Shivpuri News- डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी भाजपा के राजनीतिक आराध्य है: धैर्यवर्धन शर्मा

शिवपुरी। भारतीय जनता पार्टी ज़िला शिवपुरी द्वारा जनसंघ के प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर एक कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें स्थानीय कार्यकर्ता भौतिक तौर पर सम्मिलित हुए और शेष जिले के समस्त कार्यकर्ता वर्चुअल तौर पर जुड़े । मुख्य वक्ता के तौर पर पार्टी के वरिष्ठ नेता धैर्य्वर्धन् ने डॉ मुकर्जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला । कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष राजू बाथम ने की ।

कार्यकर्ताओं को दिए अपने उद्वोधन् मे धैर्यवर्धन ने कहा कि सामान्य तौर पर देशवासी डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को केवल कश्मीर में परमिट व्यवस्था रोकने के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर देने वाले नेता के तौर पर जानते हैं । यह सच भी है कि वह इस बात के विरोधी थे कि एक देश में दो विधान दो प्रधान और दो निशान नहीं होने चाहिए इसलिए उन्होंने11 मई को कश्मीर में प्रवेश किया और 23 जून को वह रहस्यमई परिस्थितियों में शहीद हो गए पर तभी जम्मू और कश्मीर से परमिट व्यवस्था हमेशा के लिए समाप्त करनी पड़ी ।

धैर्यवर्धन् ने अपने व्याख्यान मे कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का बंगाल को बचाने का भी बड़ा योगदान है ।आजादी के पहले पाकिस्तान बनाने की जिद पर अड़े मोहम्मद अली जिन्ना ने 16 अगस्त 1946 को डायरेक्ट एक्शन डे मनाया जिसे कोलकाता दन्गा के नाम से भी जानते हैं । इस दिन मुस्लिम लीग के लोगों ने एक दिन मे अचानक हमला कर कोलकाता में लगभग 20,000 हिंदू और सिक्खों को मार डाला । लगभग 30,000 घायल हुए और कई लाख लोग अपने घरों को परमानेंट छोड़ कर के वहां से खदेड् दिये गए ।

भाजपा नेता धैर्यवर्धन ने कहा कि जब पाकिस्तान का निर्माण किया जा रहा था तो पाकिस्तान को दो हिस्सों में बनाया गया था । आजके राजस्थान, गुजरात,महाराष्ट्र और पंजाब के पश्चिम की ओर पश्चिमी पाकिस्तान था तो कोलकाता के पूर्वी और का पूरा हिस्सा पुर्वी पाकिस्तान था ।जो होमवर्क उस समय हो चुका था उसे आज का पश्चिम बंगाल पूरा का पुरा पूर्वी पाकिस्तान में दिया जा रहा था ।

पर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कोलकाता के लोगों के साथ मिलकर पूरे बंगाल में आंदोलन खड़ा कर दिया और उसका परिणाम यह हुआ कि आज का कोलकाता, आसनसोल, वीरभूमि, 24 परगना जैसे तमाम महानगर / एरिया जो इस समय भारत के पश्चिम बंगाल के राज्य का हिस्सा है वह पाकिस्तान में जाने से रोक लिए गए ।

उन्होने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने जीवन काल में भारत की भयावहता का अनेकों बार दृश्य देखा था । भारत और पाकिस्तान के विभाजन की तस्वीर की कोई उज्ज्वल तस्वीर नहीं थी जब विभाजन हुआ , तो कहा जाता है कि लगभग 10 लाख हिंदू और सिख भारत और पाकिस्तान के विभाजन की तस्वीर की कोई योजना नहीं थी जब विभाजन हुआ तो कहा जाता है कि लगभग 1000000 हिंदू और सिखोन् के प्राण ले लिए गए ।

कहते हैं कि भारत पाकिस्तान के बंटवारे की रेखा महिलाओं के शरीर पर से होकर के गुजरी थी अर्थात इसका अर्थ यह है कि पाकिस्तान से लौट रहे हिंदू और सिक्खों की लगभग एक लाख बहिन् बेटियों के साथ दुराचार हुआ बलात्कार हुआ उनके साथ मारपीट की गई उनके अंग भंग किए गए । उनको शारीरिक प्रताड़ना दी गई , और स्त्रियों का अपहरण करके घर ले जाकर क्यों ने नौकर चाकर बनाएं और जबरन निकाह किया गया ।

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी परम विद्वान थे और विलक्षण प्रतिभा के धनी थी तभी तो केवल 33 वर्ष की उम्र में कोलकाता यूनिवर्सिटी के कुलपति मनोनीत हो गए थेआप आश्चर्य करेंगे कि वह भारत की पहली सरकार में नेहरू जी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी थे पर लियाकत नेहरू समझौते के खिलाफ उन्होंने नेहरू सरकार के खिलाफ नाराजगी दर्शाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

इस्तीफा देना भी सामान्य बात नहीं थी आज लोग पार्षद पंच सरपंच और विधायक की सीट नहीं छोड़ सकते तब डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारत सरकार के माननीय मंत्री के पद को ठुकरा दियाहिंदी सॉन्ग हालातों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक गुरु गोलवलकर जी से भेंट के पश्चात 21 अक्टूबर 1951 को डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अध्यक्षता में जन संघ का गठन हुआ और पहले आम चुनाव में डॉक्टर मुखर्जी सहित तीन सांसद चुने गए जनसंघ भारतीय जनता पार्टी का ही पुराना रूप था ।

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को प्रणाम करते हुए माल्यार्पण करते हुए हम यह संकल्प लेते हैं कि हमारी पार्टी के पुरखों के द्वारा भारत की एकता अखंडता को सुरक्षित रखने के लिए यह पवित्र संकल्प लिया है हम उस धरोहर को बनाए रखेंगे और उसी निष्ठा के साथ उस संकल्प की पूर्ति में अपना योगदान देते रहेंगे यही कारण है कि जम्मू-कश्मीर मेंविभाजन और आतंकवाद की मानसिकता को प्रश्रय देने वाली अनुच्छेद 370 और 35a के खिलाफ जन संघ भारतीय जनता पार्टी और हमारा विचार परिवार लगातार संघर्ष कर रहा था ।

हमारा देव मंत्र था एक देश में दो प्रधान दो विधान और दो निशान नहीं चलेंगे हम हर रोज देहरा थे थेविभाजन और आतंकवाद की मानसिकता को प्रश्रय देने वाली अनुच्छेद 370 और 35 ए के खिलाफ जन संघ भारतीय जनता पार्टी और हमारा विचार परिवार लगातार संघर्ष कर रहा था हमारा देव मंत्र था एक देश में दो प्रधान दो विधान और दो निशान नहीं चलेंगे हम हर रोज देहरा ते थे कि जहां हुए बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है।