विधानसभा में फैंके फर्जी आंकडे: शिवपुरी मेडिकल कॉलेज ने गिनाया प्रतिदिन 16 सर्जरी का आंकडा- Shivpuri News

नीरज अवस्थी-शिवपुरी।
सुविधाओ को नही विवादो का दूसरा नाम बन चुका हैं शिवपुरी का शासकीय मेडिकल कॉलेज। उक्त कॉलेज में इलाज की सुविधा साल जीएमसी का अस्पताल कोरोना की दूसरी लहर के दौरान शुरू हुआ। अस्पताल शुरू हुए 8 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक इसका लाभ जिलेवासियों को पूरी तरह से मिलना शुरू नहीं हुआ है। इसे लेकर आए दिन यहां की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़े होते रहते हैं। इसी कार्यप्रणाली की हम बात कर रहे हैं कॉलेज प्रबंधन ने विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के जाबब में झूठे आंकडे फैक दिए हैं।  

यह पूछा प्रश्न विधानसभा में

मेडिकल कॉलेज का अस्पताल खुलने के बाद भी मरीजों के ग्वालियर रैफर होने की प्रथा को लेकर कोलारस विधायक वीरेंद्र रघुवंशी ने विधानसभा में मुद्दा उठाया। विधायक ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री से सवाल पूछा कि जीएमसी में फैकल्टीवार स्वीकृत, कार्यरत व रिक्त पदों की जानकारी विशेषज्ञों के नामवार व पदवार दें। वर्तमान में यहां किन-किन रोगों का उपचार शुरू हो गया है व कौन-कौन सी जांच उपलब्ध हैं। विगत एक वर्ष में प्रश्न दिनांक तक कुल कितने मरीजों के किन किन रोगों के ऑपरेशन किए गए हैं। इसके जबाव में चिकित्सा मंत्री ने पूरे सालभर का लेखा जोखा प्रस्तुत कर दिया।

उनके द्वारा बताए गए आंकड़ों के अनुसार यहां ढ़ाई हजार से अधिक सर्जरी की जा चुकी हैं। अस्पताल में ओपीडी व आइपीडी में मेडिसिन, अस्थि रोग, स्त्री व प्रसूति रोग, दंत रोग विभाग, चर्म रोग, क्षय व श्वास रोग, मानसिक रोग, बाल एवं शिशु रोग, नेत्र रोग शल् क्रिया और कैंसर रोग से संबंधित मरीजों को चिकित्सकीय सुविधा प्रदान की जा रही है। साथ ही करीब 30 तरह की जांच भी की जा रही हैं। इतने सुविधाएं शुरू होने के बाद भी अभी तक यहां जिला अस्पताल से रैफर मरीजों को नहीं लिया जा रहा है।

6 माह में ढाई हजार सर्जरी झूठा आंकडा पेश किया

शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में उपचार की सुविधा अप्रैल माह में शुरूवात की थी। अप्रैल माह में कोरोना के मरीजो का उपचार किया जा रहा था जो की जून तक चला। समान्य ओपीडी जुलाई या अगस्त से सामान्य ओपीडी की शुरूवात की थी। अगर इन माह का हिसाब लगाया जाए तो सामान्य ओपीडी का शुरू हुए हुए मात्र चार माह हुए हैं। अगर कोरोना काल के बाद के माह गिनाए जाए तो दिसबंर के अंत तक 6 माह होगें। विधानसभा में बताया है कि ढाई हजार छोटे बडे ऑपरेशन किए हैं। यह बात किसी को पच नही रही है कि 180 दिन में ढाई हजार आपरेशन अर्थात प्रतिदिन 16 से अधिक ऑपरेशन।

ढ़ाई हजार से ज्यादा सर्जरी, डीएच से रैफर मरीजों को इंकार

मेडिकल कॉलेज में अस्थि रोग विभाग 208, सर्जरी विभाग 166, ईएनटी 155, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग 1301 व ने रोग विभाग 727 मेजर व माइनर सर्जरी कर चुका है। इस तरह यहां पर नॉन इमरजेंसी की सभी सुविधाएं मौजूद हैं। इसके बाद भी यदि कोई नॉन इमरजेंसी मरीज जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रैफर किया जाता है तो उसे वहां नहीं लिया जाता है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में आने वाले मरीजों को ही आइपीडी की सुविधा दी जाती है। यानी यदि किसी मरीज ने जिला अस्पताल में कुछ इलाज करा लिया है तो मेडिकल कॉलेज में फिर नए सिरे से पर्चा बनावएगा और पूरी प्रक्रिया शुरू होगी। इमरजेंसी मरीज यहां लिए ही नहीं जाते हैं। हर दिन जिला अस्पताल से 10 से अधिक मरीज रैफर किए जाते हैं।

कोरोना के दौरान के इलाज पर उठाए सवाल, हर तीसरे मरीज की हुई थी मौत

कोरोना की दूसरी लहर में मेडिकल कॉलेज का अस्पताल शुरू किया गया था। विधायक ने दूसरी लहर के दौश्रान यहां की सेवाओं पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि कोरोना काल में मेडिकल कॉलेज की संतोषजनक सेवाएं जिलेवासियों को नहीं मिल सकी थीं। उल्लेखनीय है कि दूसरी लहर के दौरान मेडिकल कॉलेज में मई के महीने तक 403 मरीज भर्ती हुए थे जिसमें से 141 मरीजों की मौत हो गई थी। यानी यहां भर्ती हर तीसरे मरीज ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।

क्षेत्रीय संचालक को कहा था कि इंतजाम नहीं हैं

कुछ दिनों पूर्व ही क्षेत्रीय संचालक ने शिवपुरी स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर निर्देशित किया कि जिला अस्पताल से मरीजों को सीधे ग्वालियर जयारोग्य अस्पताल में रैफर न किया जाए। मरीजों को शिवपुरी मेडिकल कॉलेज रैफर किया जाए और आगामी कार्रवाई वहीं से होगी। इस पर मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. केबी वर्मा ने पत्र लिखकर जबाव दिया कि मुख्य ओटी का कार्य प्रगति पर है इसलिए ट्रॉमा और इमरजेंसी शल्य क्रिया के केस नहीं किए जा रहे हैं।

ओटी का कार्य पूर्ण होने पर ही ट्रॉमा और इमरजेंसी केस शुरू किए जाएंगे। मेडिकल कॉलेज के अस्पताल के शुरू होने के साथ ही कई विवाद इसके साथ जुड़ गए हैं। हाल ही में यहां हुई भर्तियों को लेकर भी जांच के आदेश जारी किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त अन्य कई शिकायतों डीन और अधीक्षक की हो चुकी हैं।