शिवपुरी,सड़क किनारे मौत का खंभा,चिपक के रह गया दिनेश,मौत



शिवपुरी,सड़क किनारे मौत का खंभा,चिपक के रह गया दिनेश,मौत


शिवपुरी। शिवपुरी में बिजली विभाग की लापरवाही ने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। शहर के व्यस्त मार्ग पर लगे बिजली के खंभे में दौड़ रहे करंट की चपेट में आने से एक 35 वर्षीय मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। सबसे गंभीर बात यह है कि स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस खंभे में पहले भी कई बार करंट उतर चुका था और विभाग को बार-बार शिकायत भी की गई थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने खतरे को नजरअंदाज कर दिया। अब लोगों का सवाल है कि आखिर हर साल मानसून में ऐसे हादसे होने के बाद भी बिजली विभाग कब जागेगा?


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दिनेश कुशवाह रोज की तरह काम खत्म कर घर लौट रहे थे। जैसे ही वह सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे के संपर्क में आया इस कारण वह तेज करंट की चपेट में आ गया झटका इतना जोरदार था कि वह वहीं गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने जान जोखिम में डालकर डंडे की मदद से उन्हें खंभे से अलग किया और तत्काल मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पहले भी हो चुके थे हादसे, फिर क्यों नहीं जागा विभाग ?
मृतक के भाई मुकेश कुशवाह ने बिजली विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इस खंभे में पहली बार करंट नहीं आया था। इससे पहले भी कई लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं, यहां तक कि उनकी पत्नी भी करंट लगने से घायल हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार बिजली विभाग को शिकायत देकर खंभे में करंट आने की जानकारी दी, लेकिन विभाग ने केवल खानापूर्ति की और स्थायी समाधान नहीं किया। यदि समय रहते लाइन, अर्थिंग और खंभे की तकनीकी जांच कर आवश्यक मरम्मत कर दी जाती तो संभवतः आज दिनेश कुशवाह जीवित होता।

मेंटेनेंस के नाम पर कटौती, सुरक्षा फिर भी भगवान भरोसे
यह घटना बिजली विभाग के उन दावों की भी पोल खोलती है, जिनमें नियमित मेंटेनेंस और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने की बात कही जाती है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आए दिन मेंटेनेंस के नाम पर घंटों बिजली आपूर्ति बंद रखी जाती है। उपभोक्ताओं से समय पर बिजली बिल और अन्य शुल्क वसूले जाते हैं, लेकिन जब सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात आती है तो विभाग की तैयारियां अक्सर नाकाफी नजर आती हैं।

मानसून शुरू होते ही बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मरों और टूटे तारों में करंट उतरने की घटनाएं लगातार सामने आती हैं। इसके बावजूद विभाग की ओर से व्यापक निरीक्षण और जोखिम वाले स्थानों को सुरक्षित करने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं दिखाई देती।

आम रास्ते पर मौत का खतरा
जिस स्थान पर हादसा हुआ, वह कोई सुनसान इलाका नहीं बल्कि आम आवाजाही का रास्ता है। इसी मार्ग से रोजाना स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और मजदूर गुजरते हैं। यदि समय रहते करंट की समस्या दूर नहीं की गई तो भविष्य में और भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के बाद भी यदि विभाग नहीं चेता तो किसी और परिवार को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ सकती है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
दिनेश कुशवाह पुट्टी का काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनकी असमय मौत से पत्नी और दो छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। परिवार का कहना है कि यह केवल हादसा नहीं, बल्कि विभागीय लापरवाही का परिणाम है। परिजनों ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उचित मुआवजा देने की मांग की है।

पुलिस ने शुरू की जांच
फिजिकल थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। बुधवार को शव का पोस्टमार्टम कराया गया। अब जांच का विषय यह भी होगा कि आखिर बिजली के खंभे में करंट कैसे आया, क्या विभाग को पहले से इसकी जानकारी थी और शिकायतों के बावजूद आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
Uploaded Image