खेतों में खड़ी फसल काली पड़ गई, दवाई भी काम नहीं कर रही - Shivpuri News

शिवपुरी। जिले में एक और तो बाढ से हाहाकार मच गया था। दूसरी और बाढ के बाद भी बारिश यहां थमने का नाम नहीं ले रही। जिसके चलते हालात यह हैै कि जिले में कई क्षेत्र ऐसे में जहां अतिबृष्ठि से पूरी फसल वर्बाद हो गई है। जिससे किसान अब परेशान हो गए है। यह हालात पूरे जिले में नहीं है बल्कि कोलारस,बदरवास,खतौरा,बैराड,पोहरी में है।

यहां लगातार बारिश के चलते इल्ली भी किसानों पर मुसीबत बनकर खडी है। इल्ली के प्रकोप से फसल में फल नहीं लग सके है। जिन फसलों में फल लग गए है और वह पक कर तैयार हो गई है वह बारिश के चलते काली पडने लगी है। क्योंकि धूप नहीं खिलने से फसल सुख नहीं पा रही है और खेतों में पानी भरा होने से ना ही कटाई हो पा रही है। हालत यह है कि कई गांवो में खड़ी फसल में अंकुरण होने लगा है। अभी भी पानी की वजह से खेतों में नहीं पहुंच पा रहे हैं।

इल्ली व कचरे की दवाई ने भी इस बार काम नहीं किया

लगातार बारिश होने से किसान के द्वारा खेतों में डाली गई कचरे व इल्ली की दवाईयां भी काम नहीं कर रही इस बार किसानों ने कचरे की दवाई दो-दो बार डालने पर कचरा नहीं मरा तथा इल्ली का प्रकोप इतना भयंकर था की चार पांच बार भी ईल्ली मारने की दवाई डालने पर भी इल्लीयां नहीं मरी और कई तरह के मच्छर भी फसल में फालीयो को खा रहे हैं तथा गिरा रहे हैं।

महंगा बीज होने पर भी किसानों ने बीज बोया था

पिछले 3 साल से सोयाबीन और उड़द की फसल पानी से प्रभावित हो रही है जिससे किसान अपना बीज भी तैयार नहीं कर पा रही हैं। इस साल किसानों ने लगभग ₹9000 क्विंटल मैं बीज खरीदा था। इस साल भी किसान अपना घर का बीज तैयार नहीं कर पायेगा जिसकी मार भी किसानों को अगली बोनी पर पड़ेगी क्योंकि बारिश से बीच वाली क्वालिटी नहीं बनेगी।

खेतों में ना मजदूर पहुंच रहे ना हार्वेस्टर और ना ही रिफर

किसानों का कहना हैं की लगातार अति वर्षा होने से खेतों में इतनी नमी है कि आज से मौसम साफ होने पर भी कम से कम 15 दिन कृषि यंत्र से खेतों में काम नहीं कर पाएंगे हार्वेस्टर तथा रीपर खेतों में नहीं जा सकते तथा मजदूर भी काम नहीं कर पा रहे हैं। किसानों को अभी से चिंता सता रही है कि अगर लगातार बारिश होती ही रही तो अगली फसल की तैयारी कैसे करेंगे क्योंकि खेतों की सफाई होगी तभी तो हकाई जुताई कर पाएंगे। पिछले साल की अपेक्षा खाद,बीज, डीजल,दवाइयां और मजदूरी सब कुछ महंगा होने से लागत कई गुना बढ़ गई है। अगर किसानों को शासन से तुरंत राहत नहीं मिलती है तो आर्थिक स्थिति बुरी होने वाली है।