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सिंधिया के शरणागत होने के बाद गले की फांस बन रहा है बसपा का प्रत्याशी लोकेन्द्र सिंह | Shivpuri News

एक्सरे ललित मुदगल@शिवपुरी। देश इस समय लोकसभा के चुनाव मोड में हैं। गुना-शिवुपरी लोकसभा सीट पर भी अब चुनाव ने अपना रंग दिखना शुरू कर दिया हैं, इस चुनाव में जो सबसे उलट फेर हुआ हैं वह है बसपा के अधिकृत प्रत्याशी लोकेन्द्र सिंह राजपूत द्धारा रण में सिंधिया के समक्ष हथियार डालना। 

बसपा प्रत्याशी लोकेन्द्र सिंह ने अपना समर्थन कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में अपना समर्थन देकर सिंधिया के शरणागत होने से माना जा रहा था कि बसपा के  मैदान में हटने से सिंधिया को लाभ होेगा, लेकिन शिवुपरी की चुनावी फिजाओ में उकत समीकरण उल्टा हो गया हैं। सिंधिया के शरणागत होने के बाद भी गले की फांस बन रहा हैं बसपा का प्रत्याशी लोेकेन्द्र सिंह,आईए इस पूरे मामले का शिवपुरी समाचार डॉट कॉम पर एक्सरे करते हैंं। 

पिछले चुनाव में सांसद सिंधिया लगभग सवा लाख वोटो से जीते थें। पिंछले चुनाव में महल विरोध से पैदा हुए नेता जयभान सिंह पवैया चुनाव मैदान में थे। इस बार सिंधिया के सामने कांग्रेस के आयातित नेता और कभी सिंधिया के सांसद प्रतिनिधि रहे कपी यादव यादव को भाजपा ने उतारा हैं।

राजनीति के गणित में अक्सर देखा और सुना गया है कि बसपा कांग्रेस को खतरा पैदा करती हैंं।इसी गणित के चलते सिंधिया ने बसपा प्रत्याशी को अपना ओर खीचने की कसरत शुरू की,ओर वह इसमें सफल भी रहे। और अत: बसपा प्रत्याशी हाथी से उतरकर हाथ से हाथ मिला लिया और सिंधिंया के शरणागत हो गए। 

लोकेन्द्र सिंह के बीच रण में भाग जाने से बसपा का मूल वोटर दुखी हो गया। और उसने भी कांग्रेस से बदला लेने की ठानी ली। सुत्रो के मुताबिक जो कल तक बसपा के नेता और कार्यकर्ता बसपा के लिए काम कर रहे थे बे अब भाजपा के लिए काम करते दिख रहे है।

वही जैसे ही इस घटना की खबर मिडिया पर प्रकाशित की गई कि बसपा के प्रत्याशी ने कांग्रेस को समर्थन दिया और कांग्रेस में शामिल। इस घटना से धाकड समाज पर बडा असर हुआ हैं,लोकेन्द्र सिंह धाकड समाज से है और माना जा रहा था कि इससे भाजपा को नुकसान होगा,आधे से ज्यादा धाकड समाज भाजपा का वोटर माना जाता रहा है,लेकिन अब बसपा का प्रत्याशी के रण छोड जाने से भाजपा को फायदा हुआ हैं। 

इस राजनीतिक घटना के बाद बसपा के प्रत्याशी को सोशल मिडिया पर लगातार ट्रोल किया जा रहा हैं,काई जाति का गददार लिख रहा है तो कोई बिकने की बात कर रहा हैं,तो कोई कांग्रेस को सबक सीखाने की बात कर रहा हैं। 

अब बात यादव समाज की कर रहे है। भाजपा भाजपा का प्रत्याशी यादव समाज का होने के कारण माना जा रहा है कि समाज को वोट कांग्रेस से अधिक भाजपा को जा सकता हैं। लोधी वोट भी भाजपा को अधिक मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। 

भााजपा मोदी और राष्ट्रवाद के नाम पर वोट मांग रही है। मोदी के नाम से भाजपा को फायदा होने का अनुमान दिख रहा है। शिवुपरी शहर में सिंधिया के समर्थन में लगाए गए पानी के पोस्टर से भी सिंधिया के प़क्ष में जाते नही दिख रहे। कोई कितना भी चीख ले कि शिवपुरी में पानी की समस्या की निदान हो गया हैं,लेकिन धरातल पर नही है। 

जो हाथ में कटटी लेकर सडक पर पानी भर रहे हैं ओर सिंधिया के समर्थन में लगे शहर की पेयजल समस्या के पोस्टरो को देख कर क्या सोचता होगा ये तो भगवान जाने। शायद इसी कारण ही शहर सिंधिया से पिछले चुनाव में नाराज था ओर इसी कारण ही पिंछले चुनाव में सासंद सिंधिया शिवुपरी विधानसभा चनुाव हारे थे ओर अभी भी पेयजल समस्या को लेकर स्थिती ठीक नही मानी जा रही है।

इस चुनाव मे सिंधिया के लिए बसपा प्रत्याशी का शरणागत होना तो गले की फांस बन ही रहा है। साथ में शिवुपरी में पानी की समस्या और इन सबसे बडी समस्या किसानो का 2 लाख की कर्जमाफी बन रहा हैं। जिन किसानो की कर्जमाफी नही हो पाई हैं वे कांग्रेस से नाराज हैं ओर भाजपा इस योजना की दुष्प्रचार करने का कोई भी मौका नही छेाड रही है। यह बात स्वयं सिंधिया भी स्वीकार कर चुके हैंं। 

कुल मिलाकर इन सभी बातो का गौर किया जाए तो परिस्थिती सिंधिया के अनुकुल नही हैं,इस चुनाव का रंग और दिशा क्यो होगी यह तो वोटिंग मशीनो के परिणाम ही बता सकते हैं,लेकिन इतना तय है कि यह चुनाव जैसा दिखता है वैसा अब नही रहा हैं।