खुला-खत:कोरोना काल के संकट में दगा कर गए कलयुगी भगवान, रण छोड भागे | Shivpuri News

खुशबू शिवहरे @ कहते हैं जब हम पर कोई संकट आता हैं तो हम भगवान को याद करते हैं,हिन्दू धर्म में संकट हरने का पूरा विभाग संकट मोचन हनुमान जी के पास हैं,उन्होने स्वंय श्रीराम के संकट हरे हैं कलयुग में प्रत्यक्ष देवता का रूप उन्है माना जाता हैं इस कलयुग में दूसरा दर्जा भगवान का डॉक्टरो को प्राप्त हैं।

कोरोना के इस संकट काल में डॉक्टर भगवान का रूप बनकर ही कोरोना के मरीजो की सेवा कर रहे हैं। अब बात करते हैं शिवुपरी के कलयुगी भगवान अर्थात डॉक्टरो की,शिवुपरी में सैकडो शासकीय डॉक्टर हैं वे अपनी सेवाए कोरोना काल में पूरी ईमानदारी से सरकारी अस्पताल में दे रहे हैं,लेकिन कलयुगी भगवान रण छोड भाग चुके हैं।

यह है शिवुपरी के रणछोड कलयुगी भगवान

शिवपुरी में अगर देखा जाए तो 1 दर्जन से अधिक छोटे-बडे प्राईवेट हॉस्पिटल हैं। आम दिनो में वह शहर की सबसे अच्छी मेडिकल सेवा देने का दावा करते थे। अप्रैल का महिना शुरू कर चुका हैं धूप में तपन बढने के साथ-साथ टेंपरेचर भी बढाना लगा हैं,अगर यह काल कोरोना काल नही होता तो इन छोटे-बडे हॉस्पिटलो में मरीजो की लम्बी लाईन लग रही होती।

कोरोना काल में तस्वीर उलट

लेकिन कोरोना काल में तस्वीर उलट हैं, शहर के 1 दर्जन से अधिक हॉस्पिटलो में से केवल नवजीवन हॉस्पिटल, सिद्धिविनायक हॉस्पिटल, वरदान हॉस्पिटल और एमएम हॉस्पिटल को छोडकर शहर का कोई भी हॉस्पिटल चालू नही हैं।

इन हॉस्पिटलो ने आपातकाल में अपनी सभी सेवाए साथ में वेल्टिलेटर जैसी ईमरजैंसी मेडिकल सुविधा जनहित में शासन को देने का वचन भी दे दिया है। इन को छोडकर सभी हॉस्पिटलो पर ताले लटके है। वह भी ऐसे समय में कोरानो की दहशत को देखकर शासन ने सरकारी अस्पताल में ओपीडी तक बंद कर दी हैं।

कोरोना काल में भारत के प्रत्येक नागरिको को कोरोना पॉजीटिव के लक्ष्ण रट गए हैं। जैसे सर्दी जुकाम गले में खरास,बुखार आना सांस लेने में तफलीफ इत्यादि। इस समय जिले में निवासरस किसी भी व्यक्ति को इनमे से एक भी लक्ष्ण हो जाता हैं तो उसका मन भयग्रस्त हो जाता हैं।

फिर वह सरकारी हॉस्पिटल जाने का प्रयास करता हैं,और अपनी जांच करने की जिद भी करने लगता हैंं। ईमारजैंसी सेवाओ को छोडकर फिर डॉक्टरो को समान्य सर्दी जुकाम या बुखार का ईलाज करना पडता हैं।

ऐसे समय में यह प्राइेवेट खुले होते तो हर सरकारी अस्पताल और सरकारी अस्पताल पर भी लोड कम होता और आम जनमानस को भी राहत मिलती,लेकिन इस संकट के काल में यह कलयुगी भगवान हॉम क्लोराटाईन हो गए। कहते हैं कि चिकित्सा एक ईमरजैंसी सेवा हैं। देश मे नही पूरे विश्व में इस समय मेडिकल ईमरजैंसी लगी हैं।

इन हॉस्पिटलो को आगे आकर अपनी मेडिकल सेवाए देनी थी,लेकिन ऐसा नही हुआ,वैसे यह हॉस्पिटल अपनी दवाए चिपकाने के लिए मेडिकल कैम्पो का आयोजन करते हैं।

हॉस्पिटलो के मेडिकल कैम्पो का दूसरा पहलू यह हैं इससे हॉस्पिटलो का विज्ञापन होता हैं दूसरा धंधा होता हैं अब सोच रहे होंगेे कि कैम्पो में तो मरीज को फ्री देखा जाता हैं तो फिर धंधा कैसे वह ऐसे की मरीज को देखा तो फ्री जाता हैं,लेकिन ऐसेी दवाए चिपकाए जाती हैं जो फीस तक वसूल लेती हैं।

समान्य दिनो में फ्री कैम्प लगाने वाले यह हॉस्पिटल मेडिकल ईमरजैंसी में गायब हैं,जब इन हॉस्पिटलो में तैनात डॉक्टरो की समाज को इस कोरोना काल के संकट में आवश्यकता हैं,तो वह गायब हैं रण छोड कर घरो में बैठे हैऔर वह समाज से तो गददारी कर रहे हैं साथ ही अपने पेशे से भी। इस कारण पूरा पेशा भी बदनाम हो रहा है।।

इस खबर का दूसरा पहलू यह भी

इन हॉस्पिटलो के नही खुलने से एक तो शहर की मेडिकल सेवाए तो प्रभावित हो रही हैं और ऐसे लॉकडाउन के समय में इन हॉस्पिटलो में काम करने वाला स्टाफ भी बेरोजगार हो गया हैं।

कलेक्टर शिवपुरी को संज्ञान में लेना चाहिए यह मामला

कलेक्टर शिवपुरी को यह मामला संज्ञान में लेना चाहिए,आम दिनो में जनता को लूटने वाले इन हॉस्पिटलो पर मेडिकल ईमरजैंसी के समय में अपनी सेवाए न देने के मामले मेें इन पर कार्यवाही करना चाहिए।