चोरों ने मुक्तिधाम को भी नहीं छोडा, दानपेटी चुरा ले गए | Shivpuri news

शिवपुरी। शहर के  देहात थाना क्षेत्र में स्थित मुक्तिधाम पर रात्रि के समय कुछ अज्ञात चोरों ने मानवता संस्था के कार्यायल का ताला तोडक़र वहां से तीन मशीनों सहित अस्थी संचय और अंतिम संस्कार के उपयोग में आने वाली सामग्री चोरी कर ली। घटना की जानकारी जब आज सुबह संस्था के पदाधिकारियों को लगी तो वह मौके पर पहुंच गए और उन्होंने घटना की सूचना देहात पुलिस को दी।

लेकिन पुलिस सूचना के एक  घंटे बाद भी मौके पर नहीं पहुंची। जिसका परिणाम यह हुआ कि संस्था को कोई भी पदाधिकारी और कर्मचारी कार्यालय में प्रवेश नहीं कर सका। उनका कहना था कि पुलिस छानबीन करेगी और अगर वह प्रवेश करते हैं तो जांच प्रभावित हो जाएगी। ऐसी स्थिति में वहां अस्थी संचय के लिए आए लोगों को अस्थी संचय के लिए सामान उपलब्ध नहीं हो सका और वह भी पुलिस के आने का इंतजार करते रहे।

मानवता संस्था के अजय बंसल ने जानकारी देते हुए बताया कि रात्रि में सभी कर्मचारी ताला लगाकर चले गए थे। तभी रात्रि में कोई अज्ञात चोर मुक्तिधाम में प्रवेश कर गया और वहां बने कार्यालय का ताला तोडक़र उसमें रखी एक पत्थर काटने की मशीन, डेक मशीन, टिल्लू पंप और अंतिम संस्कार व अस्थी संचय में काम आने वाली सामग्री जैसे पहावड़ी, कपड़े के थैले, टिकली, छोटी मटकी सहित अन्य सामग्री चोरी कर ली।

इसके बाद चोर लकड़ी के भंडारण गृह में पहुंचे। जहां स्थित एक कमरे का ताला तोड़ा और उसमें रखी लकड़ी काटने की मशीन जिसकी कीमत लगभग 30 से 40 हजार रूपए थी। चोरों ने कई और कमरों के ताले तोड़े लेकिन उन्हें वहां कोई सामान नहीं मिला। चोरों ने अस्थी रखने वाले लॉकरों को भी तोडऩे का प्रयास किया। लेकिन वह सफल नहीं हुए।

आज सुबह जब संस्था का कर्मचारी लल्लू प्रजापति और नपा कर्मचारी का पुत्र सुरेंद्र गेचर प्रतिदिन की भांति वहां पहुंचा तो उसे कार्यालय सहित अन्य कमरों के ताले टूटे मिले। इसके बाद उसने संस्था के सभी पदाधिकारियों को सूचना दी। सूचना पाकर सभी लोग वहां पहुंचे और तुरंत ही फिजिकल पुलिस को चोरी की जानकारी दी।

दान पेटी का ताला भी तोड़ा
मुक्तिधाम के विकास एवं रखरखाव के लिए संस्था द्वारा मुक्तिधाम पर शिवलिंग के रूप में लगाई गई दानपेटी को भी चोरों ने नहीं छोड़ा। चोरों ने दान पेटी का ताला तोडक़र उसमें रखी दान राशि भी चोरी कर ली। दान पेटी में मुक्तिधाम पर आने वाले लोग अपने स्वेच्छानुसार गुप्त रूप से दान करते थे और इसलिए यह दान पेटी स्थापित की गई थी।