3 गुना आक्रामक कोरोना का नए वैरिएंट ओमिक्रोन से निवटने प्रशासन ने बनाई 3 गुना बडी सुरक्षा की दीवार- Shivpuri News

शिवपुरी। कोरोना की पहली और दूसरी लहर आप सभी ने देखी हैं। दूसरी लहर के परिणाम आज भी हमारे आंखो के सामने से नही गए। शहर के कई परिवार है जिन्होने अपनो को खोया हैं,ऐसा शहर में कोई नही हैं जिन्होने अपने किसी परिचित को इस दूसरी लहर में खोया नही होगां अब तीसरी लहर की आहट,वह भी दूसरी लहर के संक्रमण से तीन गुंना तेज,सोचकर दिल कांप जाता हैं। वही प्रशासन भी अब अलर्ट हो गया हैं उसने भी इस तीन गुना तेज संक्रमण से निबटने के लिए तीन गुना बडी व्यवस्था रूपी सुरक्षा की दिवार बनाई हैं।

दूसरी लहर में 500 एक्टिव केसो में हांफ गया था प्रशासन, अब नही हाफेगा

कोरोना की तीसरी लहर आने की आहट में प्रशासन ने स्वास्थ्य सुविधाओं में तीन गुना तक इजाफा कर लिया है। ऑक्सीजन बेड से लेकर ऑक्सीजन की उपलब्धता, आइसीयू बेड, दवाएं, उपकरण में कई गुना क्षमता बढ़ाई गई है। यदि एक समय पर जिले में एक हजार एक्टिव केस भी होते हैं तो उन्हें अस्पताल में इलाज देने के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयार है।

जबकि कोरोना की दूसरी लहर में स्थिति यह थी कि सक्रिय मरीज 500 पर पहुंचते ही व्यवस्थाएं हांफ गई थीं। विशेषज्ञ जनवरी में तीसरी लहर की आशंका जता रहे हैं और उसी के लिहाज से विभाग ने अपनी तैयारियां की हैं। दूसरी ओर प्रशासन भी अब इस बात को लेकर सक्रिय हो गया है कि इलाज से पहले ही वायरस को फैलने से रोका जाए। इसलिए मास्क व कोरोना गाइडलाइन को लेकर सख्ती का दौर भी अब शुरू हो गया है।

अब सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रो पर उपचार उपलब्ध

दूसरी लहर में जो भी कोरोना संक्रमित हुआ उसे इलाज के लिए शिवपुरी ही आना पड़ा। इसका कारण था कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर न तो ऑक्सीजन बेड थे और न ही आइसीयू की सुविधा। अब सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तक ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है। सभी केंद्रों पर आइसीयू बेड भी हैं। पोहरी, करैरा, कोलारस और पिछोर में ऑक्सीजन प्लांट बना दिए गए हैं। अब संक्रमण होने पर ग्रामीण अंचल के मरीज वहीं पर अपना इलाज करा सकेंगे और जिले तक आने के सफर में उनकी सांसे नहीं थमेंगी।

चार गुना तक बढ़ी ऑक्सीजन की क्षमता, 690 एलएमपी जल्द उपलब्ध होगी

दूसरी लहर में पूरे देश ने ऑक्सीजन की किल्लत का सामना किया और एक-एक सांस की अहमियत जानी थी। तब जिले में सिर्फ 400 एलएमपी क्षमता का प्लांट था। इससे सबक लिया और काम शुरू हुआ। अब 1770 एलएमपी क्षमता के प्लांट तैयार हैं। 690 एलएमपी क्षमता के प्लांट पर थोड़ा सा तकनीकी काम बचा है जो जल्द पूरा हो जाएगा। इसमें वोल्टेज की समस्या आ रही है क्योंकि तहसील पर मौजूद प्लांटो पर अधिक वोल्टेज आ रहा है। अभी सिंचाई का समय होने की वजह से बिजली कंपनी वहां अधिक वोल्टेज की सप्लाई दे रही है। स्वास्थ्य विभाग ने स्टेबलाइजर के लिए भी प्रस्ताव भेज दिया है।

पुलिस ने भी की तैयारी, अस्पताल में ऑक्सीजन की सुविधा शुरू की

कोरोना की दूसरी लहर में करीब डेढ़ सैकड़ा पुलिसकर्मी संक्रमित हुए थे। अन्य मरीजों की तरह पुलिस को भी इलाज की समस्या का सामना करना पड़ा था। पुलिस विभाग ने सीआरपीएफ आदि की मदद ली थी, लेकिन इस बार पुलिस अस्पताल भी कोरोना के इलाज के लिए तैयार है। पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल ने पुलिस अस्पताल में 7 बेड कोरोना के तैयार कराए हैं जिसमें ऑक्सीजन की सेंट्रल लाइन तैयार है। इसके अलावा नॉन ऑक्सीजन बेड भी उपलब्ध हैं।

इस तरह बढ़ाई सुविधाएं

दूसरी लहर के समय 230 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध थे, अब 601 मौजूद
75 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है
दूसरी लहर के सयम 254 ऑक्सीजन बेड थे जो अब बढ़कर 528 हो गए हैं।
एचडीआइ/आइसीयू के 75 बेड ही थे जो अब ढ़ाई गुना बढ़कर 177 हो गए हैं।
30 बेड का पीआइसीयू भी तैयार है।
निजी अस्पतालों में 20 रिजर्व बेड और 10 आइसीयू बेड कोविड मरीजों के लिए रिजर्व किए गए हैं।

कम समय में ही तीन गुना तक विस्तार कर लिया गया है

पिछली लहर के मुकाबले में इस बार तैयारियां बहुत ज्यादा बेहतर हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में कम समय में ही तीन गुना तक विस्तार कर लिया गया है। हमारी कोशिश है कि तीसरी लहर का सामना ही न करना पड़े, लेकिन यदि तीसरी लहर आई तो बेहतर इलाज देने के लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं।
डॉ. संजय ऋषिश्वर, कोविड प्रभारी

हमे कोशिश करनी हैं कि तीसरी लहर आए ही नही

स्वास्थ्य सेवाओं में काफी हद तक बढ़ोत्तरी हो चुकी है और यह आगे भी जारी है। एक लिक्विड ऑक्सीजन टैंक और स्वीकृत हो गया है। साथ ही मैन पावर में भी बढ़ोत्तरी की जा रही है। यह तैयारियां तो हैं, लेकिन हमें कोशिश करना है कि तीसरी लहर आए ही न। इसके लिए सभी को नियम मानने जरूरी हैं। प्रशासन भी अब पूरी सख्ती बरतेगा। अभी जिले में 88 प्रतिशत लोगों ने ही सेकंड डोज लगवाया है। यह 12 प्रतिशत का अंतर बहुत है और यह 12 प्रतिशत लोगों की लापरवाही पूरे शहर को भारी पड़ सकती है। इसलिए सभी सेकंड डोज जरूर लें। - अक्षय कुमार सिंह, कलेक्टर