शनि जयंती और वट सावित्री अमावस्या कल, सूर्य ग्रहण का भारत में नहीं रहेगा प्रभाव: पं लक्ष्मीकांत शर्मा - Shivpuri News

शिवपुरी। शनिदेव का जन्म उत्सव ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाता है पं. लक्ष्मीकांत शर्मा (मंशापूर्ण मंदिर) के अनुसार इस बार अमावस्या तिथि का प्रारंभ 9 जून को दोपहर में 1:58 से प्रारंभ होकर आज 10 जून को साय काल 4:22 तक रहेगी आज शनि जयंती के साथ कई अन्य पवित्र पर्व भी हैं।

वट सावित्री व्रत और ज्येष्ठ अमावस्या का पर्व भी आज मनाया जाएगा सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिए आज व्रत रखती हैं और बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं बट सावित्री व्रत सौभाग्य प्राप्ति के लिए एक बड़ा व्रत माना जाता है। आज साल का प्रथम सूर्य ग्रहण भी लग रहा है परंतु यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है।

ऐसी मान्यता है कि शनि की साढ़ेसाती और शनि महादशा जैसे शनि से जुड़े हुए दोसो से निजात पाने के लिए शनि अमावस्या पर शनिदेव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। जिन्हें हमेशा कष्ट निर्धनता बीमारी या अन्य तरह की परेशानियां रहती हैं उन्हें शनि जयंती पर शनिदेव की पूजा जरूर करनी चाहिए।

कंकणाकृती सूर्यग्रहण

शनि अमावस्या पर आज कंकणाकृती सूर्यग्रहण पढ़ रहा है हालांकि यह ग्रहण भारत वर्ष में दृश्य नहीं होगा भारतीय समय में स्पर्श दिन में 1:42 से 6:41 तक होगा इस ग्रहण का धार्मिक दृष्टि से भारत में कोई महत्व नहीं इसमें किसी भी प्रकार का यम नियम और सूतक मान्य नहीं होगा

शनि जयंती पर करें यह उपाय

शनि देव पर सरसों के तेल का दीपक लगाएं और तेल चढ़ाएं काला वस्त्र छाता काले उड़द का दान करें और शनि चालीसा का पाठ करें
प. लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया कि शनि जयंती पर देश भर के प्रमुख शनि मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है।

इस वर्ष हम कोरोना महामारी को देखते हुए आपको यही सलाह देंगे कि सार्वजनिक जगहों पर जाने से बचें और पूजा-पाठ आदि जैसे सभी धार्मिक कार्य अपने घरों में रहते हुए करें।