शिवपुरी। न्याय की अवधारणा को सरल, सुलभ और त्वरित बनाने के उद्देश्य से शनिवार, 14 मार्च 2026 को शिवपुरी जिला मुख्यालय सहित तहसील न्यायालयों में वर्ष की प्रथम नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के एडीआर भवन में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेन्द्र प्रसाद सोनी द्वारा मां सरस्वती के पूजन और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
न्याय के आंकड़े, करोड़ों का हुआ लेनदेन
इस लोक अदालत में शिवपुरी जिले में कुल 29 खंडपीठों का गठन किया गया था। दिनभर चली सुनवाई में अदालती और विभागीय स्तर पर बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस लोक अदालत में 2292 प्रकरणों का अंतिम निराकरण हुआ है और कुल 3028 व्यक्तियों को त्वरित न्याय का लाभ मिला। न्यायालयों में लंबित प्रकरणों में लगभग 6,39,11,635 रुपये के अवार्ड पारित किए गए।बिजली विभाग और अन्य विभागों से संबंधित प्रिलिटिगेशन मामलों में 2,10,724,59/- रुपये की वसूली की गई।
जब साड़ियों और मोटरसाइकल का विवाद खत्म हुआ
लोक अदालत केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि बिखरते परिवारों को जोड़ने का मंच भी बनी। शालिनी शर्मा सिंह (प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय) की खंडपीठ में दो ऐसे मामले आए जिन्होंने सबका दिल जीत लिया।
प्रीति और राकेश की नई शुरुआत
वर्ष 2022 में शादी के बाद दहेज और मोटरसाइकल की मांग को लेकर प्रीति को घर से निकाल दिया गया था। 2025 से चल रहे भरण-पोषण के विवाद को भूलकर, शनिवार को खंडपीठ की समझाइश के बाद यह जोड़ा अपनी नन्ही बेटी के साथ राजी-खुशी घर विदा हुआ।
निकाह के बाद का विवाद सुलझा
एक अन्य मामले में 2021 में हुए निकाह के बाद दहेज की मांग को लेकर विवाद चल रहा था। 2024 से कोर्ट के चक्कर काट रहे इस मुस्लिम दंपत्ति ने भी लोक अदालत में गिले-शिकवे भुला दिए और साथ रहने का वादा किया।
अपील का कोई रास्ता नहीं, बस संतोष
प्रधान जिला न्यायाधीश ने बताया कि लोक अदालत के माध्यम से होने वाले समझौतों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें समय और धन की बचत होती है। यहाँ पारित अवार्ड की कोई अपील नहीं होती, जिससे पक्षकारों को अदालतों की लंबी और थकाऊ प्रक्रिया से हमेशा के लिए आजादी मिल जाती है। इस अवसर पर जिले के समस्त न्यायाधीशगण, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विजय तिवारी, लोक अभियोजन अधिकारी और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
न्याय के आंकड़े, करोड़ों का हुआ लेनदेन
इस लोक अदालत में शिवपुरी जिले में कुल 29 खंडपीठों का गठन किया गया था। दिनभर चली सुनवाई में अदालती और विभागीय स्तर पर बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस लोक अदालत में 2292 प्रकरणों का अंतिम निराकरण हुआ है और कुल 3028 व्यक्तियों को त्वरित न्याय का लाभ मिला। न्यायालयों में लंबित प्रकरणों में लगभग 6,39,11,635 रुपये के अवार्ड पारित किए गए।बिजली विभाग और अन्य विभागों से संबंधित प्रिलिटिगेशन मामलों में 2,10,724,59/- रुपये की वसूली की गई।
जब साड़ियों और मोटरसाइकल का विवाद खत्म हुआ
लोक अदालत केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि बिखरते परिवारों को जोड़ने का मंच भी बनी। शालिनी शर्मा सिंह (प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय) की खंडपीठ में दो ऐसे मामले आए जिन्होंने सबका दिल जीत लिया।
प्रीति और राकेश की नई शुरुआत
वर्ष 2022 में शादी के बाद दहेज और मोटरसाइकल की मांग को लेकर प्रीति को घर से निकाल दिया गया था। 2025 से चल रहे भरण-पोषण के विवाद को भूलकर, शनिवार को खंडपीठ की समझाइश के बाद यह जोड़ा अपनी नन्ही बेटी के साथ राजी-खुशी घर विदा हुआ।
निकाह के बाद का विवाद सुलझा
एक अन्य मामले में 2021 में हुए निकाह के बाद दहेज की मांग को लेकर विवाद चल रहा था। 2024 से कोर्ट के चक्कर काट रहे इस मुस्लिम दंपत्ति ने भी लोक अदालत में गिले-शिकवे भुला दिए और साथ रहने का वादा किया।
अपील का कोई रास्ता नहीं, बस संतोष
प्रधान जिला न्यायाधीश ने बताया कि लोक अदालत के माध्यम से होने वाले समझौतों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें समय और धन की बचत होती है। यहाँ पारित अवार्ड की कोई अपील नहीं होती, जिससे पक्षकारों को अदालतों की लंबी और थकाऊ प्रक्रिया से हमेशा के लिए आजादी मिल जाती है। इस अवसर पर जिले के समस्त न्यायाधीशगण, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विजय तिवारी, लोक अभियोजन अधिकारी और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।