सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों के बाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का कमाल, कर्णमूल ग्रंथि का किया सफल ऑपरेशन - Shivpuri News

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शिवपुरी।
जब से शिवपुरी जिले में मेडिकल कॉलेज बना है तब से शिवपुरी में लगातार स्पेशलिस्ट डॉक्टर आ गए है। जिससे अब लोगों को कई जटिल बीमारियों का लाभ शिवपुरी में ही मिल रहा है। कल शिवपुरी जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों में महज 10 मिनिट में 24 घंटे से बच्चे के गले में फंसे सिक्के को सफल तरीके से निकाल लिया था। उसके बाद आज यह कमाल मेडीकल कॉलेज के डॉक्टरों ने किया है। जहां डॉक्टरों ने कर्णमूल ग्रंथि (पैरोटिड ग्‍लांट) का सफल ऑपरेशन किया है। ऑपरेशन के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी छुट्टी कर दी गई है।

बताया गया है कि कोलारस के ग्राम अमरपुर की रहने वाली कसूमल पत्‍नी सीताराम जाटव को पिछले चार-पांच सालों से जबड़े व गले के पास सूजन से परेशान थी। जब सूजन ज्‍यादा बढ़ गई तो कसूमल को ग्वालियर के डॉक्टरों को दिखाया तो पता चला कि उसे पैरोटिड ग्लैंड ट्यूमर हो गया है।

डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन कराने की बात कही लेकिन ग्वालियर में ऑपरेशन के लिए नंबर नहीं आ पा रहा था जिस कारण वह परेशान हो रहे थे। लेकिन जब उन्हें किसी ने बताया कि इसका ऑपरेशन शिवपुरी के मेडीकल कॉलेज में हो सकता है वहां इसके विशेषज्ञ हैं। जिस पर सीताराम अपनी पत्नी को लेकर आया। विशेषज्ञों की टीम डॉ. धीरेंद्र त्रिपाठी हेड ऑफ द डिपार्टमेंट, डॉ, मेघा प्रभाकर असिस्‍टेंट प्रोफेसर व डॉ. ज्‍योति‍ शर्मा ने महिला कसुमल का चैकअप कर कुछ टेस्‍ट किए। इसके बाद 10 फरवरी को महिला का ऑपरेशन किया।

डॉ. मेघा प्रभाकर ने बताया कि ऑपरेशन काफी जटिल था अगर जरा सी भी चूक हो जाती तो महिला का चेहरा हमेशा तिरछा हो जाता लेकिन ऑपरेशन को सफलतापूर्वक कर लिया गया। यह ऑपरेशन लगभग डेढ़ से दो घंटे चला। ऑपरेशन के तीन दिन बाद महिला बिल्कुल स्वस्थ हो गई और अब उसकी छुट्टी कर दी गई है। इस सफल ऑपरेशन पर डॉक्टरों की टीम को लोगों ने बधाइयां दी है।

क्या है पैरोटिड ग्लैंड

गलगण्ड रोग (अंग्रेज़ी: ”, पैरोटाइटिस’ मम्प्स ‘ के रूप में भी जाना जाता है) एक विकट विषाणु जनित रोग है जो पैरोटिड ग्रंथि को कष्टदायक रूप से बड़ा कर देती है। ये ग्रंथियां आगे तथा कान के नीचे स्थित होती हैं तथा लार एवं थूक का उत्पादन करती हैं। अगर इस बीमारी का सही समय से इलाज नहीं हो तो कैंसर भी हो सकता है व चेहरा हमेशा के लिए तिरछा हो जाता है।
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