पलक शिवहरे@ शिवपुरी। शहर के बीचों बीच एक ऐसा प्राचीन आस्था स्थल है, जहां विराजमान हैं मात्र 18 इंच ऊंचे हनुमानजी, लेकिन श्रद्धालुओं का विश्वास कहता है कि उनकी कृपा असीम और चमत्कारी है। फिजिकल रोड स्थित पीपलवाले हनुमानजी मंदिर में इस बार भी हनुमान जयंती बड़े ही श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाई जाएगी।
इस मंदिर की पहचान केवल इसकी प्राचीनता या यहां विराजमान स्वयंभू प्रतिमा से ही नहीं है, बल्कि यहां से जुड़ी लोक कथाएं, चमत्कार, पीपल वृक्षों की मान्यता और दिव्य हवन कुंड भी इसे शिवपुरी के सबसे विशेष धार्मिक स्थलों में शामिल करते हैं। भक्तों की मान्यता है कि यहां बजरंगबली जिस भाव से देखो, उसी रूप में दर्शन देते हैं। कोई उन्हें मुस्कराते बाल स्वरूप में देखता है, तो किसी को उनमें रक्षक, संकटमोचक और कृपालु प्रभु का साक्षात रूप नजर आता है।
पुराने बस स्टैंड से फिजिकल रोड पर है शहर का प्राचीन आस्था केंद्र
शिवपुरी के पुराने प्राइवेट बस स्टैंड से फिजिकल की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित यह मंदिर वर्षों से शहरवासियों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोग इसे पीपल वाले हनुमान जी या पीतल वाले हनुमानजी मंदिर के नाम से पहचानते हैं। मंदिर में स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा आकार में भले ही छोटी है, लेकिन उसकी मनोहरता और दिव्यता भक्तों को पहली ही नजर में आकर्षित कर लेती है। 18 इंच की यह प्रतिमा बाल स्वरूप में है और इसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो बजरंगबली स्वयं मुस्कराकर अपने भक्तों का स्वागत कर रहे हों। इसी विशेष भाव के कारण यहां आने वाले श्रद्धालु केवल दर्शन कर वापस नहीं लौटते, बल्कि वे यहां से एक अलग तरह की आत्मिक शांति और विश्वास लेकर जाते हैं।
पीपल के वृक्ष से प्रकट हुई थी प्रतिमा, तभी से बढ़ती गई आस्था
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित भरत भार्गव ने बताया कि यह प्रतिमा स्वयंभू है और इसका प्राकट्य किसी सामान्य स्थापना की तरह नहीं हुआ था। उनके अनुसार, वर्षों पहले मंदिर परिसर में खड़े एक पुराने पीपल वृक्ष के भीतर हनुमान जी और माता रानी की प्रतिमाएं समाहित थीं। उस समय लोग वृक्ष के भीतर उभरी आकृतियों को ही दैवीय स्वरूप मानकर पूजा करते थे। धीरे-धीरे यह बात पूरे इलाके में फैल गई और यहां श्रद्धालुओं का आना बढ़ने लगा। इसके बाद भक्तों और स्थानीय लोगों के सहयोग से वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया गया।
पंडित भरत भार्गव ने बताया कि वे पिछले करीब 35 वर्षों से इस मंदिर की सेवा कर रहे हैं। उनसे पहले उनके पिता यहां पूजा-अर्चना करते थे। इस तरह उनका परिवार करीब 70 वर्षों से इस मंदिर की परंपरा और सेवा से जुड़ा हुआ है।
मंदिर परिसर में थे दो विशाल पीपल, लोग कहते थे नर और मादा वृक्ष
इस मंदिर से जुड़ी एक और अनोखी मान्यता दो प्राचीन पीपल वृक्षों को लेकर है। बताया जाता है कि पुराने समय में मंदिर परिसर में दो बड़े पीपल के वृक्ष हुआ करते थे। इनमें से एक के पत्ते अपेक्षाकृत बड़े थे, जबकि दूसरे के पत्ते छोटे होते थे। इसी आधार पर स्थानीय लोगों ने उन्हें नर पीपल और मादा पीपल का नाम दे दिया था। वर्षों तक यह मान्यता यहां के लोगों की धार्मिक आस्था का हिस्सा बनी रही।
इतना ही नहीं, बताया जाता है कि इन्हीं वृक्षों के नीचे एक दंपति वर्षों तक पूजा, भजन और तपस्या करता था। वे मंदिर परिसर में बनी एक कुटिया में निवास करते थे और इस स्थान को उन्होंने साधना स्थल बना दिया था। धीरे-धीरे यह जगह केवल एक पेड़ या पूजा स्थल नहीं रही, बल्कि सिद्ध और जागृत स्थान के रूप में पहचानी जाने लगी।
जिस भाव से देखो, उसी रूप में दर्शन देते हैं बजरंगबली
पीपल वाले हनुमान जी मंदिर की सबसे अधिक चर्चा जिस बात को लेकर होती है, वह है यहां विराजमान प्रतिमा का भावपूर्ण स्वरूप। पुजारी और नियमित रूप से आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि इस प्रतिमा में कुछ ऐसा आकर्षण है, जो हर व्यक्ति को अलग अनुभूति देता है। पहली नजर में यह प्रतिमा मुस्कुराती हुई दिखाई देती है, लेकिन भक्तों का अनुभव है कि वे जब जिस मन:स्थिति और भावना के साथ यहां आते हैं, उन्हें भगवान उसी भाव में दर्शन देते हैं। किसी को यहां बाल रूप में वात्सल्य दिखता है, किसी को वीरता, किसी को करुणा, तो किसी को संकट हरने वाले रक्षक का स्वरूप दिखाई देता है। यही कारण है कि मंदिर से जुड़ी यह मान्यता आज भी श्रद्धालुओं के बीच सबसे अधिक चर्चित है।
पुराना हवन कुंड भी माना जाता है चमत्कारी, अग्नि खुद बनाए रखती है तेज
मंदिर परिसर में बना पुराना हवन कुंड भी लोगों की श्रद्धा और जिज्ञासा का केंद्र है। मंदिर से जुड़े लोगों का मानना है कि यह हवन कुंड दिव्य और चमत्कारी है। पंडित भरत भार्गव के अनुसार, जब भी यहां यज्ञ या हवन होता है, तो एक विशेष बात देखने को मिलती है। उन्होंने बताया कि हवन की शुरुआत में केवल एक बार लकड़ी का उपयोग करना पड़ता है, इसके बाद अग्नि हवन सामग्री के सहारे ही लगातार प्रज्वलित बनी रहती है। श्रद्धालु इसे सामान्य घटना नहीं, बल्कि इस स्थान की सिद्धि और हनुमान जी की कृपा के रूप में देखते हैं। यही वजह है कि यहां होने वाले हवन और धार्मिक अनुष्ठानों में लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है।
हर 7 दिन में होता है श्रृंगार, हनुमान जयंती पर होगा विशेष आयोजन
मंदिर में विराजमान हनुमानजी महाराज का हर सात दिन में विशेष श्रृंगार किया जाता है, लेकिन हनुमान जयंती के अवसर पर यह श्रृंगार और भी अधिक विशेष, भव्य और आकर्षक होता है। इस बार गुरुवार 2 अप्रैल को हनुमान जयंती के अवसर पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाएगा। फूलों, रोशनी और धार्मिक सजावट से मंदिर परिसर को उत्सवी स्वरूप दिया जाएगा। मंदिर में इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, हनुमानजी का अलौकिक श्रृंगार, सुंदरकांड पाठ, भोग-प्रसादी और विशाल भंडारे का आयोजन रखा गया है। श्रद्धालुओं के लिए दिनभर दर्शन और प्रसादी की व्यवस्था रहेगी। मंदिर समिति और स्थानीय श्रद्धालु आयोजन की तैयारियों में जुटे हुए हैं। अनुमान है कि हनुमान जयंती के दिन यहां सुबह से देर रात तक भक्तों की भीड़ बनी रहेगी।
आस्था से चमत्कार तक, शिवपुरी की धार्मिक पहचान बना यह मंदिर
शिवपुरी का पीपल वाले हनुमान जी मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि शहर की पुरानी धार्मिक स्मृति, लोकविश्वास और जीवंत आस्था का प्रतीक है। यहां की 18 इंच की स्वयंभू प्रतिमा, पीपल वृक्षों की कथा, हर भाव में दर्शन देने की मान्यता, और दिव्य हवन कुंड—ये सभी बातें इस मंदिर को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती हैं। हनुमान जयंती के अवसर पर एक बार फिर यह मंदिर भक्ति, आस्था, श्रद्धा और उत्सव का केंद्र बनने जा रहा है, जहां हर भक्त के मन में केवल एक ही भावना होगी-जय हनुमान
इस मंदिर की पहचान केवल इसकी प्राचीनता या यहां विराजमान स्वयंभू प्रतिमा से ही नहीं है, बल्कि यहां से जुड़ी लोक कथाएं, चमत्कार, पीपल वृक्षों की मान्यता और दिव्य हवन कुंड भी इसे शिवपुरी के सबसे विशेष धार्मिक स्थलों में शामिल करते हैं। भक्तों की मान्यता है कि यहां बजरंगबली जिस भाव से देखो, उसी रूप में दर्शन देते हैं। कोई उन्हें मुस्कराते बाल स्वरूप में देखता है, तो किसी को उनमें रक्षक, संकटमोचक और कृपालु प्रभु का साक्षात रूप नजर आता है।
पुराने बस स्टैंड से फिजिकल रोड पर है शहर का प्राचीन आस्था केंद्र
शिवपुरी के पुराने प्राइवेट बस स्टैंड से फिजिकल की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित यह मंदिर वर्षों से शहरवासियों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोग इसे पीपल वाले हनुमान जी या पीतल वाले हनुमानजी मंदिर के नाम से पहचानते हैं। मंदिर में स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा आकार में भले ही छोटी है, लेकिन उसकी मनोहरता और दिव्यता भक्तों को पहली ही नजर में आकर्षित कर लेती है। 18 इंच की यह प्रतिमा बाल स्वरूप में है और इसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो बजरंगबली स्वयं मुस्कराकर अपने भक्तों का स्वागत कर रहे हों। इसी विशेष भाव के कारण यहां आने वाले श्रद्धालु केवल दर्शन कर वापस नहीं लौटते, बल्कि वे यहां से एक अलग तरह की आत्मिक शांति और विश्वास लेकर जाते हैं।
पीपल के वृक्ष से प्रकट हुई थी प्रतिमा, तभी से बढ़ती गई आस्था
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित भरत भार्गव ने बताया कि यह प्रतिमा स्वयंभू है और इसका प्राकट्य किसी सामान्य स्थापना की तरह नहीं हुआ था। उनके अनुसार, वर्षों पहले मंदिर परिसर में खड़े एक पुराने पीपल वृक्ष के भीतर हनुमान जी और माता रानी की प्रतिमाएं समाहित थीं। उस समय लोग वृक्ष के भीतर उभरी आकृतियों को ही दैवीय स्वरूप मानकर पूजा करते थे। धीरे-धीरे यह बात पूरे इलाके में फैल गई और यहां श्रद्धालुओं का आना बढ़ने लगा। इसके बाद भक्तों और स्थानीय लोगों के सहयोग से वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया गया।
पंडित भरत भार्गव ने बताया कि वे पिछले करीब 35 वर्षों से इस मंदिर की सेवा कर रहे हैं। उनसे पहले उनके पिता यहां पूजा-अर्चना करते थे। इस तरह उनका परिवार करीब 70 वर्षों से इस मंदिर की परंपरा और सेवा से जुड़ा हुआ है।
मंदिर परिसर में थे दो विशाल पीपल, लोग कहते थे नर और मादा वृक्ष
इस मंदिर से जुड़ी एक और अनोखी मान्यता दो प्राचीन पीपल वृक्षों को लेकर है। बताया जाता है कि पुराने समय में मंदिर परिसर में दो बड़े पीपल के वृक्ष हुआ करते थे। इनमें से एक के पत्ते अपेक्षाकृत बड़े थे, जबकि दूसरे के पत्ते छोटे होते थे। इसी आधार पर स्थानीय लोगों ने उन्हें नर पीपल और मादा पीपल का नाम दे दिया था। वर्षों तक यह मान्यता यहां के लोगों की धार्मिक आस्था का हिस्सा बनी रही।
इतना ही नहीं, बताया जाता है कि इन्हीं वृक्षों के नीचे एक दंपति वर्षों तक पूजा, भजन और तपस्या करता था। वे मंदिर परिसर में बनी एक कुटिया में निवास करते थे और इस स्थान को उन्होंने साधना स्थल बना दिया था। धीरे-धीरे यह जगह केवल एक पेड़ या पूजा स्थल नहीं रही, बल्कि सिद्ध और जागृत स्थान के रूप में पहचानी जाने लगी।
जिस भाव से देखो, उसी रूप में दर्शन देते हैं बजरंगबली
पीपल वाले हनुमान जी मंदिर की सबसे अधिक चर्चा जिस बात को लेकर होती है, वह है यहां विराजमान प्रतिमा का भावपूर्ण स्वरूप। पुजारी और नियमित रूप से आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि इस प्रतिमा में कुछ ऐसा आकर्षण है, जो हर व्यक्ति को अलग अनुभूति देता है। पहली नजर में यह प्रतिमा मुस्कुराती हुई दिखाई देती है, लेकिन भक्तों का अनुभव है कि वे जब जिस मन:स्थिति और भावना के साथ यहां आते हैं, उन्हें भगवान उसी भाव में दर्शन देते हैं। किसी को यहां बाल रूप में वात्सल्य दिखता है, किसी को वीरता, किसी को करुणा, तो किसी को संकट हरने वाले रक्षक का स्वरूप दिखाई देता है। यही कारण है कि मंदिर से जुड़ी यह मान्यता आज भी श्रद्धालुओं के बीच सबसे अधिक चर्चित है।
पुराना हवन कुंड भी माना जाता है चमत्कारी, अग्नि खुद बनाए रखती है तेज
मंदिर परिसर में बना पुराना हवन कुंड भी लोगों की श्रद्धा और जिज्ञासा का केंद्र है। मंदिर से जुड़े लोगों का मानना है कि यह हवन कुंड दिव्य और चमत्कारी है। पंडित भरत भार्गव के अनुसार, जब भी यहां यज्ञ या हवन होता है, तो एक विशेष बात देखने को मिलती है। उन्होंने बताया कि हवन की शुरुआत में केवल एक बार लकड़ी का उपयोग करना पड़ता है, इसके बाद अग्नि हवन सामग्री के सहारे ही लगातार प्रज्वलित बनी रहती है। श्रद्धालु इसे सामान्य घटना नहीं, बल्कि इस स्थान की सिद्धि और हनुमान जी की कृपा के रूप में देखते हैं। यही वजह है कि यहां होने वाले हवन और धार्मिक अनुष्ठानों में लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है।
हर 7 दिन में होता है श्रृंगार, हनुमान जयंती पर होगा विशेष आयोजन
मंदिर में विराजमान हनुमानजी महाराज का हर सात दिन में विशेष श्रृंगार किया जाता है, लेकिन हनुमान जयंती के अवसर पर यह श्रृंगार और भी अधिक विशेष, भव्य और आकर्षक होता है। इस बार गुरुवार 2 अप्रैल को हनुमान जयंती के अवसर पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाएगा। फूलों, रोशनी और धार्मिक सजावट से मंदिर परिसर को उत्सवी स्वरूप दिया जाएगा। मंदिर में इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, हनुमानजी का अलौकिक श्रृंगार, सुंदरकांड पाठ, भोग-प्रसादी और विशाल भंडारे का आयोजन रखा गया है। श्रद्धालुओं के लिए दिनभर दर्शन और प्रसादी की व्यवस्था रहेगी। मंदिर समिति और स्थानीय श्रद्धालु आयोजन की तैयारियों में जुटे हुए हैं। अनुमान है कि हनुमान जयंती के दिन यहां सुबह से देर रात तक भक्तों की भीड़ बनी रहेगी।
आस्था से चमत्कार तक, शिवपुरी की धार्मिक पहचान बना यह मंदिर
शिवपुरी का पीपल वाले हनुमान जी मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि शहर की पुरानी धार्मिक स्मृति, लोकविश्वास और जीवंत आस्था का प्रतीक है। यहां की 18 इंच की स्वयंभू प्रतिमा, पीपल वृक्षों की कथा, हर भाव में दर्शन देने की मान्यता, और दिव्य हवन कुंड—ये सभी बातें इस मंदिर को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती हैं। हनुमान जयंती के अवसर पर एक बार फिर यह मंदिर भक्ति, आस्था, श्रद्धा और उत्सव का केंद्र बनने जा रहा है, जहां हर भक्त के मन में केवल एक ही भावना होगी-जय हनुमान