पांव मत पूजो मामा, बस पेट भर खाना दे दो: कुपोषण से 3 साल की मासूम की मौत- karera News

शिवपुरी। आपने अक्सर देखा होगा कि प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह कई कार्यक्रमो में कन्या पूजन का कार्यक्रम रखते हैं,लेकिन शिवपुरी में एक आह निकल रही है कि पांव मत पूजो शिवराज मामा बस पेट भर खाना दे दो,क्यो की कुपोषण के कारण लगातार मौते हो रही हैं कोलार के बाद करैरा से एक 3 साल की मासूम की मौत होने की खबर आ रही है।

करैरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम दिदावली की आदिवासी बस्ती से आ रही है। जहॉ एक तीन वर्षीय बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। इनमें कुपोषण और झौलाछाप डॉक्टर के इलाज मौत के कारण के रूप में सामने आए है। बच्ची की मौत के बाद उसका पिता काशीराम आदिवासी घर पर ताला लगाकर वहॉ चला गया है। इस वजह से केशव से संपर्क नहीं हो पाया। उसे इलाज के लिए पास के ही झौलाछाप डॉक्टर के पास लेकर गए। यहां से उसे झांसी रैफर कर दिया गया था। इसके बाद तीन—चार दिन पहले उसकी मौत हो गई। कुछ वर्ष पहले केशव के लड़के की भी असमय मौत हो गई थी।

अभी कुछ दिन पूर्व ही लक्ष्मी की भी कुपोषण से मौत हो गई थी। जब बस्ती स्थिति देखी तो वहां कई बच्चे प्रथम दृष्टया ही कुपोषित नजर आते है। उन बच्चों में वर्षा आदिवासी भी शामिल है। कुपोषण के कारण वर्षा ठीक से बैठ भी नहीं पाती है। बैठाने पर ही उसे चक्कर आनें लगते थे। कुपोषण के कारण दिदावासी आदिवासी बस्ती के कई बच्चे कोई न कोई बीमारी से पीड़ित है।

पिछले वर्ष 2600 से अधिक कुपोषित बच्चे महिला बाल विकास विभाग के सर पर चिन्हित किए गए थे। इन बच्चों को कुपोषण से उबारने के लिए शासन प्रशासन ने उल्लेखनीय कदम योजना अंतर्गत उठाए। जिसके परिणाम में तकरीबन 2000 बच्चे कुपोषण से निजात पा चुके हैं। 600 से अधिक बच्चे आज भी कुपोषित है और इन्हें कुपोषण से मुक्त कराना महिला बाल विकास विभाग के साथ—साथ अन्य विभागों के लिए भी चुनौती बना हुआ है।
बच्चे कुप

बच्चो को कुपोषण मुक्ति के अभियान धरातल पर नही कागज में दौड रहे हैं

सर्वाधिक कुपोषित बच्चे आदिवासी बस्तियों में हैं। इनका कुपोषण दूर करने के लिए शासन प्रशासन धरातल पर एक नहीं कई योजनाएं संचालित कर रहा है। जिनमें आदिवासी परिवारों को ताजे फल सब्जी के लिए 1000 रूपए मासिक प्रदान किए जाते हैं साथ ही पोषण आहार भी आंगनवाड़ियों के माध्यम से वितरित किया जाता है। सांझा चूल्हा भी कुपोषण के खिलाफ ही शासन प्रशासन द्वारा शुरू की गई योजना हैं। इन योजनाओं के परिणाम स्वरूप शिवपुरी में 2000 बच्चे कुपोषण से मुक्त हो गए है।

बताया कि यह सच है कि अभी 600 से अधिक बच्चें जिले भर में कुपोषित है। कुपोशण का क्लंक पूरी तरह मिटाने के लिए मेडीकल कॉलेज के साथप मिलकर विभाग शोघ कर रहा है। हर संभव कोशिश यह हैं किम जो भी बच्चों कुपोषित है अन्हें जल्द से जल्द कुपोश्ज्ञण से मुक्त कराया जाए। उन्हेांने बताया कि कुपोषण के खिलाफ विभाग सक्रियता से कार्य लगातार कर रहा है।