103 करोड का महाघोटाला: जांच समिति ने 10 लोग किए चिहिन्त,जांच पर सवाल महाप्रबंधको को क्लीन चिट

शिवपुरी। जिला सहकारी बैंक में हुए 103 घोटाले में प्रतिदिन नई परते खुल रही हैं। इस घोटाले के जांच कर रही जांच समिति ने इस घोटाले में 10 बैंककर्मी चिन्हित किए हैं। जांच समिति ने 103 करोड रूपए में से 80 करोड खोज लिए हैं लेकिन अभी 23 करोड गायब हैं। जांच समिति ने इस जांच में 10 बैंक कर्मियो पर सदेंह जताया है लेकिन घोटाले के समय में सहकारी बैंक जिला शिवपुरी के महाप्रबंधको और प्रतिवर्ष आडिट करने वाले आडिट करने वाली टीम को क्लीनचीट दी हैं,जिससे इस जांच पर उंगली उठने लगी हैं।

इस घोटाले में 3 बैंककर्मियो को संस्पैड कर उनके खिलाफ 5.31 करोड के गबन को लेकर कोलारस थाने में मामला दर्ज कर लिया हैं। जबकि तीन अन्य को निलंबित करने के अलावा, एक की सेवा समाप्त कर दी गई। शेष चार दोषियों में से एक जहां दुनिया छोड़ गए जबकि तीन दोषियों पर अभी कार्यवाई लंबित है। जिला सहकारी बैंक की महाप्रबंधक का कहना है कि शाखा की कंप्यूटर आपरेटर की संपत्ति को भी चिहिंत करके उसकी कुर्की की तैयारी कर ली गई।

गौरतलब है कि सहकारी बैंक शाखा कोलारस में भृत्य से कैशियर बने राकेश पाराशर सहित तीन लोगों के खिलाफ पहले चरण में ही पुलिस थाना कोलारस में गबन की एफआइआर दर्ज कर ली गई। इसके बाद जांच टीम ने जो अपनी रिपोर्ट पेश की, उसमें सात अन्य दोषियों के नाम उजागर दिए हैं।

इनमें से तीन दोषी बैंककर्मियों को सोमवार को निलंबित कर दिया। इसके अलावा चार बैंककर्मी श्रीकिशन शर्मा पूर्व बैंक प्रबंधक, जो मृत हो चुके हैं, राकेश कुलश्रेष्ठ पूर्व प्रबंधक, सोरभ मेहर पूर्व प्रबंधक व रेणू शर्मा कंप्यूटर आपरेटर कोलारस शाखा को भी दोषी माना है। अभी तक छह लोगों को निलंबित करने के अलावा आॅपरेटर रेणु शर्मा की सेवा समाप्त वकर दी है।

कोलारस शाखा के तार जिला मुख्यालय से भी जुडे
सहकारी बैंक शाखा कोलारस में हुए घोटाले के तार शिवपुरी जिला मुख्यालय पर स्थित जिला सहकारी बैंक से भी जुडे रहें हैं। यही वजह है कि सोमवार को देर शाम जिन तीन कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, उनमें जिला सहकारी बैंक में पदस्थ रहे कर्मचारी हरवंशशरण श्रीवास्तव, त्यागी व भार्गव शामिल हैं। क्योंकि जिला मुख्यालय से जाने वाली राशि को बिना खर्च किए तथा किसानों को उसका लाभ दिए ही, लगातार राशि जारी की जाती रही। यही वजह है कि जांच के दायरे में जिला मुख्यालय के कर्मचारी भी आ गए हैं।

पूर्व महाप्रबंधक व आडिट टीम की भूमिका संदिग्ध
जांच समिति ने अपनी जांच में पाया कि यह घोटाला साल 2013 से जुलाई 2021 तक की समायवधि में हुआ हैं। कोलारस शाखा के कैशियर राकेश पाराशर ने 80 करोड रूपए का गबन किया हैं। 2013 से 2021 तक इस शाखा में 3 बैंक मैनेजर पदस्थ रहे हैं।

सहकारी बैंक शाखा कोलारस में हुए इतने बड़े घोटाले में जिला मुख्यालय के कर्मचारी तो संलिप्त मिले हैं, लेकिन पूर्व महाप्रबंधक के अलावा आडिट टीम हर तीन माह में जांच करने जाती है तथा जब इतना बड़ा घोटाला हो गया तो भी आडिट टीम कैसे ओके रिपोर्ट कैसे देती रही। इसलिए जांच की जद में उन्हेें भी लाया जाना जरूरी है।

जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में दस कर्मचारियों को दोषी माना है। जिसमें से तीन पर एफआईआर हो चुकी है। आपरेटर की सेवा समाप्त कर दी है, जबकि पूर्व प्रबंधक श्रीकिशन शर्मा की मौत हो चुकी है। शेष तीन पर भी कार्यवाही होगी।