PM आवास: किसी ने बकरी तो किसी ने खाने का गेहूं बैचकर दी रिश्वत, फिर भी नही मिला पीएम आवास

कोलारस। इन दिनों मध्यप्रदेश में भले ही सरकार बदल गई है। सीएम कमलनाथ जीरो टालरेट के विज्ञापन पर लाखों खर्च कर रहे हो परंतु यहां तो अधिकारी कसम खाकर बैठे है कि कोई भी बदले पर हम नहीं बदलेगे। जिसके चलते इन शासन के अधीनस्थों ने रिश्वत के लिए किसी अपनी बकरी तो किसी ने खाने के गेंहू बेचकर इनको रिश्वत दी है। परंतु उसके बाबजूद भी गरीबों को पीएम आबास नही मिल सका।

पहले भाजपा की सरकार थी अब कांग्रेस की सरकार मध्यप्रदेश में मौजूद है। सरकार बदल गई, समय बदल गया लेकिन कोलारस जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली करीबन दो दर्जन ग्राम पंचायतों में पहले जैसा ही फर्जीवाड़ा चल रहा है।

धरातल पर जाकर देखा जाए तो ना तो निर्माण कार्य मिलेंगे और ना ही शासन की योजनाओं का लाभ किस हितग्राही को मिला हैं। यह भी मौके पर जाकर पता चल जाएगा कि कोलारस जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत टीला, अनंतपुर, गुढा, डोडआई, देहरोद, पाडोदा, किलावनी, सरजापुर, मोहरा, मोहराई, अटारा, खोकर में निर्माण कार्यो में धांधली की गई है।

ग्राम पंचायत झाडेल में तो फर्जीवाड़ा कर शासन की आंखों में धूल झोंक कर सरपंच सचिव रोजगार सहायक ने कागजों में खेल का मैदान बना दिया और फर्जी फर्म के नाम से मनमाने बिल लगाकर रुपए निकाल लिए और आपस में बांट लिए।

ग्रामीण जनों द्वारा कई बार शिकायतें की परंतु हाल वही पुराना है, आला अधिकारियों ने भी ध्यान नहीं दिया क्योंकि सब मिल बैठकर शासन का रुपया हजम करने में पूरी ताकत के साथ जुटे हुए हैं।

आला अधिकारी निरीक्षण के नाम पर नोटिस देकर पंचायतों से अवैध रूप से वसूली करवा रहे हैं, कोलारस जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत टीला में तो जमकर फर्जीवाड़ा हुआ है। टीला के अंतर्गत आने वाले ग्राम इमलावदा में सीसी खरंजा निर्माण किया गया था, जो धर्मेंद्र के घर से काली माता मंदिर तक हुआ था, जिसकी अनुमानित लागत 3 लाख के करीबन थी, परंतु खरंजा निर्माण ढाई और 3 इंच का डाला गया है जो कि नियमों के विरुद्ध है। इसी तरह आदिवासियों से कुटीर बनवाने के लिए 10 से लेकर 15 हजार रुपए तक मांगे गए हैं।

ग्राम पंचायत टीला के अंतर्गत आने वाले गांव में आदिवासियों ने अपनी बकरियां बेचकर कुटीरे बनवाई हैं। पात्र लोग आज भी कुटीर के लिए दर-दर भटक रहे हैं परंतु उनको प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका है। इसी तरह ग्राम पंचायत झाडेल, खेरोना, साखनोर, लूकवासा में तो आवास योजना का लाभ देने के लिए अवैध वसूली की गई है और आज भी आदिवासी बहुल पंचायतों में आदिवासियों से लेकर गरीब लोग कुटीर पाने के लिए सरपंच सचिव और रोजगार सहायकों के चक्कर लगा रहे हैं।

आए दिन अनेक शिकायतें जिम्मेदार आला अधिकारियों के पास आती है परंतु सचिवों रोजगार सहायकों से सांठगांठ होने के चलते शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता और नोटिस देकर शिकायतों को दबा दिया जाता है। कोलारस जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली एक दर्जन ग्राम पंचायतों में फर्जीवाड़ा भ्रष्टाचार मनमानी जमकर चल रही है, जिसे कोई रोकने वाला दिखाई नहीं दे रहा।

जनपद पंचायत के आला अधिकारी से लेकर पंचायत इस्पेक्टर उपयंत्री कर्मचारी सब शिकायतें आने के बावजूद भी अनदेखी कर देते हैं। जिसके चलते धरातल पर ना तो निर्माण कार्य दिखाई दे रहे और ना ही शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ गरीब हितग्राहियों को नहीं मिल रहा है और वह सरकार की योजनाओं से पूरी तरह से वंचित होते हुए दिखाई दे रहे।