मानव ब्लड को चार भागों में बांट देते हैं ब्लड सेपरेटर मशीन, शिवपुरी में होगी स्थापित: पढ़िए कैसे काम करती हैं यह - Shivpuri News

शिवपुरी। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के प्रयासों से शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में जल्द उच्च कोटि के ब्लड बैंक की स्थापना की जाएगी। इस ब्लड बैंक की अनुमानित लागत 3 करोड रूपए बताई जा रही हैं। यह ब्लड बैंक संभाग का सबसे हाईटैक ब्लड बैंक होगा। बताया जा रहा है कि इस ब्लड बैंक में होने वाली जांच मात्र 10 रूपए में होगी।

श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया चिकित्सा महाविद्यालय शिवपुरी में स्थातित होने वाले ब्लड बैंक में ब्लड सेपरेटर मशीन और ब्लड कम्पोनेंट मशीन स्थापित होंगी। आईए जानते है कि क्या है यह मशीन और कैसे काम करती है।

मानव ब्लड में प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और पेक्ड रेड ब्लड सेल्स जैसे कंपोनेंट्स होते हैं।यह मशीन खून में शामिल इन तत्वों को अलग कर देती है,सरल भाषा में कहे तो यह मशीने मानव ब्लड से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, प्रोटिन, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी होंगे अलग-अलग कर देती हैं।

मसलन श्वेत रक्त कणिकाएं (WBC), लाल रक्त कणिकाएं (RBC), प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, प्रोटीन सहित अन्य तत्वों को अलग-अलग किया जाता है। इससे ब्लड डोनर के एक यूनिट ब्लड को कंपोनेंट के रूप में 4 अलग-अलग मरीजों को चढ़ाया जा सकता है।

डेंगू के बुखार आने पर आम तौर पर आपने सुना होगा की प्लेटलेट्स कम हो जाते हैंं,वर्तमान में शिवपुरी में मानव ब्लड से प्लेटलेट्स अलग करने की सुविधा नही थी,ग्वालियर या अन्य महानगर में जाकर प्लेटलेट्स चढती थी,यह मंहगा उपचार था अब शिवपुरी के कालेज में यह सुविधा शुरू होने से मरीज के परिजनो का पैसा और समय भी बचेगा।

थैलेसीमिया : ऐसे मरीजों को लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी) की जरूरत होती है। अब ब्लड से आरबीसी अलग करके थैलेसीमिया के मरीजों को चढ़ाना आसान होगा।

बर्न केस यानी जले हुए: बर्न केस के मरीजों को बचाने के लिए प्लाजमा की जरूरत होती है। शिवपुरी में इस तरह की व्यवस्था नहीं है। इस मशीन से अब प्लाजमा और फ्रेश फ्रोजन प्लाजमा (एफएफपी) को अलग कर चढ़ाए जा सकेंगे।

एड्स: एड्स के मरीजों को श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी) की जरूरत होती है। यह मशीन खून से डब्ल्यूबीसी को अलग करने में भी कारगर साबित होगी।