14 वर्षीय कन्या ने निर्वस्त्र अवस्था मे ली थी बावड़ी में जल समाधि, यही से उत्पत्ति हुई हैं कुंवारी नदी की: पढिए पूरी खबर

शिवपुर की एकमात्र कुंवारी नदी की कहानी

शिवपुरी। भारत की प्रत्येक नदी के उत्पत्ति के पीछे एक कहानी हैं,गंगा नदी,नर्मदा नदी,सरस्वती सहित अनेक नदियों का उद्गम स्थल भारत की यह धरती हैं,लेकिन शिवपुरी जिले से एकमात्र नदी की उत्पत्ति हुई और इसका उद्गम स्थल हैं पोहरी विधानसभा के बैराड़ तहसील के ग्राम देवपुरा और बीलपुरा के बीच जंगल में स्थित एक बावड़ी से कुंवारी नदी की उत्पत्ति हुई और यह बावड़ी है इस नदी का उदगम स्थल हैं।

यह है कथा कुंवारी नदी की: इस कारण नाम पड़ा कुंवारी

नदी की उत्पत्ति के बारे में ग्रामीणों ने बताया कि बेहरगामा गांव की एक 14 वर्षीय कुंवारी लड़की को उसकी सौतेली मां परेशान करने के उद्देश्य से बिना रस्सी दिए जंगल में स्थित बावड़ी पर पानी लाने भेज देती थी। लड़की बावड़ी पर पहुंचकर जब नग्न होकर प्रार्थना करती तो बावड़ी का पानी ऊपर आ जाता जिसके बाद वह पानी भरकर घर ले आती थी,मां सोचती थी कि बिना रस्सी के पानी कैसे यह ले आती हैं।

इस कारण उसने चोरी छुपे इस कन्या का पीछा करने की योजना बनाई और जब उसने लडकी को पानी लेने भेजा तो वह भी उसके पीछे पीछे चली आई। जब यह लडकी नग्न अवस्था में जल के लिए प्रार्थना कर रही थी तो उसकी मां ने उसे देख लिया और लडकी ने भी मां को देख लिया। इसके बाद लडकी ने बावडी ने जल समाधि ले ली। यह बावड़ी ही कुंवारी नदी का उदगम स्थल हैं।

220 किमी बहती है यह नदी, इन जिलों की सीमा से गुजरती हैं

कंवारी नदी शिवपुरी जिले से बहती हुई श्योपुर जिले से होते हुए सबलगढ़ तहसील में प्रवेश करती है। कुंवारी नदी जिले के मध्य भाग में उत्तर पूर्व की ओर बहती है कुंवारी नदी जौरा, मुरैना और अंबाह तहसील से होते हुए आसन नदी में शामिल हो जाती है। कुंवारी नदी की सहायक नदी आसन है।

कुंवारी नदी चंबल नदी के समांतर बहते हुए भिंड जिले मैं लहार तहसील में सिंध नदी से मिल जाती है। कुंवार नदी सिन्ध नदी की सहायक नदी है। कुंवारी नदी मुरैना के पाठर के जल विभाजक द्वारा चम्बल तथा कुनू से पृथक हो जाती हैं। पूर्व में चम्बल नदी के समानांतर बहती हुई भिंड जिले की लहार तहसील के निकट सिन्ध नदी से मिल जाती हैं। कुंवारी नदी चंबल नदी के समानांतर बहती रहती है। कुंवारी नदी कुल 220 किमी लंबी हैं। यह नदी उत्तर की ओर बहती हैं।