BJP SHIVPURI नेता नरेंद्र जैन भोला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, गिरफ्तारी का प्रयास

शिवपुरी। ग्वालियर उच्च न्यायालय ने धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कूटरचना (जालसाजी) के आरोपी नरेंद्र जैन भोला की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है । न्यायालय ने मामले को गंभीर माना है, विशेष रूप से दस्तावेजों में की गई तारीखों की हेराफेरी को अपराध की श्रेणी में रखा है ।

यह है पूरा मामला
भाजपा नेता नरेंद्र जैन ने शहर कोतवाली में 22 दिसंबर 2023 को प्रद्युम्न वर्मा, उनके भाई दीपक वर्मा, सहयोगी गौरव पचौरी और नरेन्द्र अग्रवाल पर धारा 420, 406, 34 के तहत मामला दर्ज करवाया।

जिसमें उन्होंने बताया कि 3-3 हजार के दो प्लॉट के एवज में आरोपियों ने उनसे 10 लाख रुपए अकाउंट ट्रांसफर और बाकी 75 लाख नगद कुल 85 लाख रुपए लिए गए। लेकिन जब उन्होंने आरोपियों को प्लॉट की रजिस्ट्री और कब्जा देने के लिए कहा तो वो टालने लगे और उनसे ही 25 लाख रुपए मांग करने लगे।

प्रद्युम्न का दावा- विक्रय अनुबंध पत्र नकली
इसके बाद प्रद्युमन वर्मा ने मामले में शिवपुरी सिटी थाने में पहुंचकर शिकायत की और दावा किया कि विक्रय अनुबंध पत्र नकली है। जिसको 15 मार्च 2023 में फर्जी तरीके से बनवाया गया है। इस दिन वो और उनके भाई नगर में थे ही नहीं।

उन्होंने बताया कि वो विदेश यात्रा से 14 मार्च की रात इंदौर लौटे। जहां उनका भाई दीपक वर्मा खराब स्वास्थ्य के चलते अस्पताल में भर्ती थे। जिसके बाद वो 17 मार्च को शिवपुरी आए। लेकिन, अनुबंध पत्र 15 मार्च का है, जो संभव ही नहीं है। इसके साथ ही वर्मा ने अपने दावों को लेकर सबूत भी थाने में पेश किए हैं। जिसके आधार पर पुलिस ने नरेन्द्र जैन, उनके बेटे हर्षित जैन और मुनीम महेश शर्मा पर 420,467,468,471,34 के तहत मामला दर्ज किया है।

इस मामले को लेकर भाजपा नेता गए थे हाईकोर्ट
इस मामले को लेकर भाजपा नेता नरेन्द्र जैन अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट मे गए थे। ग्वालियर उच्च न्यायालय ने धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कूटरचना (जालसाजी) के आरोपी नरेंद्र जैन की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है । न्यायालय ने मामले को गंभीर माना है, विशेष रूप से दस्तावेजों में की गई तारीखों की हेराफेरी को अपराध की श्रेणी में रखा है ।

आवेदक नरेंद्र जैन और प्रदुमन वर्मा के बीच 6000 वर्ग फुट जमीन को लेकर एक मौखिक समझौता हुआ था । आरोप है कि जब शिकायतकर्ता भारत से बाहर था, तब नरेंद्र जैन ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी से एक सेल डीड (बिक्री विलेख) तैयार करवा लिया ताकि शिकायतकर्ता को आर्थिक नुकसान पहुँचाया जा सके ।

हाईकोर्ट ने माना की इस मामले में दस्तावेजों के साथ गंभीर छेड़छाड़ की गई है । रिकॉर्ड के अनुसार,आरोपी भाजपा नेता नरेन्द्र जैन ने 15 मार्च 2024 को खरीदे गए स्टांप पेपर का उपयोग किया,इस स्टांप पर 15 मार्च 2023 की तारीख में समझौता निष्पादित होना दिखाया गया। कोर्ट ने इसे तारीखों की जानबूझकर की गई हेराफेरी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का स्पष्ट मामला माना ।

सिविल विवाद की आड़ में आपराधिक कृत्य नहीं छिप सकता
आरोपी के वकील ने तर्क दिया था कि यह मामला दीवानी (Civil) प्रकृति का है और पहले से ही कोर्ट में लंबित है । हालांकि, न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता ने स्पष्ट किया कि दीवानी और आपराधिक कार्यवाही एक साथ चल सकती है, खासकर तब जब धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे आपराधिक तत्व मौजूद हों ।

कोर्ट का कड़ा रुख
यह आरोपी की दूसरी अग्रिम जमानत याचिका थी, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामले की प्रकृति और अपराध की गंभीरता को देखते हुए राहत देना उचित नहीं है । इस आदेश के बाद अब आरोपी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है,अब देखना है कि कोतवाली पुलिस फरार भाजपा नेता नरेंद्र जैन को कब गिरफ्तार करती है।

इनका कहना है
हाईकोर्ट के आदेश के पालन में इस मामले में फरार आरोपी नरेन्द्र जैन भोला की गिरफ्तारी का प्रयास कर रहे हैं।
कृपाल सिंह राठौड़,टीआई सिटी कोतवाली