लॉकडाउन में दुकानें बंद थीं फिर भी हजारों के बिल आ गए, व्यापारी बोले नहीं भरेंगे / Shivpuri News

शिवपुरी। कोरोना महामारी के दौर में जब समाज का हर वर्ग बुरी तरह से परेशान है और दुकाने दो महीने से अधिक समय से नहीं खुली हैं तब विद्युत विभाग की असंवेदनशीलता उजागर होकर सामने आई है।

बिजली विभाग ने व्यापारिक गतिविधियां ठप होने के बाद भी व्यापारियों को बिजली के मनमाने और भारीभरकम बिल थमा दिए। बंद दुकानों में एक-एक दुकानदार के तीन-तीन, चार-चार हजार से अधिक के बिल दिए गए हैं।

जिससे दुकानदार परेशान हैं और उनमें आक्रोश छाया हुआ है। विद्युत विभाग की इस मनमानी के खिलाफ चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि मंडल ने मानद सचिव विष्णु अग्रवाल के नेतृत्व में विद्युत विभाग के एसई को ज्ञापन देकर उनसे राहत की मांग की। अधीक्षण यंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह इस संबंध ेमें अपने वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर कोई निर्णय लेंगे।

वर्तमान संकट के दौर में जब सरकार प्रभावित जनता को राहत देने का प्रयास कर रही है, उसी दौर में प्रदेश सरकार का बिजली विभाग उपभोक्ता का शोषण करने में लगा हुआ है। विद्युत विभाग के मनमाने बिल के कारण उपभोक्ताओं की भीड़ विद्युत मंडल के कार्यालय में उमड़ रही है।

लेकिन अधिकांश उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिल रही है। बिजली विभाग ने व्यापारियों को मीटर रीडिंग से भी ज्यादा पुराने ढररे के बिल थमा दिए, जब दुकानें खुली रहती थी। लेकिन दो माह से दुकान बंद होने के बाद भी वहीं फिक्स बिल आंकलित खपत के थमा दिए गए हैं।

चैम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि मंडल ने अधीक्षण यंत्री को ज्ञापन देकर मांग की कि ऐसी स्थिति मेंं विभाग मीटर रीडिंग के हिसाब से चार्ज करे। जो कि पूरी तरह से वर्तमान परिस्थिति में जायज है। केवल उपयोग किए गए यूनिट के आधार पर लॉकडाउन अवधि में व्यापारियों और व्यापारिक फर्मो को बिल दिए जाएं।

कोरोना को आमंत्रित कर रहा है विद्युत विभाग
विद्युत विभाग अपनी मनमानी और अनाप शनाप बिल देकर कोरोना को खुलेआम आमंत्रित कर रहा है। विभाग 75 प्रतिशत से अधिक उपभोक्ताओं को गलत बिल दे रहा है। जिसकी बजह से उपभोक्ताओं को बिलों को संशोधित कराने विद्युत विभाग के दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

जिससे वहां जमकर भीड़ उमड़ रही है। दूसरे उपभोक्ता वहां भीषण गर्मी में बिल जमा करने की लाईन में खड़े हैं। वहां उपभोक्ताओं के लिए कोई व्यवस्था नहीं है और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ रही हैं। इसके बाद भी विद्युत विभाग उपभोक्ताओं की कोई सुनवाई नहीं कर रहा।