शिवपुरी। शिवपुरी जिले में आज मौसम के क्रूर काल चक्र ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। सुबह तक जहाँ आसमान साफ था और किसान अपनी लहलहाती फसलों को देख खुश हो रहे थे, वहीं दोपहर होते-होते अचानक मौसम ने करवट ली। शिवपुरी के आसमान में अचानक बादल लद गए और हल्की बारिश के साथ चने के आकार के ओले गिरने से जिले की शिवपुरी विधानसभा के कई गांवों में ओले गिरने की खबर मिल रही है।
15 मिनट में मची तबाही
ग्रामीणों और किसानों के अनुसार, दोपहर करीब 2:50 से 3:05 बजे तक यानी महज 15 मिनट की ओलावृष्टि ने सब कुछ उजाड़ दिया। ग्राम तानपुर, मालाखेड़ी, सुआखेड़ी, झलवासा, झूड,सतैरिया,रायश्री,लालगढ और पिपरसमां में ओलों की मार इतनी तेज थी कि गेहूं की खड़ी फसल खेत में आड़ी गिर गई। इससे गेहूं के दानों में भारी नुकसान हुआ है और चने की फसल भी पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।
किसानों का छलका दर्द
मालाखेड़ी के किसान पंकज रावत ने अपना दुख व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने लगभग 20 से 25 बीघा खेत में बड़े अरमानों के साथ गेहूं और चने की फसल लगाई थी। लेकिन मात्र 15 मिनट की कुदरती मार ने उनकी पूरी मेहनत को मलबे में तब्दील कर दिया। कई अन्य किसानों का भी यही हाल है, उनकी आँखों के सामने साल भर की जमा-पूंजी और पेट भरने का सहारा छिन गया है।
प्रशासन से मुआवजे की आस
अचानक हुई इस भारी ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने किसानों को आर्थिक संकट में झोंक दिया है। अब प्रभावित गांवों के किसान सरकार और जिला प्रशासन से सर्वे कराकर उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं, ताकि इस प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सके।
15 मिनट में मची तबाही
ग्रामीणों और किसानों के अनुसार, दोपहर करीब 2:50 से 3:05 बजे तक यानी महज 15 मिनट की ओलावृष्टि ने सब कुछ उजाड़ दिया। ग्राम तानपुर, मालाखेड़ी, सुआखेड़ी, झलवासा, झूड,सतैरिया,रायश्री,लालगढ और पिपरसमां में ओलों की मार इतनी तेज थी कि गेहूं की खड़ी फसल खेत में आड़ी गिर गई। इससे गेहूं के दानों में भारी नुकसान हुआ है और चने की फसल भी पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।
किसानों का छलका दर्द
मालाखेड़ी के किसान पंकज रावत ने अपना दुख व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने लगभग 20 से 25 बीघा खेत में बड़े अरमानों के साथ गेहूं और चने की फसल लगाई थी। लेकिन मात्र 15 मिनट की कुदरती मार ने उनकी पूरी मेहनत को मलबे में तब्दील कर दिया। कई अन्य किसानों का भी यही हाल है, उनकी आँखों के सामने साल भर की जमा-पूंजी और पेट भरने का सहारा छिन गया है।
प्रशासन से मुआवजे की आस
अचानक हुई इस भारी ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने किसानों को आर्थिक संकट में झोंक दिया है। अब प्रभावित गांवों के किसान सरकार और जिला प्रशासन से सर्वे कराकर उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं, ताकि इस प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सके।