लॉकडाउन में ऑनलाइन हुआ कवि सम्मेलन, राष्ट्रीय कवियों ने काव्य पाठ किया | Shivpuri News

शिवपुरी। पिछले बीस दिन से अनवरत 4 बजे से 6 बजे तक जारी ऑनलाइन कवि सम्मेलन में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि कविता पाठ कर लोगो से घर रहने का आग्रह कर रहे है,कोरोना से लड़ने का जज्बा पैदा कर लोगो को इससे डर कर नही सावधानी से पार पाने का आग्रह कर रहे है।

रविवार को राम जी की कविता से सारे भारत मे प्रसिद्ध हो चुके इंदौर के कवि अमन अक्षर ने मुख्य रूप से उपस्थित होकर सभी के मन को मोहा।

अमन अक्षर ने जानकी पर आधारित अपनी कविता सुनाते हुए कहा कि जो है इस कथा के प्राण,उनके प्राण जानकी,राम एक सत्य जिसका है प्रमाण जानकी,पुण्य एक था मगर,पुण्य के घड़े अलग,युद्ध एक था मगर,दोनो ही लड़े अलग, जो न थे किसी के राम,राम थे खड़े अलग,जानकी के राम थे,राम से भी बड़े अलग,इस कथा से भी अलग है प्रमाण जानकी सुना सभी को मोहित किया।

अध्यक्षीय काव्य पाठ के लिए मौजूद टिमरनी हरदा के हास्य कवि मुकेश शांडिल्य चिराग ने अपनी कविता कोरोना पर सुनाते हुए कहा कि बड़ा घातक विषाणु है,जो लोगो पे दहाड़ा है,किसी को मौत बांटी है,किसी का घर उजाड़ा है,तुम्हे जिसने बनाया है उसे ही मार डालो तुम,कोरोना तुम कहो हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है,सुनाकर खूब तालियां बटोरी।

इसी क्रम में झांसी से आये कवि हरनाथ सिंह जी ने गधों को हरी घांस,बहुओं को सीधी सास,देश को विकास वाली राजनीति चाहिए सुनाई।

संजय शाक्य शिवपुरी ने एक दूजे के दिल मे रहे आज तक,एक दूजे की अब हम नजर में रहे,पंक्षियों से गुजारिश है मेरी यही और कुछ दिन वह अपने शजर में रहे।
विकास शुक्ल प्रचंड शिवपुरी ने कर्मठ कर्ता कर्मकार,ओजस्वी वक्ता सत्र का,मुख्य श्रोता जब हो चाहे तब मानुष बन जाता है सुनाई।

दिव्या भागवानी दिव्य श्वेत ने बातों को दिल से लगाना छोड़ दिया,बात बात पर हमने अश्क बहाना छोड़ दिया और प्रतीक शर्मा नानू ने यदि रावण न होते तो,राम राम न बन पाते,कुल को तारन की खातिर कुल के नाशक का वह श्राप नही पाते प्रस्तुत की। सरस्वती वंदना परवीन महमूद पिछोर ने प्रस्तुत की तो कवि सम्मेलन का संचालन संयोजक आशुतोष ओज ने किया।