एक्सरे-ललित मुदगल/शिवपुरी। गुरूकुलम 30 स्कूल के मामले पर DEO कटियार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। बीते 7 फरवरी को गुरूकुलम 30 स्कुल का मामला प्रकाश में आया था। इस स्कूल की स्वंय की मान्यता नही हैं और यह स्कूल एक मोटी रकम लेकर अपने स्कूल की फ्रेंचचाईची दे रहा था। इसके साथ ही इस स्कूल में बेरोजगारों को गुमराह कर उनसे ट्रेनिंग के नाम पर पैसे ऐठे जा रहे है। परंतु डीईओ की कारगुजारी के चलते हालात यह है कि इस स्कूल संचालक को अब डीईओे ने खुली परमीशन दे दी है। जिसके चलते अब वह शहर के बेरोजगारों को खुल्लमखुल्ला लूट रहा है।
इस मामले की जांच जिला शिक्षा अधिकारी अजय कटियार कर रहे हैं। अभी इस स्कूल के संचालक को सिर्फ नोटिस दिया गया हैं, कटियार साहब विनय निवेदन कर उस स्कूल के मान्यता के दास्तावेज मांग रहे हैं, यही एक सवाल उठ रहा हैं कि अगर इस स्कूल की मान्यता हैं तो दास्तावेज तो DEO कार्यालय में होंगें लेकिन फिर भी DEO साहब मीडिया से वही रटारटाया जबाब दे रहे हैं कि अभी नोटिस जारी कर दस्तावेज मांगें है।
टॉप 30 गुरूकुलम नाम से खुला यह स्कूल सीधे-सीधे लूट कर रहा था। अपनी अन्य शाखाओ के लिए प्रिसिंपल बनाने व फैंचाईजी देने के लिए डेढ लाख की मांग कर रहा था। और ऐसे कई बेरोजगारो से 30-30 हजार रूपए ऐठ लिए थे। सवाल फिर सीधा सा है कि इस स्कूल की स्वयं की मान्यता नही हैं फिर कैसे ये स्कूल का संचालन कर अपनी लूटने की गतिविधि कैसे संचालित कर रखी थी।
इस मामले में जांच अधिकारी बने जिला शिक्षा अधिकारी अजय कटियार घटना दिनांक से आज तक जांच नही कर सके है ओर स्कूल अभी भी बडे शान से चल रहा हैं,कैसे। क्या इस स्कूल को बंद कराने के अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी को नही हैं,क्या जांच के नाम पर वसूली की प्रक्रिया शुरू हो चुकी हैं या वसूली हो चुकी हैं। अभी तक जांच पूरी कर मामला दर्ज क्यो नही करवाया गया यह सवाल अभी भी खडे हैं।
क्या था मामला
7 फरवारी 2020 को शिवपुरी समाचार डॉट कॉम को सूचना मिली कि सिद्धेश्वर मंदिर के सामने एक हॉल में एक स्कूल की संस्था की आपनिंग हुई है। इस स्कूल के बाहर विधिवत रूप से मुम्बई टॉप 30 गुरूकुलम के नाम का बोर्ड भी लगा हुआ था। जब इसमें जाकर पता किया तो सामने आया कि उक्त स्कूल की खुद की कोई मान्यता नहीं थी। उसके बाबजूद भी उक्त स्कूल संचालक जिले में 7 संस्थांए खोलने का दाबा कर रहा है।
इन स्कूलों के लिए उक्त स्कूल संचालक ने मान्यता तक के लिए एप्लाई तक नहीं किया। परंतु यहां शिक्षकों और स्कूल संचालक के लिए स्टाफ की भर्ती संचालित की जाने लगी। इस भर्ती के दौरान चैन सिस्टम से शहर के बेरोजगार लोगों से 20 से लेकर 30 हजार रूपए में स्कूल में संचालन सहित अन्य पोस्टों पर भर्ती करने के लिए लोगों से बसूली की जा रही थी।
इस मामले को शिवपुरी समाचार डॉट कॉम ने प्रमुखता से उठाया। जिसपर तत्काल तत्कालीन प्रभारी कलेक्टर एचपी वर्मा ने जांच करने के लिए डीईओ,बीआरसीसी को मौके पर भेजा। टीम ने मौेके पर पहुंचकर उक्त फर्जी स्कूल के संचालक के कागजात मांगे। जिसपर उक्त स्कूल का संचालक प्रशासन को कोई भी कागज उपलब्ध नहीं करा पाया।
जिसपर से उक्त स्कूल संचालक ने डीईओ को 2 घंटे में कागज उपलब्ध कराने का आश्वसन दिया। जिसपर डीईओ ने पूछा कि इस तरह से आप प्रशासन को बिना सूचना के लोगो से पैसे नहीं बसूल सकते। उसके बाद उन्हें कार्यालय आने की बात कहकर प्रशासन वहां से आ गया।
बताया गया है कि 2 घंटे का समय मांगने बाला उक्त स्कूल संचालक 3 दिन तक कार्यालय ही नहीं पहुंचा। उसके बाद तीन दिन बाद महज एक सोसाईटी का पंजीयन लेकर उक्त संचालक प्रशासन के पास पहुंचा। स्कूल की मान्यता के दास्तोवेज नही दिए गए हैं। घटना दिनांक से आज लगभग 25 दिन हो चूके हैं,लेकिन कार्यवाही नही हुई।
कार्यवाही नही होने के कारण DEO कटियार की कार्यप्रणाली और ईमानदारी पर सवाल उठ रहे हैं। जांच के नाम पर मामले को लटकाया जा रहा हैं। अपने राम का तो इस मामले में यही कहना हैं कि DEO साहब अपनी ईमानदारी का परिचय दिजिए और गुरूकुलम 30 पर कार्यवाही कर प्रेस नोट रिलीज कीलिए।
इनका कहना है
हम परीक्षाओं में उलझ गए थे। इसके चलते हम इन्हें स्मर्णपत्र जारी करना भूल गए थे। अब हम दिखबा रहे है कि इनका जबाब आया कि नही। अगर नहीं आया तो फिर हम लास्ट बार नोटिस जारी करते है। उसके बाबजूद भी अगर यह कागज उपलब्ध नहीं करा पाया तो हम कार्यवाही करेंगे।
अजय कटियार डीईओ,शिवपुरी।

