विधानसभा में उछला चना खरीदी कांड: मंत्री जी के जवाब से आरोपी अफसरों से पाप धुल गए

ललित मुदगल@एक्सरे / शिवपुरी। कोलारस का बदनाम चना अब विधानसभा में भी उछलने लगा है। कोलारस विधानसभा क्षेत्र में किसानो की उपज की हुई खरीदी में किसानो का लगभग चार करोड रूपए अटक गया हैं। सरकार ने विधानसभा में उठाए गए किसानो के भुगतान के प्रश्न के जबाब में 48 लाख देने का वादा किया हैं बाकी भुगतान के लिए सरकार खरीद केन्द्रो और परिवहन करने वालो से वसूली कर देंगी।

विधानसभा में दिए मंत्री जी के इस जबाब के 2 अर्थ सामने आ रहे हैं कि एक तो किसानो का भुगतान कैसे होगा,दूसरा इस अमानक खरीदी काण्ड में फसे अफसरो को पाप स्वत:ही धुल गए आईए इस पूरे मामले का एक्सरे करते हैं।(आप पढ रहे हैं शिवपुरी समाचार डॉट कॉम)

शिवपुरी की कोलारस विधानसभा में 11 सोसायटी के 391 किसानों से समर्थन मूल्य पर हुई खरीदी का भुगतान अटका हुआ हैं। इन किसाना से समर्थन मूल्य पर वर्ष 2018/2019 में चना,मसूर,सरसों की खरीद की गई थी।

कोलारस विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी ने विधानसभा में प्रश्न किया तो सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ.गोविंद सिंह ने कहा कि सरकार खरीद केन्द्र प्रभारियों और परिवहनकर्ता से वसूली की कार्रवाई करने जा रही हैं। इसके साथ 48.21 लाख की प्रतिपूर्ति प्रस्ताव विपणन संघ को दिया हैंं। प्रस्ताव पर विचार होते ही किसानो का भुगतान किया जाएगा।

कोलारस के किसानों का 3 करोड 63 लाख 95 हजार 450 रूपए का भुगतान अटका हैं। विधानसभा में विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी के प्रश्न के जवाब में सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ.गोविंद सिंह ने कहा कोलारस की उपार्जन संस्था पर शॉर्टेज होने,कृषि उपज के अमानक होने से वर्ष 2018/19 में चना मसूर सरसो की फसल बेचने वाले 391 किसानो का 3 करोड 63 लाख 95 हजार 450 रूपए का भुगतान होना शेष हैं।

किसानो का भुगतान अटकने में संस्था स्तर पर हुई कमी के लिए खरीद केंन्द्र प्रभारियों के खिलाफ मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 58 बी के तहत प्रकरण दर्ज कराए गए हैं। परिवहन स्तर पर हुई लापरवाही के लिए आर्बीट्रेशन में प्रकरण प्रस्तुत किए गए हैं।

यहां से निर्णय के बाद केंद्र प्रभारियों और परिवहन कर्ताओ से वसूली राशि से किसानो का भुगतान संभव हो सकेगा।(आप पढ रहे हैं शिवपुरी समाचार डॉट कॉम) साथ ही किसानों के भुगतान के लिए अमानक मानक मात्रा की नीलामी की कार्रवाई प्रक्रिया में हैं। नीलामी से मिलने वाली रकम,खरीद केंन्द्र प्रभारियों,परिवहन कर्ताओ से होने वाली वसूली से किसानो का भुगतान संभव हो सकेगा।

कुल मिलाकर सीधा सा दिखने में आ रहा हैं जिन किसानो को भुगतान अटका है सरकार वसूली करके दे्ंगी। सरकार के इस बयान से भ्रष्टाचार करने वाले अफसर बच गए हैं। खरीद केन्द्रो में अमानक उपज कैसे पहुंची,यह जांच का विषय भी हैं। (आप पढ रहे हैं शिवपुरी समाचार डॉट कॉम)विधानसभा में दिए गए इस मामले के जबाब से अफसरो के पाप धुल गए हैं और करोडो रूपए की खरीद काण्ड से बच गए हैं। अब देखते हैं कि इस मामले में क्या होता हैं।

अगर खरीद केन्द्र प्रभारियों और परिवहन कर्ताओ से वसूली की प्रक्रिया अपनाई जाऐगी तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं और आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू होगा। मामला कब तक निबटेंगा कोई समय सीमा नही हैं,कुल मिलाकर किसान अपने भुगतान के लिए तपस्या करते नजर आऐगा। जिन्होने घोटाला करके करोडो डकारे हैं उन्है इन पैसे डकारे पैसे पचाने के लिए 5 रूपए की ईनो खाने की आवश्यकता नही पडी। वे मन ही मन अपने मंत्री को थैक्यू बोल रहे होंगें।