शिवपुरी। शिवपुरी जिले में सरकारी खरीदी सीजन की शुरुआत आज 30 मार्च से हो रही है। चना और मसूर की समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए जिले में 12 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। सबसे ज्यादा 3-3 केंद्र कोलारस और बदरवास में खोले गए हैं। दूसरी ओर, बारदाना की कमी के कारण गेहूं खरीदी 7 अप्रैल से शुरू होगी। सरसों की खरीदी इस बार समर्थन मूल्य पर नहीं, बल्कि भावांतर योजना के तहत की जाएगी।
जिले के किसानों के लिए राहत भरी शुरुआत के साथ खरीदी व्यवस्था जमीन पर उतर रही है। प्रशासन ने चना और मसूर की सरकारी खरीदी 30 मार्च से शुरू करने के लिए जिले में 12 उपार्जन केंद्र तय किए हैं। किसान पंजीयन के आधार पर अपनी उपज इन केंद्रों पर बेच सकेंगे।
खरीदी व्यवस्था में सबसे ज्यादा फोकस कोलारस और बदरवास पर किया गया है। दोनों तहसीलों में 3-3 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। इन इलाकों में चना और मसूर का उत्पादन अपेक्षाकृत ज्यादा होने के कारण यहां अतिरिक्त दबाव की संभावना को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने खरीदी के लिए वेयरहाउस लॉजिस्टिक गोदामों और निजी वेयरहाउस का उपयोग किया है, ताकि भंडारण, तौल और परिवहन की व्यवस्था एक साथ संचालित की जा सके।
कोलारस में यहां होगी खरीदी
सेवा सहकारी संस्था देहरदा गणेश – कमला एग्रो वेयरहाउस
विपणन सहकारी संस्था कोलारस – गरिमा वेयरहाउस, सेसई रोड
सेवा सहकारी संस्था बेहटा – रावत वेयरहाउस
बदरवास में यहां बिकेगी उपज
सेवा सहकारी संस्था खतौरा – श्री राधे कृष्ण वेयरहाउस
सेवा सहकारी संस्था अटलपुर – श्री बांके बिहारी वेयरहाउस
सेवा सहकारी संस्था पीरोंठ – नारायण वेयरहाउस
इन दोनों तहसीलों में केंद्रों की संख्या बढ़ने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे खरीदी केंद्रों पर दबाव बंटेगा और शुरुआती भीड़ को संभालना अपेक्षाकृत आसान होगा।
बाकी तहसीलों में भी बनाए गए केंद्र
शिवपुरी – सेवा सहकारी संस्था कुंवरपुर, लुधावली गोदाम नंबर-5
करैरा – सेवा सहकारी संस्था करैरा, वेयरहाउसिंग कारपोरेशन गोदाम नंबर-1
नरवर – सेवा सहकारी संस्था नरवर, गोदाम नंबर-1
पिछोर – सेवा सहकारी संस्था कमालपुर, गोदाम नंबर-2
खनियाधाना – विपणन सहकारी संस्था खनियाधाना, मां भगवती वेयरहाउस
गेहूं खरीदी 7 अप्रैल से, वारदाना बना वजह
चना और मसूर की खरीदी जहां आज से शुरू हो रही है, वहीं गेहूं की खरीदी 7 अप्रैल से प्रारंभ होगी। इस बार वारदाना (बोरी) की कमी के कारण खरीदी की तारीख आगे बढ़ानी पड़ी। प्रशासन अब पुराने वारदाने और वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए गेहूं खरीदी शुरू कराने की तैयारी में है। यदि शुरुआती दिनों में पर्याप्त बोरी नहीं पहुंची, तो गेहूं खरीदी केंद्रों पर दबाव और अव्यवस्था बढ़ सकती है।
जिले के किसानों के लिए राहत भरी शुरुआत के साथ खरीदी व्यवस्था जमीन पर उतर रही है। प्रशासन ने चना और मसूर की सरकारी खरीदी 30 मार्च से शुरू करने के लिए जिले में 12 उपार्जन केंद्र तय किए हैं। किसान पंजीयन के आधार पर अपनी उपज इन केंद्रों पर बेच सकेंगे।
खरीदी व्यवस्था में सबसे ज्यादा फोकस कोलारस और बदरवास पर किया गया है। दोनों तहसीलों में 3-3 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। इन इलाकों में चना और मसूर का उत्पादन अपेक्षाकृत ज्यादा होने के कारण यहां अतिरिक्त दबाव की संभावना को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने खरीदी के लिए वेयरहाउस लॉजिस्टिक गोदामों और निजी वेयरहाउस का उपयोग किया है, ताकि भंडारण, तौल और परिवहन की व्यवस्था एक साथ संचालित की जा सके।
कोलारस में यहां होगी खरीदी
सेवा सहकारी संस्था देहरदा गणेश – कमला एग्रो वेयरहाउस
विपणन सहकारी संस्था कोलारस – गरिमा वेयरहाउस, सेसई रोड
सेवा सहकारी संस्था बेहटा – रावत वेयरहाउस
बदरवास में यहां बिकेगी उपज
सेवा सहकारी संस्था खतौरा – श्री राधे कृष्ण वेयरहाउस
सेवा सहकारी संस्था अटलपुर – श्री बांके बिहारी वेयरहाउस
सेवा सहकारी संस्था पीरोंठ – नारायण वेयरहाउस
इन दोनों तहसीलों में केंद्रों की संख्या बढ़ने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे खरीदी केंद्रों पर दबाव बंटेगा और शुरुआती भीड़ को संभालना अपेक्षाकृत आसान होगा।
बाकी तहसीलों में भी बनाए गए केंद्र
शिवपुरी – सेवा सहकारी संस्था कुंवरपुर, लुधावली गोदाम नंबर-5
करैरा – सेवा सहकारी संस्था करैरा, वेयरहाउसिंग कारपोरेशन गोदाम नंबर-1
नरवर – सेवा सहकारी संस्था नरवर, गोदाम नंबर-1
पिछोर – सेवा सहकारी संस्था कमालपुर, गोदाम नंबर-2
खनियाधाना – विपणन सहकारी संस्था खनियाधाना, मां भगवती वेयरहाउस
गेहूं खरीदी 7 अप्रैल से, वारदाना बना वजह
चना और मसूर की खरीदी जहां आज से शुरू हो रही है, वहीं गेहूं की खरीदी 7 अप्रैल से प्रारंभ होगी। इस बार वारदाना (बोरी) की कमी के कारण खरीदी की तारीख आगे बढ़ानी पड़ी। प्रशासन अब पुराने वारदाने और वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए गेहूं खरीदी शुरू कराने की तैयारी में है। यदि शुरुआती दिनों में पर्याप्त बोरी नहीं पहुंची, तो गेहूं खरीदी केंद्रों पर दबाव और अव्यवस्था बढ़ सकती है।
सरसों समर्थन मूल्य से बाहर, भावांतर में मिलेगी राहत
इस बार सरसों की खरीदी समर्थन मूल्य पर नहीं होगी। इसे भावांतर योजना में शामिल किया गया है। यानी यदि बाजार भाव कम रहा, तो किसानों को तय अंतर की राशि योजना के तहत मिलेगी।
इस बार सरसों की खरीदी समर्थन मूल्य पर नहीं होगी। इसे भावांतर योजना में शामिल किया गया है। यानी यदि बाजार भाव कम रहा, तो किसानों को तय अंतर की राशि योजना के तहत मिलेगी।