शिवपुरी। गेहूं के साथ चना व मसूर की खरीदी की तिथि भी सरकार ने अभी तक तय नहीं की है। ऐसे में किसान परेशान हैं और अपनी फसल को एमएसपी से कम दाम में बेचने को मजबूर है। पहले यह खरीद 1 अप्रैल से शुरू होनी थी, लेकिन बाद में किन्हीं कारणों से यह खरीदी शुरू नहीं हो पाई। प्रशासन जिले में रबी सीजन की चना व मसूर खरीदी इस बार नए नियमों और डिजिटल व्यवस्था के साथ शुरू कर रहा था, लेकिन अभी तक यह खरीदी शुरू न होने से किसानों को काफी दिक्कत आ रही है। हालांकि नई डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ने और वास्तविक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।जानकारी के मुताबिक सरकार ने पहले चना व मसूर की खरीदी के लिए अलग-अलग केन्द्र बनाए थे। बाद में तय किया कि उन केंद्रों की जगह स्थानीय मंडियों में ही यह खरीदी की जाएगी। सरकार ने जहां मसूर का समर्थन मूल्य 7 हजार रुपए प्रति क्विंटल रखा है तो वही चना का समर्थन मूल्य 5875 रुपए प्रति क्विंटल है। जिले में 60 फीसदी से अधिक चना व मसूर की कटाई से लेकर थ्रेसिंग हो चुकी है और किसान बाजार या मंडी में कम दामों में अपनी फसल बेच रहा है।
ऐसे में अगर सरकार जल्द इन दोनों की सरकारी रेट पर खरीदी शुरू नहीं करती तो किसानों को काफी नुकसान जाएगा। किसानों को कम कीमत पर बेचनी पड़ रही उपज इस वर्ष चना का समर्थन मूल्य 5875 रुपए प्रति क्विंटल और मसूर का 7000 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। पर खरीदी शुरू न होने से हालात सही नहीं है। समर्थन मूल्य पर चने की खरीदी शुरू नहीं होने से किसानों को मजबूरी में कम दाम पर अपनी उपज मंडी में बेचना पड़ रही है। हकीकत यह है कि मंडी में चने के भाव 5400 से 5600 रुपए के आसपास मिल रहे हैं।
सरसों का खुले में मिल रहा अच्छा भाव
सरकार ने सरसों की खरीदी भावांतर भुगतान योजना के तहत करने का निर्णय लिया था। इसके लिए सरकार ने सरसों का एमएसपी 6200 रुपए तय किया था। लेकिन अच्छी बात यह है कि मंडी में सरसों के भाव बहुत अच्छे मिल रहे हैं। सोमवार को पिपरसमा कृषि उपज मंडी में 1300 से 1400 बोरी सरसों की आवक हुई। इस दौरान सरसों का भाव 6900 से 7 हजार रुपए प्रति क्विंटल रहा। मंडी में भाव अच्छे मिलने के कारण सरकार ने भावांतर योजना में सरसों की खरीदी 16 अप्रैल कर दी है। पर किसानों को इसमें कोई रुचि नहीं है।
फर्जीवाड़ा रोकने मोबाइल एप से होगी किसान की पहचान
चना खरीदी में पारदर्शिता लाने के लिए प्रशासन ने सख्त डिजिटल व्यवस्था लागू की है। नई गाइडलाइन के तहत किसानों की पहचान अब आधार सक्षम पीओएस मशीन या मोबाइल एप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन से की जाएगी। खरीदी केंद्र पर किसान की मौजूदगी में उसका चेहरा सत्यापित होने के बाद ही उपज खरीदी जाएगी।इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य फर्जीवाड़ा रोकना और वास्तविक किसानों को ही समर्थन मूल्य का लाभ दिलाना है। खरीदी के बाद भुगतान सीधे पंजीकृत किसान के बैंक खाते में ही किया जाएगाए जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। इस बार चना खरीदी को पूरी तरह ट्रैक करने के लिए प्रत्येक बोरी पर क्यूआर कोड लगाया जाएगा। इस क्यूआर कोड में खरीदी की तारीख, मात्रा और संबंधित किसान की पूरी जानकारी दर्ज रहेगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया जा रहा है।
यह बोले जिम्मेदार
अभी चना व मसूर की खरीदी की तिथि सरकार ने घोषित नहीं की है। इस कारण से किसान मंडी व बाजार में अपनी फसल कम दामों में बेचने को मजबूर है। जल्द खरीदी शुरू होने के बाद किसानों की समस्या खत्म हो जाएगी।
बालेश शुक्ला, सेक्रेटरी, कृषि उपज
मंडी, शिवपुरी