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रेत माफिया ने नदी मोड़ दी, खेत तबाह कर दिए, प्रशासन फिर भी चुप है | kolaras News

बदरवास। जिले में करैरा के बाद कोलारस अनुविभाग में रेत का काला कारोबार होता हैं। सिंध की रेत जिसे मार्केट में गोल्डन सैंड के नाम से जाना जाता हैं,सबसे ज्यादा डिंमाड होने के कारण लगतार इस गोल्डन सैंड के मफिया सिंध नदी की हत्या करने पर उतारू हैंं। इस रेत के काले कारोबार को देखकर लगता हैं,कि इसको रोकने की जिम्मेदारी लेकर आफिसो में बैठे जिम्मेदार सब सेट हैं। क्यो की इस गोल्डन सैंड का कारोबार बडे-बडे वाहनो से होता है।

भ्रष्टाचार के कारण छुप जाती है इतनी बडी मशीने

बताया जा रहा हैं कि रात होते ही इस चमकीली गोल्डन सैंड को खोदन के लिए बडी-बडी मशीने नदी में उतार देते हैं और भोर होने से पूर्व डंफरो और ट्रेक्टरो से परिवहन कर लिया जाता हैं। सडबूड घाट,घुरवार घाट, बिजरौनी घाट,आरी घाट,एनवार घाट से यह अबैध रेत डंफरों मे ट्रेक्टरों भर कर फोरलाईन होते हुए बदरवास एवं अन्य जगह सपलाई की जाती है। जिसमें सर्वाधिक रेत सडबूड घाट और घुरवार घाट से निकाली जा रही है।

कार्यवाही से कतरा रहे हैं जिम्मेदार

अबैध रेत दिन दहाडे होने के बाद भी पूरी अबैध डम्परों से भरे ट्रेक्टर ट्राली सहित डंपर निकलने के बाद भी स्थानीय पुलिस सहित राजस्व और माईनिंग विभाग के अधिकारियो को सडको पर दौडते इतने वाहन नही दिखते हैं सवाल बडा हैं और अपने जबाब के लिए खडा हैं। रेत माफियो द्धारा सडक से लेकर आफिस तक सब सेट कर रखे है। इससे बडा भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष उदाहरण की भी देखने को नही मिलेंगा ।

खेतों व नदियों का स्वरूप बिगडा

क्षेत्र मे सर्वाधिक अबैध रेत का कार्य पूर्व मध्यप्रदेश सरकार के समय से आज भी निरंतर जारी है। सडबूड, घुरवार, आरी, एनवारा, बांसखेडा,,रिजौदी, आदि कई एक दर्जन से अधिक जगहों पर अबैध रेत निकलने का कार्य निरंतर जारी है जिसके कारण नदियां तालाब का रुप ले चुकी हैं और आसपास घाटों से लगे किसानों के खेत का कटाव हो रहा है जिससे नदियों के साथ साथ खेतों का भी स्वरूप बिगड रहा है।

गाँवों एवं बजारों मे हो रही है डंप बदरवास के कई ग्रामों सहित बदरवास बजार मे भी सेंकडों जगह बदरवास पुलिस के नाक के नीचे रेत माफियाओं के द्वारा अबैध रेत को डंप किया जा रहा है फिर भी प्रशासन मौन हैं।

इनका कहना है।
रेत माफिया कोई भी हो बचेगा नही हम शीघ्र ही बड़ी कार्यवाही करने वाले हैं।
आशीष तिवारी एस,डी, एम, कोलारस

इनका कहना है
रेत खनन में अधिकतर गरीब किशान को ही टारगेट किया जाता है। गऱीब किशान अपने मकान बनाने के लिये रेत लाता हैं तो उसको पकड़ लिया जाता हैं।लेकिन जो बड़े रेत कारोबारी हैं उनको नही पकड़ा जाता हैं।
भूपेंद्र यादव नगर परिषद उपाध्यक्ष बदरवास