शिवपुरी में गौ माता की खातिर प्राण न्योछावर, नागराज से नंदिनी अपनी आखिरी सांस तक लडी

Adhiraj Awasthi

दिनारा। शिवपुरी जिले के करैरा अनुविभाग की सीमा मे आने वाले दिनारा कस्बे के पास अशोका होटल के समीप स्थित गौशाला में में एक नंदिनी नाम की बिल्ली ने गौ माता की रक्षा के लिए नागराज से अंतिम सांस तक लडते हुए गौ माता की रक्षा करते हुए अपने प्राण त्याग दिए। नंदिनी नाम की यह बिल्ली गौशाला की सुरक्षा गार्ड मानी जाती थी।  इस घटना ने गौशाला परिसर में हर किसी को भावुक कर दिया।

बताया जा रहा है कि गौ सेवक कल्लू महाराज को सूचना मिली थी कि गौशाला के बाहर एक बिल्ली और काले सांप के बीच जबरदस्त संघर्ष चल रहा है। सूचना मिलते ही वे तत्काल मौके पर पहुंचे। वहां पहुंचकर जो दृश्य सामने आया, उसने सभी को स्तब्ध कर दिया। बिल्ली नंदिनी और सांप एक-दूसरे से इस तरह उलझे हुए थे, मानो जीवन और मौत के बीच आखिरी जंग चल रही हो।

गौ सेवक कल्लू महाराज ने साहस दिखाते हुए दोनों को अलग किया। सांप तो वहां से भाग निकला, लेकिन नंदिनी बुरी तरह घायल हो चुकी थी। वह दर्द से तड़प रही थी। कल्लू महाराज ने उसे तुरंत गोद में उठाया और हर संभव उपचार का प्रयास किया, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। कुछ ही देर बाद नंदिनी ने अंतिम सांस ले ली।

सबसे भावुक पल: घायल नंदिनी के पास बैठी रही गौ माता
घटना का सबसे मार्मिक दृश्य उस समय सामने आया, जब गौशाला में मौजूद गौ माता घायल 'नंदिनी' के पास आकर बैठ गईं। बताया गया कि जैसे ही नंदिनी ने दम तोड़ा, वहां मौजूद लोगों ने गौ माता की आंखों में नमी देखी। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो गया। गौ सेवक कल्लू महाराज भी खुद को रोक नहीं सके और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

नंदिनी गौशाला की प्रहरी थी
कल्लू महाराज ने बताया कि नंदिनी कोई सामान्य बिल्ली नहीं थी। वह लंबे समय से गौशाला में रह रही थी और हर समय गौवंश के आसपास ही मंडराती रहती थी। किसी भी अनजान आहट, खतरे या हलचल पर वह सबसे पहले सतर्क हो जाती थी। यही वजह थी कि गौशाला में उसे प्यार से सुरक्षा गार्ड कहा जाता था। उन्होंने बताया कि गौ माता और नंदिनी के बीच बेहद गहरा लगाव था। दोनों अक्सर एक-दूसरे के आसपास ही रहती थीं। नंदिनी गौवंश के बीच इस तरह घुल-मिल गई थी, जैसे वह उसी परिवार का हिस्सा हो,अंत मे नंदिनी का अंतिम संस्कार किया गया।