शहर भर में सिंथेटिक दूध और घी का कारोबार चरम पर, खाद्य विभाग मौन | Shivpuri news

शिवपुरी। प्रदेश सरकार द्वारा नकली, घी, दूध विक्रय करने वालों के विरूद्ध चलाए गए अभियान के तहत जिला मुख्यालय पर पदस्थ खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा एक दो सप्ताह अभियान चलाकर कुछ चुनिंदा डेयरी संचालकों के विरूद्ध सेम्पिलिंग की गई। तदोपरांत खाद्य विभाग सुन्नपात की स्थिति में पहुंच गया हैं। जबकि डेयरी संचालक हम नहीं सुधरेंगे की तर्ज पर एक बार फिर से उनके द्वारा सिंथेटिक दूध, घी का कारोबार प्रारंभ कर खाद्य विभाग को मुंह चिड़ाते हुए नजर आ रहे हैं। जबकि इसका खामियाजा शहर के भोले भाले नागरिकों को झेलना पड़ रहा हैं। सिंथेटिक घी व दूध के उपयोग किए जाने पर नागरिकों को विभिन्न बीमारियों का भी सामना करना पड़ रहा हैं।

शहर में में झांसी तिराहा के पास स्थित दूध डेयरी, अस्पताल चौराहा, लुहार पुरा की पुलिया, नीलगर चौराहा, विष्णु मंदिर, सर्किट हाउस रोड़, माधव चौक, न्यूब्लॉक, कमलागंज, राजेश्वरी रोड़, मनियर रोड़, नवाब साहब रोड़, में मिलावटी दूध व घी मिलता है। इस संदर्भ में पहले भी खादय़ विभाग द्वारा दूध डेयरियों के सेंपल भी लिए गए लेकिन हमेशा की तरह विभाग द्वारा सिर्फ खाना पूर्ति ही की जाती है व भारी मात्रा में पैसों का लेनदेन कर सैंपल जांच के लिए भेजे ही नहीं जाते।

इस दूध डेयरी में जो दूध बेचा जाता है वह मात्र 40 प्रतिशत ही दूध वालों से खरीदा जाता है बाकीं 60 प्रतिशत यूरिया, डिटजेंट व अन्य हानिकारक चीजों से तैयार किया जाता है जिसके चलते किशन दूध डेयरी द्वारा यहां के आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलबाड़ किया जा रहा है।

15 रुपए लीटर में तैयार होता है दूध  
दूध डेयरी पर मात्र यूरिया व डिटजेंट की मदद से मात्र 12 से 15 रुपए लीटर में दूध तैयार करके मार्केट की कीमत से 2 रुपए कम में बेचा जाता है। इसके अलावा शादियों में पार्टियों में जिस दूध की सप्लाई की जाती है उसके से मात्र 10 प्रतिशत दूध की ऑरिजनल होता है बांकी 90 प्रतिशत नकली होता है इसके लिए डेयरी द्वारा हलवाईयों को भी भारी मात्रा में कमीशन दिया जाता है।

80 रुपए किलो में बन जाता है घी
शहर की दर्जनों दूध डेयरी द्वारा अपने ग्राहकों व बाहर दूसरे शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में बिक्री के लिए जो घी तैयार कर भेजा जाता है उसकी कीमत मात्र 80 रुपए प्रति लीटर होती है जिसे आसानी से 300 से 500 रुपए लीटर में क्वालिटी अनुसार बेच दिया जाता है। भारी मात्रा में मुनाफा कमाने के बाद शासकीय कर्मचारियों को भी उनका हिस्सा पहुंचा दिया जाता है।

सरकारी कर्मचारियों की मदद से फलफूल रहा है कारोबार
शहर में कई डेयरी संचालकों द्वारा लुधावली में स्थित एक गोदाम के सहारे पिछले 10 सालों से जो मिलावट का कारोबार किया जा रहा है वह सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों की मदद से फलफूल रहा है। बिना मिलीभगत से इतना बड़ा मिलावट का कारोबार संभव नहीं है। जानकारी के अनुसार प्रतिमाह लाखों रुपए का कमीशन इन अधिकारियों को उक्त दूध डेयरियों द्वारा बांटा जाता है, जिसके चलते यह धंधा निरंतर जारी है और जनता के स्वास्थ्य के साथ शहर में खुलेआम खिलबाड़ किया जा रहा है।

ईमानदारी से जांच हो तो हो सकता है बड़े रैकेट का पर्दाफाश
डेयरी से काफी समय से जुड़े एक शख्स के अनुसार शहर के आसपास व अन्य जगहों से बड़ी मात्रा में दूध व घी के आर्डर आते हैं, पैसा पूरा एडवांस जमा कराया जाता है, उसके बाद माल तैयार किया जाता है और देर रात सप्लाई की जाती है। कुछ विश्वसनीय लोगों की सहायता से इस पूरे काम को पूरा किया जाता है। यह डेयरी कहीं और नहीं शहर के झांसी तिराहा क्षेत्र में संचालित हैं।