शिवपुरी समाचार डॉट कॉम। शिवपुरी के प्रशासन ने अवैध कॉलोनियो के खिलाफ अभियान चला रखा है,कार्यवाही पर सवाल खडे नही कर रहे हैं,लेकिन क्यो कट रही है शिवपुरी में अवैध कॉलोनिया इसके पीछे की कहानी प्रशासन झाकने की कोशिश नही कर पा रहा हैं। कारण सिर्फ एक मात्र हैं कि शिवपुरी में कॉलानियो को 100 प्रतिशत शुद्धता का प्रमाण पत्र देने वाला टीएनसीपी विभाग का आफिस नही है,आइए इस पूरे मामले का एक्सरे करते हैं।
गुना में हैं टाउन कंट्री प्लानिंग का आफिस
किसी भी कॉलोनी का वैधता देने वाला (टाउन कंट्री प्लानिंग) टीएनसीपी का कार्यालय गुना में है शिवपुरी में नही है। बताया जाता है कि गुना में इस आफिस में काम करना एक जंग लडने से कम नही है,समय पर अधिकारी कर्मचारी नही मिलते। अगर कोई अधिकारी तक पहुंच जाता हैं तो नियमो को महाभारत उसके सामने पटक दिया जाता हैं उसके हाथ पॉव फूल जाते हैं।
कॉलोनी काटने वाले एक कॉलोनाईजर ने बताया कि लंबी रिश्वत के कारण झूठे नियम बताए जाते हैं,टीएनसीपी की गाईड लाईनो की जानकारी प्रत्येक कॉलोनाईजर को नही हैं नगर और महानगर कॉलोनी और मकान बनाकर बेचने वाली कॉलोनी गाईडलाईन अलग होती है।
अब जानकारी के अभाव में नियमो मे फसाकर वसूली नही सीधे-सीधे पार्टनरी मांगी जाती है। इस कारण शिवपुरी में प्लाटिंग का काम करने वाले व्यापारी टीएनसीपी गुना के कार्यालय से दूर रहते हैं। जानकारी मिल रही है कि लगभग 5 दर्जन फाईल शिवपुरी जिले की गुना के टीएनपीसी के आफिस में पेडिंग पडी हैं लेकिन रिश्वत के चक्कर में धूल खा रही है।
शिवपुरी में हो आफिस
शिवपुरी जिले में टीएनपीसी के आफिस खोलने के लिए वर्षो से मांग की जा रही है लेकिन शहर को सुंदर बनाने वाले आफिस को शिवपुरी में खुलवाने की कोई सुध नही ले रहा हैं। एक कॉलोनाईजर ने बताया कि हम किसी प्राजेक्ट में करोडो रूपए बैंक और मार्केट से लेकर लगाते हैं और हमे ही प्रशासन और मीडिया माफिया की संज्ञा देती है।
बडा रेवन्यू सरकार के लिए हम देते हैं। शिवपुरी में जिस साल प्लाट नही बिकते हैं मार्केट का सर्वे किजिए बाजार में हलचल कम हो जाती हैं। अगर हम कॉलानी को टीएनपीसी से पास कराने के लिए जाते हैं तो वहां हमारे प्रोजेक्ट की कीमत का आंकलन कर रिश्वत मांगी जाती हैं कभी कभी रिश्वत में पार्टनरी भी मांगी जाती है। शिवपुरी जिले में भी टीएनपीसी का आफिस होना चाहिए।
हम गुना जाते हैं आफिस में कोई नही मिलता,फोन नही उठते हैं हमारा दिन खराब हो जाता हैं। समय पर काम नही होने के कारण प्राजेक्ट की किमत बड जाती हैं हमारे उपर चल रहे ब्याज बडता रहता हैं और जनता जो कम किमत का प्लाट खरीदना चाहती हैं उसे मंहगी रेट पर मिलता है।
यह भी सत्य है सोचे शिवपुरी के कर्ताधर्ता
हर आदमी कत्थामिल में मकान नहीं खरीद सकता। यहां शिवपुरी में आसपास के ग्रामीण लोग 250 रूपए में प्लॉट एक हजार फीट खरीदकर नगरपालिका से ढाई लाख की सब्सिडी लेना चाहता है 5 लाख में उसके दो कमरे किचिन, लेट बाथ मिल जाता है।
बच्चों को शहर में पढाने एवं रहने की ख्वाहिश में अवैध कालोनी में प्लॉट खरीद लेता है। अगर नियम से कालोनी बनती है तो 45 प्रतिशत जगह खुली छूट जाती है। कुल 36 प्रतिशत में मकान बनाने की अनुमति टीएनसीपी द्वारा मिलती है। बाकी जगह ओपन स्पेश रास्ते एवं पार्क में छोडनी पडती है।
रोड नाली, सीवर बिजली की व्यवस्था में अलग से खर्चा होता है इस प्रकार की 100 रूपए फीट की जमीन लगभग 500 रूपए फीट पडती है। इतना सब करने के बाद भी टीएनसीपी को परेशानी होती हैं।

