गणेश उत्सव:तो क्या माने श्रीगणेश ऐसे भगवान है जिन्होने भारतीयो के साथ मिलकर अंग्रेजो के खिलाफ आजादी की जंग में भाग लिया था - Shivpuri News

ललित मुदगल एक्सरे शिवपुरी समाचार डॉट कॉम। आज 10 सितंबर हैं और आज से देश में श्रीगणेश जी का 10 दिनो का गणेशउत्सव का श्रीगणेश हो जाऐगा। पूरे 10 दिनो तक यह उत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाऐगा। आज घरो के साथ साथ पंडालो में विनायक की स्थापना की जाऐगा और 10 दिन बाद अंनत चौहदस के दिन श्रीविघ्नहर्ता का विजर्सन किया जाऐगा।

एक सवाल मेरे मन में था कि जब 10 दिन तक हम विनायक का पूजा करते हैं,बडे ही धूमधाम से बैंड बाजो के साथ अपने घर लाते है ओर बैंड बाजो ढोल नगाडो के साथ नाचते गाते झूमते हुए विदा करते हुए जल में क्यो विर्सजित करने जाते है। क्या यह हमारे शास्त्रो में हैं,क्या कथा हैं और क्या रहस्य हैं श्रीगणेश की प्रतिमा की स्थापना ओर विर्सजन की। जबकि हमारे घरो में श्रीगणेश की जी की अन्य प्रतिमाए हमारे पूजा घरो में होती हैं हम उनका विसर्जन क्यो नही करते हैं,आईए इस पूरे मामले का एक्सरे करते हैं।  

10 दिन चलने वाले गणेश उत्सव को लेकर जानने का प्रयास किया। तमाम वेद वक्ताओ से बातचीत की। गूगल पर भी सर्च किया लेकिन शास्त्रो में इन 10 दिन के उत्सव का कही उल्लेख नही हैं,श्रीगणेश की 10 दिनो के लिए प्रतिमा की स्थापना और विसर्जन का उल्लेख शास्त्रो में नही मिलता है। फिर भारत में इस उत्सव की परंपरा की श्रीगणेश कैसे हुआ,और इसका श्रीगणेश करने का क्या कारण था।

पहले हम आपको बतो दे की गणेश चर्तुर्थी की शास्त्रो में क्या मान्यता हैं या फिर क्या महत्व हैं गणेश चर्तुथी का। गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को आती हैं और मान्यता है कि गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को मध्याह्न काल में, सोमवार, स्वाति नक्षत्र एवं सिंह लग्न में हुआ था। इसलिए यह चतुर्थी मुख्य गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी कहलाती हैं,सीधे शब्दो मेें लिखे तो आज के दिन श्रीगणेश का जन्म हुआ था।

भारतीय संस्कृति में गणेश जी को विद्या-बुद्धि का प्रदाता, विघ्न-विनाशक, मंगलकारी, रक्षाकारक, सिद्धिदायक, समृद्धि, शक्ति और सम्मान प्रदायक माना गया है। वैसे तो प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को "संकष्टी गणेश चतुर्थी" व शुक्लपक्ष की चतुर्थी को "वैनायकी गणेश चतुर्थी" मनाई जाती है, लेकिन वार्षिक गणेश चतुर्थी को गणेश जी के प्रकट होने के कारण उनके भक्त इस तिथि के आने पर उनकी विशेष पूजा करके पुण्य अर्जित करते हैं।

जब शास्त्रो में 10 दिन के इस उत्सव के मनाने का कही भी उल्लेख नही हैं तो फिर भारत में इस उत्सव की परपंरा का कैसे श्रीगणेश हुआ। इस उत्सव के पीछे गुलाम भारत का रहस्य छुपा हुआ है। इस उत्सव की परपंरा भारतीयो को अंग्रेजो के खिलाफ एकजुट करने के लिए शुरू किया गया था। यह उत्सव केवल 100 साल पुराना हैं।

जब भारत अंग्रेजो का गुलाम था और 1920 में जब अंग्रेजो ने राजनीतिक कार्यक्रम करने पर रोक लगा दी थी। महाराष्ट्र में गणेश चर्तुर्थी बडे ही धूमधाम से मनाई जाती थी लेकिन जब गणेश उत्सव सार्वजनिक नही था। भारतीय अपने अपने ही घरो में श्रीगणेश के इस प्रकाटय दिवस को मनाते थे। यह त्यौहार 10 दिन नही चलता था।

इसके बाद सार्वजनिक गणेश उत्सव शुरू करने का श्रेय तिलक को जाता हैं। बाल गंगाधर तिलक ने जनमानस में सांस्कृतिक चेतना जगाने, अंग्रेजों के खिलाफ सन्देश देने और लोगों को एकजुट करने के लिए ही सार्वजनिक गणेश उत्सव की शुरूआत की थी,चूकि अंग्रेजी सरकार ने राजनीतिक कार्यक्रम करने पर रोक लगाई थी लेकिन धार्मिक कार्यक्रम पर रोक नही लगाई थी।

अग्रेंजो के खिलाफ लडाई में आम भारतीयो को जोडने के लिए श्रीगणेश को घर से बहार निकाला गया।  मंदिरो में श्रीगणेश की प्रतिमा का 10 दिन की स्थापना की जाने लगी। सुबह शाम की आरती में आमजन का एकत्रित किया जाने लगा। जिससे लोगो का समूह एक साथ बैठ सके और बातचीत कर सके।

इस प्रकार भारत में 10 दिन के गणेश उत्सव मनाने की परंपरा का श्रीगणेश हुआ। सीधे शब्दो में लिखे तो अंग्रेजो के खिलाफ भारतीय को एकजुट करने के लिए विनायक को घरो से निकलना पडा। अग्रेंजो ने राजनीतिक कार्यक्रम न करने और सार्वजनिक भाषणो पर रोक लगा दी थी।

लेकिन जैसे ही हमारे विघ्नहर्ता घर से बाहार निकले मंदिरो के पंडालो में अपना आसन ग्रहण किया तो आजादी की जंग में आमजन एक जुट हो गए। भाषणो पर रोक थी लेकिन धर्म के प्रवचन देने पर रोक नही थी। इस कार्यक्रम नही सांस्कृतिक समारोह का नाम दिया गया। श्रीगणेश ऐसे देव है जिन्होने भारतीयो के साथ मिलकर अग्रेंजो के खिलाफ लडाई लडी है।

इस समारोह की सबसे अहम बात यह भी हैं इस उत्सव में हिन्दू के अतिरिक्त मुस्लिम जन भी मनाते हैं,यह उत्सव का श्रीगणेश हिन्दुओ को जाग्रत करने नही बल्कि भारतीयो को गुलामी के खिलाफ जाग्रत के लिए शुरू किया था इसलिए महाराष्ट्र में मुस्लिम धर्म के अनुयाई भी श्रीगणेश के पंडालो की स्थापना करते हैं।

ओर अंत में शिवपुरी समाचार के सभी पाठको,विज्ञापन दाताओ ओर शुभचिंतको को गणेश चर्तुर्थी की शुभकामनाए। आप सभी श्रीगणेश के 12 नाम.गणेश, एकदंत, कपिल, गजकर्ण, लंबोदर, विकट, विघ्नविनाशक, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचन्द्र, गजानन नामो का स्मरण करते हुए हमारे समाज समाजिक बुराईयो और राष्ट्र की राष्ट्रविरोधी ताकतो से लडने का संकल्प ले। इति श्री।।