Shivpuri जिले में मक्का के उत्पादन का रिकॉर्ड टूटा,लेकिन भाव ने किसानों का दिल तोडा

Bhopal Samachar

शिवपुरी। शिवपुरी जिले में इस साल जुलाई माह में अधिक वर्षा होने के बाबजूद भी मक्के की पैदावार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पिछले साल मक्के का रकबा 81,000 हेक्टेयर था,लेकिन इस बार जिले में 93,800 हेक्टेयर में मक्का की बोबनी हुई थी। पिछले वर्ष मक्का के भाव 3 हजार से लेकर चार हजार रुपए तक पहुंचे थे इस कारण जिले के किसानों ने मक्का की खेती में इंटरेस्ट लिया था। लेकिन इस साल भाव 1 हजार से लेकर डेढ़ हजार रूपए तक पहुंचे है। मक्का की पैदावार से व्यापारी,हम्माल,मंडी के कर्मचारी ओर ट्रक मालिक और रेलवे तक खुश है लेकिन किसान दुखी है।

शिवपुरी जिले से 15 नवंबर से शिवपुरी स्टेशन स्थित रैक पॉइंट से मक्का लोड होना शुरू हो गया था। अब तक 22 रैंक दूसरे राज्यों में भेजी जा चुकी हैं। मक्के की अधिक पैदावार से शिवपुरी जिले के स्थानीय व्यापारियों का व्यापार बढ़ा है। मंडियों के अलावा रैक लगने से हर बार 300 से 400 मजदूरों को भी रोजगार मिला है। मप्र मंडी बोर्ड की टैक्स के रूप में आमदनी बढ़ी है। रेलवे को भी रैक के जरिए भाड़े के रूप में फायदा
हुआ है,लेकिन किसानों का पिछले वर्ष के अनुपात में मक्का के भाव नहीं मिले हैं।  

इस कारण बढ़ गया जिले में मक्का फसल का रकबा
बताया जा रहा है मक्के की फसल में किसानों की मेहनत अधिक नहीं होती है लागत भी कम आती है जंगली फसल होने के कारण किसानों को दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता है और इस फसल को जानवर भी खेतों में घुसकर नष्ट नहीं करता है,और सबसे अधिक बात दूसरी फसलों के अनुपात मे मक्का की फसल की पैदावार अधिक होती है। इस वर्ष 1 हैक्टेयर में 35 से 40 क्विंटल की पैदावार हुई है। और पिछले वर्ष किसानों को यह फसल को लॉटरी वाली साबित हुई थी कारण सिर्फ एक था क्यो की किसानो को मक्के का भाव उम्मीद से अधिक 3 हजार से लेकर 4 हजार तक गया था।

किसान की मेहनत अधिक,लेकिन कमाई हुई कम
इस वर्ष मक्के की फसल ने किसानों को पिछले वर्ष के अनुपात में नुकसान दिया है। अधिक वर्षा होने के कारण किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ी,मक्का की फसल जब कट कर खेतों में पड़ी थी जब भी बारिश हो गई,फसल को खेतों में सुखाने के लिए किसानों को तिरपाल खरीदनी पड़ी और अत्यधिक परिश्रम करना पड़ा था। ऊपर से हद जब हो गई मक्का की फसल बाजार में आई तो बाजार भाव धड़ाम से नीचे गिर गए और 1 हजार प्रति क्विंटल नीचे चले गए। इसे लेकर किसानों ने चक्का जाम तक किया। हालांकि, कंपनियां मक्का खरीदने आने लगी है, तो मक्के का भाव 1600 रु. से अधिक मिलने लगा है।

मंडी: अक्टूबर, नवंबर की तुलना में दिसंबर में ज्यादा आवक
शिवपुरी जिले में कोलारस, बदरवास और खतौरा मंडी में मक्का की सबसे ज्यादा बिक्री हो रही है। क्योंकि इन्हीं क्षेत्रों में मक्का का सबसे ज्यादा उत्पादन है। अक्टूबर, नवंबर की तुलना में दिसंबर के 20 दिनों में मक्का की सबसे ज्यादा आवक हुई है। सबसे अधिक बदरवास मंडी में मक्का की आवक दर्ज हुई है। दर्ज

शिवपुरी से 22 रैक हुई अपलोड
शिवपुरी रेलवे रैक पॉइंट से अब तक 22 रैक अपलोड कर 5.72 लाख क्विंटल मक्का दूसरे राज्यों में भेजी जा चुकी हैं। अभी भी शिवपुरी जिले से 12 से अधिक रैक मक्का बाहर जाने का अनुमान है। बता दें कि मक्का का इस्तेमाल खाने के अलावा बड़ी मात्रा में इथेनॉल में किया जा रहा है,लेकिन इस साल सरकार ने एथेनॉल का आयात विदेशो से अधिक मात्रा में कर लिया इस कारण बाजार में मक्का का दाम टूटा है। इथेनॉल पेट्रोल में मिलाया जा रहा है।  

इनका कहना है।
खरीफ सीजन में ज्यादा बारिश के बावजूद मक्का का रकबा ज्यादा रहा। अपेक्षाकृत उत्पादन भी अच्छा निकला है। अगले सीजन में मक्का का रकबा 1 लाख के पार पहुंच सकता है। मूंगफली के रकबे में भी इजाफा होगा। - 
पीएस करोरिया, उप संचालक, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग जिला शिवपुरी