1.50 करोड डकार गए डीन निगम, अधीक्षक केबी वर्मा के साथ, सजायाफ्ता हैं डॉ निगम: जांच के आदेश- Shivpuri News

शिवपुरी। शिवपुरी के मेडिकल अपनी घोषणा के बाद बडे ही संघर्षो के आद अपने अस्तित्व में आया हैं। इस मेडिकल कॉलेज के विषय में हमारे जनप्रतिनिधि कहते थे कि कागज के टूकडे पर कोई कॉलेज बनता है। अब इस कॉलेज में स्टाफ भर्ती प्रक्रिया में कागजो में गडबडी करने के आरोप लग रहे है। आरोप है कि स्टाफ भर्ती में डेढ करोड से अधिक की रिश्वत ली है। इस मामले के जांच के आदेश भी हो चुके है।

जानकारी के अनुसार श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसी) में भर्ती प्रक्रिया विवादों में आ गई है। कुछ महीने पूर्व ही यहां पर 198 नर्सिंग पदों की भर्ती की गई थी। इसके साथ ही पिछले एक वर्ष में कई पदों पर भर्तियां की गई हैं। इनमें हुए भ्रष्टाचार के लिए डीन डॉ. अक्षय कुमार निगम और जीएमसी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. केबी वर्मा को हटाए जाने के लिए शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंच गई है।


इस पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के संचालक और अवर सचिव दाेनों ने ही जांच के लिए ग्वालियर आयुक्त को पत्र लिखा है। अवर सचिव आरएस वर्मा ने अपने पत्र में लिखा है कि शिवपुरी निवासी योगेंद्र वर्मा द्वारा आवेदन पत्र द्वारा जीएमएसी के डीन डॉ. अक्षय निगम और डाॅ. केबी वर्मा अधीक्षक द्वारा पद से हटाए जाने की हेतू मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखकर संबोधित किया है।

इस शिकायत में उल्लेखित बिंदुओं की जांच कराकर प्रतिवेदन अपने अभिमत सहित उपलब्ध कराने का कष्ट करें। उल्लेखनीय है कि जब नर्सिंग स्टाफ सहित अन्य भर्तियां शुरू की गई थीं तब से ही लगातार भ्रष्टाचार के आराेप लग रहे थे और शिकायती पत्र भी सामने आए थे। इसमें भर्ती के साथ अन्य बिंदुओं की चर्चा की गई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस गंभीर मसले पर ग्वालियर आयुक्त की ओर से कोई कार्रवाई संस्थित नहीं की गई है। चिकित्सा शिक्षा संचालक ने 9 नवंबर और अवर सचिव आरएस वर्मा ने 112 अक्टूबर को अादेश जारी किए हैं।

अभी पूरा अस्पताल शुरू भी नहीं हुआ और भ्रष्टाचार के आरोप

जीएमसी का अस्पताल अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुआ है। निर्माण में लेटलतीफी होने के बाद इसे कोरोना की दूसरी लहर में शुरू किया गया था। कोरोना की दूसरी लहर के जाने के बाद यहां ओपीडी की सुविधा शुरू की गई, लेकिन अभी तक जिला चिकित्सालय से रैफर मरीज नहीं लिए जाते हैं। यहां पर ट्राॅमा और ओटी का काम भी शेष है।

अधीक्षक का निजी सेंटर हो चुका है बंद

कुछ दिनाें पूर्व शहर में उठे कन्याभ्रूण हत्या डीलिंग मामले के बाद शहर के सभी डायग्नोसिस सेंटरों की जांच की गई। इसमें पाया गया कि जीएमसी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. केबी वर्मा बिना उचित अनुमति के स्पर्श डायग्नोसिस सेंटर संचालित कर रहे थे जिसे स्वास्थ्य विभाग ने बंद करा दिया। खुद अधीक्षक निजी प्रैक्टिस में जुटे हुए हैं और यही हाल मेडिकल कॉलेज के अन्य स्टाफ डाॅक्टर्स का है। सभी ने अपने-अपने प्राइवेट क्लीनिक स्थापित करने के साथ निजी अस्पतालों में अपने कैबिन बना लिए हैं।

आउटसोर्स कर्मचारी के माध्यम से भ्रष्टाचार के आरोप

एक शिकायत में उल्लेख किया गया है कि जीएमसी में यहां 198 स्टाफ नर्स के रिक्त पदों पर स्वशासी में नियुक्ति के लिए सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। इसके आवेदन एमपी ऑनलाइन के माध्यम से मांगे गए थे। इसमें डीन डॉ. निगम ने अपने आप को आउटसोर्स कर्मचारी बताने वाले एक निजी सहायक के माध्यम से हर कैंडिडेट से 3 लाख रुपये लेकर करीब 50 नर्सों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए हैं।

इसके अलावा मेडिकल काॅलेज में बायोकेमेस्ट्री विभाग में आदेश क्रमांक 6315 दिनांक 12.05.2021 द्वारा डॉ. राहुल यादव को प्रदर्शक के पद पर नियुक्ति दी गई है। डॉ. राहुल यादव का नाम व्यापम घाेटाले में भी आया है। डॉ. राहुल व्यापमं कांड के मुख्य आरोपित डॉ. दीपक यादव के छोटे भाई हैं।

पूर्व में विधानसभा में भी गूंज चुका है शिवपुरी मेडिकल कॉलेज का भर्ती कांड

जीएमसी शिवपुरी में साल 2018 में हुई पैरामेडिकल स्टाफ की भर्तियाें में घाेटाला सामने आ चुका है। यह मामला साल 2019 में विधानसभा में भी गूंज चुका है। तब चिकित्सा शिक्षा मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ थीं। उस समय विधायक यशोधरा राजे सिंधिया सहित सत्तादल के विधायक रहे केपी सिंह ने भी सवाल उठाए थे। इसमें जांच को लेकर बात कही गई थी जिसके परिणाम अब तक सामने नहीं आए हैं। अब फिर से यहां नर्सिंग व अन्य स्टाफ को लेकर भ्रष्टाचार की शिकायत हुई है।

यह आरोप लगे हैं
कोरोना काल में नियमों को ताक पर रखकर 45 लाख रुपये का लोकल परचेस किया गया है। मनमाने ढ़ंग से मेडिकल स्टोर फर्म अवि फार्मा एमके प्लाजा हॉस्पिटल रोड ग्वालियर को ऑर्डर दिए गए जिस पर डॉ. अक्षय निगम अपना क्लीनिक संचालित करते हैं।

मेडिकल कॉलेज के डीन होने के साथ डॉ. निगम जीआरएमसी में कैंसर विभाग में भी पद संभाल रहे हैं। इन 6 महीनों में इन्होंने ओपीडी में एक भी मरीज नहीं देखा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शासकीय चिकित्सालय में कैंसर का उचित परामर्श नहीं मिल पा रहा है।

कोरोना काल में शिवपुरी मेडिकल काॅलेज में लापरवाही बरती गई जिसके कारण कॉलेज की छवि धूमिल हुई और अटेंडरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। एक प्रकरण में डॉ. अक्षय कुमार निगम को कोर्ट से सजा भी सुनाई जा चुकी है। इन पर लोकायुक्त में जांच प्रकरण क्रमांक 769/2017 प्रचलित है जिसकी जांच अभी चल रही है।