खनियांधाना। खबर जिले के पिछोर अनुविभाग के खानियधनां थाना क्षेत्र के गांव बरबटपुरा से आ रही है की इस गांव के निवासरत एक आदिवासी परिवार में बहू की हत्या कर दी गई,अब इसकी सजा कानून तो हत्यारे बेटा का देंगा ही,लेकिन इसका परिवार भी इसकी सजा भुगत रहा हैं।
बीते रोज दहेज में बाईक न मिलने के कारण शिवराज आदिवासी ने अपनी पत्नि की हत्या कर दी,शिवराज के पिता ने ही अपने बेटे के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज करया हैं,लेकिन आदिवासी समाज ने इस दहेज हत्या का घोर विरोध करते हुए शिवराज के कुटुम्ब को ही दंड दे डाला। बताया जा रहा हैं कि आदिवासी समाज ने इस परिवार को समाज से निकाल दिया हैं इस परिवार से सभी प्रकार के संबंध खत्म कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि आदिवासी समाज ने आरोपी कुटुंब के सभी 6 मकानो पर तालाबंदी कर दी। आरोपी से संबंध रखने वाले हर महिला पुरूष और बच्चे भी गांव में घुसने पर भी प्रतिबंध लगा दिया हैं।
जानकारी मिल रही हैं कि इस परिवार के गांव में घुसने के प्रतिबंध लगाने के कारण जरूरत का समान भी नही हैं। इस कडकडाती ठंड में पहहने और बिछाने तक के लिए कपडे नही हैं। जंगल में मासूम बच्चो के साथ आग के सहारे रात काट रहे हैं।
आदिवासी समाज ने कुटुम्ब के जिन लोगों को घर से निकाला है, उनमें आरोपी शिवराज के पिता शिवदयाल, बड़ा भाई भूरा, छोटा भाई सतीश व लायकराम, मां छतिया व भूरा की दो माह की बेटी शामिल है।
इसके अलावा शिवराज के ताऊ मुकुंदी सहित ताई द्रोह व चचेरेे भाई जसरत, रामदयाल, रघुवर, श्रीपत सहित जसरत की दो बेटियां छाया व प्रियंका, रामदयाल का बेटा संदीप व बेटी निशा शामिल है। इसी तरह शिवराज के चाचा शिवलाल, चाची सुंथरा व चचेरा भाई हरभान व कपूर सहित हरभान के तीन बच्चे रामक्रेश, उमेश व बेटी संजू आदिवासी शामिल है।
शिवराज के चचेरे भाई जसरत आदिवासी का कहना है कि उनके कुटुम्ब के तीन परिवार शिवनगर में रहते हैं। इसमें बड़े दाऊ निरभा आदिवासी, मंगल व पूरन आदिवासी शामिल हैं। शिवनगर में भी समाज के लोगों ने पापी कहकर निकाल दिया।
कहने लगे कि आपके कुटुम्ब में बहू की हत्या हुई है। जब तक कलंक नहीं मिटेगा, गांव में नहीं रह सकते। इसलिए तीनों परिवार भी बरबटपुरा से दो किमी दूर कुटुम्ब के साथ नौ झोपडियों बनाकर रहने लगे हैं।
जसरत आदिवासी का कहना है कि कलंक तो लग गया है, इसे मिटाना जरूरी है। इसलिए जो दंड पंच देंगे उसको मानना ही पड़ेगा। इसका विरोध नहीं कर सकते और ना ही पुलिस में शिकायत कर सकते हैं।
बीते रोज दहेज में बाईक न मिलने के कारण शिवराज आदिवासी ने अपनी पत्नि की हत्या कर दी,शिवराज के पिता ने ही अपने बेटे के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज करया हैं,लेकिन आदिवासी समाज ने इस दहेज हत्या का घोर विरोध करते हुए शिवराज के कुटुम्ब को ही दंड दे डाला। बताया जा रहा हैं कि आदिवासी समाज ने इस परिवार को समाज से निकाल दिया हैं इस परिवार से सभी प्रकार के संबंध खत्म कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि आदिवासी समाज ने आरोपी कुटुंब के सभी 6 मकानो पर तालाबंदी कर दी। आरोपी से संबंध रखने वाले हर महिला पुरूष और बच्चे भी गांव में घुसने पर भी प्रतिबंध लगा दिया हैं।
जानकारी मिल रही हैं कि इस परिवार के गांव में घुसने के प्रतिबंध लगाने के कारण जरूरत का समान भी नही हैं। इस कडकडाती ठंड में पहहने और बिछाने तक के लिए कपडे नही हैं। जंगल में मासूम बच्चो के साथ आग के सहारे रात काट रहे हैं।
आदिवासी समाज ने कुटुम्ब के जिन लोगों को घर से निकाला है, उनमें आरोपी शिवराज के पिता शिवदयाल, बड़ा भाई भूरा, छोटा भाई सतीश व लायकराम, मां छतिया व भूरा की दो माह की बेटी शामिल है।
इसके अलावा शिवराज के ताऊ मुकुंदी सहित ताई द्रोह व चचेरेे भाई जसरत, रामदयाल, रघुवर, श्रीपत सहित जसरत की दो बेटियां छाया व प्रियंका, रामदयाल का बेटा संदीप व बेटी निशा शामिल है। इसी तरह शिवराज के चाचा शिवलाल, चाची सुंथरा व चचेरा भाई हरभान व कपूर सहित हरभान के तीन बच्चे रामक्रेश, उमेश व बेटी संजू आदिवासी शामिल है।
शिवराज के चचेरे भाई जसरत आदिवासी का कहना है कि उनके कुटुम्ब के तीन परिवार शिवनगर में रहते हैं। इसमें बड़े दाऊ निरभा आदिवासी, मंगल व पूरन आदिवासी शामिल हैं। शिवनगर में भी समाज के लोगों ने पापी कहकर निकाल दिया।
कहने लगे कि आपके कुटुम्ब में बहू की हत्या हुई है। जब तक कलंक नहीं मिटेगा, गांव में नहीं रह सकते। इसलिए तीनों परिवार भी बरबटपुरा से दो किमी दूर कुटुम्ब के साथ नौ झोपडियों बनाकर रहने लगे हैं।
जसरत आदिवासी का कहना है कि कलंक तो लग गया है, इसे मिटाना जरूरी है। इसलिए जो दंड पंच देंगे उसको मानना ही पड़ेगा। इसका विरोध नहीं कर सकते और ना ही पुलिस में शिकायत कर सकते हैं।

