भूसे के भरी हुई झोपडी मे लगी आग: 2 सगी बहने जिंदा जली, दोनो के शव एक दूसरे से ​थे चिपके - Shivpuri News

पवन पाठक पिछोर। खबर जिले के पिछोर थाना अंतर्गत आने वाले गांव नयागांव से आ रही है कि खेत पर बनी झोपडी में भूसा भरा था। इस झोपडी में 4 बच्चे खेल रहे थे। रविवार की देर शाम इस झोपडी में अचानक आग लग गई,जब आग लगी तो 2 बच्चे इस टपरिया से भाग निकले,लेकिन 2 मासूम बहने इसमें फस गई और जिंदा जल गई।

बताया जा रहा है कि जब फायर बिग्रेड ने इस आगजनी पर काबू किया और अंदर घुसे तो देखा 2 मासूम जिंदा जली दिखी दोनो एक शव एक दूसरे से चिपके हुए थे। जब यह दृश्य लोगो ने देखा तो उनके कलेजा फट गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम नयागांव गजौरा निवासी कृपाल सिंह अपने खेत पर बने मकान पर रहता है। यहीं पर मकान से थोड़ा दूर एक अन्य झोंपड़ी बनी हुई है। इसमें उसका भूसा भरा हुआ था। इस झोंपड़ी के पास ही रविवार की शाम करीब 5 बजे कृपाल सिंह की 5 साल की बेटी शिवांशी उम्र 4 साल नित्या उम्र 3 साल अपने चचेरे भाई-बहन अभिजीत व समीक्षा के साथ खेल रहीं थी।

अचानक झोंपड़ी में आग लग गई और उसमें से धुआं उठने लगा। जब झोंपड़ी में से धुआं उठते हुए बच्चों के स्वजनों व अन्य ग्रामीणों ने देखा तो वह दौड़ कर वहां गए। आग में से अभिजीत व समीक्षा को बाहर निकाल लिया जबकि भूसे के ढेर में छिपकर बैठी हुई शिवांशी व नित्या ग्रामीणों को नजर नहीं आईं।

अभिजीत व समीक्षा भी आग की घटना से डर गए और उन्होंने भी शिवांशी व नित्या के अंदर फंसे होने के बारे में नहीं बताया। इसी दौरान आग भड़क गई तो स्वजनो ने फायर बिग्रेड को फोन लगाया। जब फायर बिग्रेड के आने के बाद आग बुझी तो देखा कि दोनों बच्चियां भूसे के ढेर में जली हुई पडी थीं। मासूम बच्चियों के जिंदा जलने की खबर के बाद से पूरे क्षेत्र मे गम का माहौल है। स्थानीय प्रशासन भी मौके पर पहुंच गया और पीड़ित परिवार से मामले की जानकारी ली है।

मजदूरी कर अपने परिवार को भरण पोषण करता हैं कृपाल सिंह

घटना के समय कृपाल सिंह मजदूरी करने गया था। कृपाल सिंह मजदूरी करता हैं। कृपाल सिंह की 2 ही बेटियां थी,जो हादसे का शिकार हो गई। पुलिस ने इस मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर विवेचना प्रारंभ कर दी हैं। वही नायब तहसीलदार ज्योति लाक्षाकार घटना की जांच में जुटी हैं कि आखिर आग कैसे लगी। वही तहसीलदार का कहना है कि यह घटना बहुत दुखद हैं,पीडित परिवार को जो भी शासन की ओर से नियमानुसार आर्थिक सहायता मिलती हैं वह दी जाऐगी।

लाइट नहीं, आग नहीं फिर कैसे जली झोंपड़ी

झोंपड़ी में जहां आग लगी है, वहां न तो बिजली का कनेक्शन है और न ही कोई आग आसपास है। ऐसे में फिलहाल कोई यह नहीं समझ पा रहा है कि आखिर झोंपड़ी में आग कैसे लगी है, हालांकि बताया जा रहा है बच्चे घर-घर खेल रहे थे। ऐसे में आशंका है कि कहीं आग बच्चों ने ही तो नहीं लगा ली, लेकिन फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है। अभिजीत और समीक्षा इतने सदमे में हैं कि घटना के बारे में कुछ नहीं बता पा रहे हैं।