जिला चिकित्सालय: नवजात को अस्पताल में छोडकर भागी कलयुगी मां,प्रबंधन ने मामला छुपाया | Shivpuri News

शिवपुरी। अव्यवस्थाओं की खान जिला चिकित्सालय आए दिन अपनी कार गुजारी के चलते सुर्खियों में रहता आया है। चाहे मामला कॉपर टी का हो या फिर चिंटी कांड का। चाहे फिर अस्पताल से चोरी का हो या फिर डॉक्टरों की अभ्रदता का। कोई न कोई मामला ऐसा सामने आता रहता है जिससे अस्पताल जमकर सुर्खियों में रहता है। परंतु अब जो मामला सामने आया है वह तो अपराध की श्रेणी में आता है। परंतु अब इस मामले को अस्पताल प्रबंधन छुपाने का प्रयास कर रहा है।

जानकारी के अनुसार शिवपुरी जिला चिकित्सालय में 25 जनवरी को एक महिला द्वारा डिलेवरी के बाद इस बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल की एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था। लेकिन बच्चे को भर्ती कराने के बाद यह मां अपने बच्चे को लेने के लिए नहीं आई। 25 जनवरी की यह घटना बताई जा रही है और अभी तक इस नवजात बच्चे की मां का अस्पताल प्रबंधन पता नहीं लगा पाया है।

सबसे बड़ी बात यह है कि इस मामले में अस्पताल प्रबंधन को नवजात बच्चे को उसकी मां द्वारा छोड़े जाने के बाद इसकी सूचना पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को दी जानी चाहिए थी लेकिन इसकी विधिवत कोई सूचना नहीं दी गई। किशोर न्याय अधिनियमत के तहत यह अपराध की श्रेणी में आता है।

सवालों के घेरे में अस्पताल प्रबंधन

25 जनवरी को यह बच्चा एसएनसीयू में भर्ती कराए जाने के बाद अभी तक इसकी मां का पता नहीं लगा है। अब अस्पताल प्रबंधन सवालों के घेरे में है। कारण यह है कि जब महिला अस्पताल में प्रसव के लिए आई होगी तो उसका भर्ती पर्चा बना होगा। भर्ती पर्चे पर उसका नाम, पति का नाम व पता सहित पूरी जानकारी होगी लेकिन अब यह जानकारी छुपाई जा रही है।

जेजे एक्ट के तहत अपराध है ऐसी जानकारी छुपाना

किशोर न्याय अधिनियम 2015 (जेजे एक्ट) के तहत ऐसे नवजात बच्चे जिनके संरक्षण की जरूरत है या उन्हें लावारिश हाल में छोड़ दिया जाता है तो इसकी जानकारी तुरंत अस्पताल प्रबंधन को महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला बाल संरक्षण अधिकारी और सीडब्ल्यूसी  को दी जाना चाहिए थी लेकिन यह जानकारी नहीं दी गई। यह जानकारी छुपाना अपराध की श्रेणी में आता है।