पुलिस छावनी बना मायापुर: FIR में नाम बढ़ाने और सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर अड़े

Adhiraj Awasthi

नरेन्द्र जैन @खनियांधाना। शिवपुरी जिले के मायापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मुहांसा में सरपंच पुत्र की नृशंस हत्या के मामले ने आज फिर तूल पकड़ लिया है। घटना के विरोध में आज पीड़ित परिजनों और सैकड़ों ग्रामीणों ने मायापुर थाने के सामने पिछोर-दहरदा हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि पुलिस इस हत्याकांड की FIR में अन्य 7 आरोपियों के नाम भी शामिल करें और उन पर कठोर कार्रवाई की जाए।

मामूली कहासुनी और पुरानी रंजिश
घटना रविवार सुबह की है, जब मुहांसा सरपंच राजेंद्र सिंह यादव अपने बेटे युधिष्ठिर यादव के साथ मजदूर लेने आदिवासी मोहल्ला गए थे। वहां सड़क पर बाइक खड़ी करने की बात को लेकर आरोपी धर्मेंद्र यादव ने गाली-गलौज की और अपनी दबंगई दिखाते हुए बाइक पर ट्रैक्टर चढ़ाकर उसे चकनाचूर कर दिया।

विवाद बढ़ने पर आरोपी धर्मेंद्र ने अपने पिता कप्तान यादव, भाई सतेंद्र और परिवार की महिलाओं को बुला लिया। आरोप है कि कप्तान यादव ने तलवार और कुल्हाड़ी से युधिष्ठिर के सीने और पेट पर ताबड़तोड़ वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बीच-बचाव करने आए सरपंच और दो अन्य लोग भी कुल्हाड़ी के वार से गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

जमीन विवाद का एंगल
मृतक के परिजनों का कहना है कि यह हमला अचानक नहीं था। ग्राम पंचायत में बिजली पावर हाउस के लिए जिस शासकीय जमीन का चयन किया गया था, उस पर आरोपियों का अवैध कब्जा था। सरपंच द्वारा उस जमीन को प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी देने के कारण आरोपी परिवार रंजिश रखे हुए था और इसी खुन्नस में इस वारदात को अंजाम दिया गया।

न्याय के लिए हाईवे जाम
हालांकि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 24 घंटे के भीतर 5 आरोपियों (कप्तान यादव, धर्मेंद्र, सतेंद्र, कमला बाई और रामू) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन परिजन इससे संतुष्ट नहीं हैं।

परिजनों का कहना है कि इस साजिश में कुछ अन्य लोग भी शामिल थे जिनके नाम पुलिस ने FIR में दर्ज नहीं किए हैं,इस कारण आज सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हाईवे पर बैठकर आवागमन ठप कर दिया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और प्रशासनिक अधिकारी परिजनों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं।

चक्काजाम के कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। ग्रामीण इस बात पर अड़े हैं कि जब तक पुलिस प्रशासन लिखित में शेष आरोपियों के नाम बढ़ाने का आश्वासन नहीं देता, वे प्रदर्शन खत्म नहीं करेंगे।