शिवपुरी में पारा 35°C के पार, गर्म हवाओं के बीच बाजारों में उतरा देसी फ्रिज, मटकों की बढ़ी मांग

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। बार बार बदलना मौसम का मिजाज है और इस बदलते मौसम ने पुन:शिवपुरी के पारे को 35 के पार कर दिया है। दिन भी धीरे धीरे गर्म होने लगे है और राते गर्म होना शुरू हो चुकी है। बीते शुक्रवार को शिवपुरी जिले का अधिकतम तापमान 35 डिग्री रहा है वही रात न्यूनतम पारा 20 डिग्री पर रूका है।  उत्तर पश्चिम से चल रही गर्म हवाओं की वजह से दोपहर 12 बजे के बाद बिना कूलर, पंखे के रहना मुश्किल हो रहा है,इस गर्म मौसम में देशी ओर प्राकृतिक फ्रिज अर्थात मटका भी बाजार में बिकने का आ चुका है। मिट्टी से बने घड़े का शीतल जल हमारे प्यास बुझाता है साथ में हमारे स्वास्थ्य का भी ध्यान रखता हैं,यह एक सवाल भी है कि जितनी तेज गर्मी पडती है उतना ही मिट्टी के मटके का पेट ठंडा रहता है क्यो  

बढ़ती गर्मी के साथ ही शहर के बाजारों में अब मटकों की मांग बढ़ने लगी है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी के चलते लोग ठंडा पानी पीने के लिए पारंपरिक मटकों की ओर रुख कर रहे हैं। बाजारों में विभिन्न आकार और डिजाइन के मटके बिकने के लिए आ गए हैं, जिन्हें गर्मी को देखते हुए बाजार में बिकने आए देशी फ्रिज खरीदने के लिए लोगों की भीड़ देखी जा रही है। दोपहर में तेज गर्मी के कारण लोग फ्रिज के साथ-साथ मटकों का उपयोग करना पसंद कर रहे हैं, क्योंकि मटके का पानी स्वाभाविक रूप से ठंडा और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में मटकों की बिक्री में तेजी आई है और आने वाले दिनों में मांग और बढ़ने की उम्मीद है। मिट्टी के मटकों की कीमत भी आकार और गुणवत्ता के अनुसार अलग-अलग है, जिससे हर वर्ग के लोग अपनी सुविधा के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं।

इस कारण है मिट्टी का मटके का पानी स्वास्थ्य वर्धक
मिट्टी के घड़े का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है। इसमें किसी भी प्रकार का केमिकल इस्तेमाल नहीं होता, जो इसे पूरी तरह से सुरक्षित बनाता है। गर्मियों में इसे पीने से शरीर के तापमान को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। घड़े का पानी पीने से पेट और पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. यह एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है. मिट्टी के प्राकृतिक गुण पानी को पाचन के लिए और ज्यादा फायदेमंद बनाते हैं.

इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है
मिट्टी में पाए जाने वाले सूक्ष्म पोषक तत्व पानी में घुलकर इसे ज्यादा पोषणयुक्त बनाते हैं. घड़े का पानी नियमित रूप से पीने से शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है। मिट्टी के घड़े का पानी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है. यह शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करता है और लिवर और किडनी को स्वस्थ रखता है।

पर्यावरण के लिए अनुकूल
मिट्टी के घड़े का उपयोग न केवल स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, बल्कि यह पर्यावरण को भी सुरक्षित रखता है. प्लास्टिक की बोतलों की तुलना में मिट्टी के घड़े प्रकृति के लिए ज्यादा अनुकूल होते हैं। गर्मी के मौसम में घड़े का पानी पीना न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह हमें प्रकृति से जुड़ने का भी एहसास कराता है।  इसके अद्भुत गुण शरीर को ठंडा रखने, पाचन सुधारने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद कर सकते हैं।

जितनी तपिश उतना ठंडा मटके का पानी पढ़िए क्यों
 मिट्टी के घडे की एक विशेषता है कि जितना तेज तापमान होगा मिट्टी का मटका पानी को उतनी ही जल्दी ठंडा और शीतल करता है। मटके में रखा पानी वाष्पीकरण की क्रिया की वजह से ठंडा होता है और जितना वाष्पीकरण अधिक होता है, उतना ही पानी ठंडा होता है। दरअसल, मिट्टी के बर्तन में छोटे-छोटे छेद होते हैं और इन छेदों में से मटके का पानी बाहर आता है और बाहर की गर्मी से भाप बनकर उड़ जाता है। 


ऐसा होने से मटके के अंदर का तापमान काफी कम रहता है और यह वाष्पीकरण से होता है। इससे अंदर का पानी ठंडा हो जाता है। खास बात ये है कि यह वाष्पीकरण की प्रक्रिया जब ज्यादा गर्मी होती है तब होती है। ऐसे में गर्मी में मटके के बाहर गर्म हवा लगने से मटके के अंदर का पानी ठंडा रहता है।