बच्चे शाला क्यो त्याग देते हैं और उसके बाद क्या करते, विषय पर PhD

शिवपुरी। जैसा की आप सबको विदित है कि समाज में बहुत से बच्चे ऐसे हैं जो प्राइमरी और मिडिल तक अपने अध्ययन को छोड़कर अन्य कामों में लग जाते हैं यह सब देख कर ही शहर की समाजसेविका व केशव महाविद्यालय की संचालिका श्रीमती सुषमा पाण्डे निवासी इन्द्रप्रस्थ नगर शिवपुरी के मन में विचार आया, कि क्यों ना हम बीच में शिक्षा अध्यापन छोड़ काम में लगने वाले इन बच्चों को गहराई से जाने।

इस विषय को ही अपने शोध का विषय बनाकर श्रीमती सुषमा पाण्डे ने पीएचडी डिग्री के रूप में शिक्षा प्राप्त की और आज उसी शिक्षा में सफलता प्राप्त करने पर श्रीमती सुषमा पाण्डे को डॉ.श्रीमती सुषमा पाण्डे के रूप में डॉक्टर की उपाधि मिली।

इस दौरान मिली इसी डिग्री पर प्रसन्नचित डॉ.सुषमा पाण्डे ने कहा कि कभी-कभी जीवन में कुछ ऐसा हो जाता है जो सोचा नहीं होता और हमें ईश्वर की प्रेरणा उस ओर ले जाती है यह हमें भी नहीं पता होता, ऐसे में मेरे द्वारा किए गए शोध पर यह पीएचडी डिग्री प्राप्त होना यह हमारे साथ उन सब लोगों की दुआएं हैं।

जिनसे हमने यह जाना की बच्चे आखिरकार बीच में ही शाला क्यों त्याग देते हैं? हालांकि इस शोध को लेकर शााला त्याग का अध्ययन कोरोना के चलते उपाधि मिलने में कुछ विलंब हुआ पर बहुत अच्छा लगा। बता दें कि गत दिवस ग्वालियर में मप्र के महामहिम राज्यपाल मंगूभाई पटेल के के समक्ष यह उपाधि डॉ.श्रीमती सुषमा पाण्डे को प्रदान की गई।

जीवाजी विश्वविद्यालय के इस दीक्षांत समारोह में महामहिम राज्यपाल मध्य प्रदेश के साथ केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, कुलपति श्रीमती संगीता शुक्ला, कुलसचिव आनंद मिश्रा एवं कई मंत्री मौजूद थे। इस दौरान डॉ.सुषमा पाण्डे के रूप में डिग्री मिलने पर उन्हें शहरवासियों, शुभचिंतकों व समाजसेवी संस्थाओं और शहर के गणमान्य नागरिकों ने बधाई व शुभमकामनाऐं प्रेषित की है।