खुदाई में निकली जैन तीर्थंकरो की मुर्तिया, SDM का कचरा गाडी में भरवाने का प्रयास,जैन समाज का विरोध शुरू

शिवपुरी। अभी-अभी खबर आ रही है कि झांसी रोड पर स्थित आईटीआई के सामने एक छात्रावास के निर्माण के लिए खुदाई का काम चल रहा था,इस खुदाई में आज सुबह जैन मुर्तिया निकली। जैन मुर्तियो के निकलने की खबर पर एसडीएम मौके पर पहुंचे उन्होने खुदाई को रूकवाते हुए इन मुर्तिया को नपा की कचरा गाडी में भरवाने का प्रयास किया जिससे जैन समाज भडक गया और वही उसने धरना शुरू कर दिया।

जानकारी के अनुसार झांसी रोड पर स्थिती आईटीआई के सामने एक स्वरोजगार योजना के छात्रो के निवास के लिए एक छात्रावास का निर्माण किया जा रहा था। छात्रावास कि बिल्डिंग के निर्माण के पिलरो के लिए खुदाई का काम जेबीसी मशीन द्धारा किया जा रहा था।

खुदाई के लिए अभी 5 फुट पहुंची थी कि जमीन ने जैन तीर्थकंरो की मुर्तिया उगलना शुरू कर दी। बताया जा रहा हैं कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की 2 फीट की पूर्ण मुर्ति निकली हैं। इसके अतिरिक्त यक्ष और याक्षिणी की भी प्रतिमाए एंव मंदिर के अवशेष निकले हैं। सूचना के बाद एसडीएम शिवपुरी अतेन्द्र सिंह गुर्जर मौके पर पहुंचे उन्होने इस खुदाई को रूकवाते हुए नगर पालिका की कचरा गाडी में इन जैन तीर्थकरों की मुर्तिया भरवाने का प्रयास किया।

बताया जा रहा हैं कि एसडीएम के इस कृत्य के कारण वहां पर उपस्थित जैन समाज भडक गया,और एसडीएम से तीखी नोकझोक जैन समाज के लोगो से हुई। एसडीएम अतेन्द्र सिंह गुर्जर के द्धवारा जैन मुर्तियो को नपा की कचरा गाडी में भरवाने के प्रयास के कारण जैन समाज की भावनाओ आहत हुई।

बताया जा रहा हैं कि जैन समाज के सैकडो लोगो ने छात्रावास स्थल पर ही अब मंदिर बनाने की मांग कर डाली ओर मुर्तियो सहित धरने पर वही बैठने की धमकी दी हैं। जैन समाज और एसडीएम के बीच विवाद होने के कारण एसडीओपी,कोतवाली टीआई,देहात टीआई सहित यातायात सूबेदार रणवीर सिंह सहित पुलिस बल मौजूद हैं।

वही जैन समाज के कहना हैं कि यहां और मुर्तिया हो सकती हैं और मंदिर जैसा स्थल हो सकता हैंं। मुर्ति पदमाशन में है ओर प्रथम तीर्थकर आदिनाथ भगवान की पूर्ण मुर्ति हैं इसके अतिरिक्त यक्ष और यक्षिणी की भी प्रतिमाए खुदाई में निकली हैं। अभी खुदाई सिर्फ 5 फुट हुई हैं मंदिर के अवशेष भी निकलने के कारण ऐसा लगता हैं कि यहां कोई मंदिर परिसर भी हो सकता हैं। इस कारण इस स्थली की खुदाई अब पुरातत्व विभाग के द्धवारा की जाए।

भगवान आदिनाथ की इस प्रतिमा को सम्बंत 1220 की बताई जा रही हैं,यह प्रतिमा 13वीं शताब्दी की हैं। ऐसा माना जा रहा हैं कि मुगल अक्रमणकारियो के कारण इस प्रतिमा या मंदिर परिसर को छुपाया गया हो। खबर लिखे जाने तक जैन समाज अपने आगे की रणनीति प्रतिमा को पाने का प्रयास कर रहा हैं जिससे यह सागुपांग प्रतिमा पूजा से वंचित ना हो।