ले कई महिंनो से लम्बित हैं।

इन सब वजहो से आर्थिक नुक़सान में काम करने वाले जननी एक्सप्रेस वेंडर्स अब प्रदेश भर की 108 जननी एक्सप्रेस को 18 मई से बन्द कर आंदोलन की शुरुआत करेंगे।
         
जननी एक्सप्रेस संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमित घोगरकर ने बताया कि ज़िक़ित्ज़ा हेल्थ केयर प्रा लिमीडेट मुंबई के आला अधिकारियों ने जब संघ की जायज मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो एन.एच.एम. और माननीय स्वास्थ्य मंत्री को इस विषय मे संज्ञान में लाकर प्रदेश भर में संघ के द्वारा बंद की तैयारी पूरी कर ली है।

अब 15,16 और 17 मई को एम्बुलेंस  गाड़ियों में पोस्टर लगाकर तथा एम्बुलेंस चालक काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगें साथ ही अगर वक़्त से पहले हमारी समस्याओ की ओर कम्पनी की तरफ से ध्यान नही दिया गया तो 18 मई से प्रदेश भर की जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस सेवा अनिश्चित काल के लिए बंद कर दी जाएंगी। इस आपातकालीन सेवा के बंद से होने वाली आम जन मानस को असुविधा के लिए भी संघ ने अपनी मजबूरी बताकर खेद जताया है।