SHIVPURI: संक्रमण दर प्रदेश में दूसरे नंबर पर, जांच में हर तीसरा व्यक्ति पॉजिटिव

शिवपुरी
। कर्फ्यू के बावजूद कोरोनावायरस कंट्रोल में नहीं आया है। कलेक्टर की सारी कोशिशें नाकाम होती नजर आ रही है। पिछले 20 दिन से शिवपुरी की संक्रमण दर 30 से 35% के बीच चल रही है। यानी जांच में हर तीसरा आदमी पॉजिटिव पाया जा रहा है। यहां उल्लेख करना जरूरी है कि पिछले 7 दिनों में जबकि मध्यप्रदेश में संक्रमण की दर तेजी से कम हो रही है, शिवपुरी में स्थिर बनी हुई है। निश्चित रूप से यह चिंता की बात है।

शिवपुरी में 1 साल के बराबर 1 महीना

फोटो फ्रेम एवं श्मशान और कब्रिस्तान से मिले आंकड़ों के आधार पर एक अनुमान है कि पिछले 1 महीने में 100 से ज्यादा लोगों की मृत्यु हुई है। जो या तो पॉजिटिव थे या फिर उनमें कोविड-19 के लक्षण थे और रिपोर्ट का इंतजार कर रहे थे। इनमें से कुछ ऐसे हैं जिनका सैंपल भी जमा नहीं हो पाया था। अगर आंकड़ों की बात की जाए तो मार्च 20 से मार्च 21 तक जिले में पाॅजिटिव मरीजों की संख्या 4132 थी लेकिन अप्रैल 21 माह में अकेले ही जिले में 4343 से अधिक संक्रमित मरीज निकल चुके हैं।

मेडिकल काॅलेज: भूल सुधार के नाम पर 15 लोगों की मौत का कारण बदल दिया

मेडिकल काॅलेज और स्वास्थ्य विभाग का अलग-अलग बुलेटिन जारी हो रहा हैं। शुक्रवार को मेडिकल काॅलेज ने पहली बार अपना हैल्थ बुलेटिन जारी किया था। जारी बुलेटिन में मेडिकल कालेज ने 45 मौतों का जिक्र किया था, फिर भूल सुधार के नाम पर संख्या 45 से घटाकर 30 कर दी गई। वैसे यह बात स्वीकार नहीं की जा सकती कि डॉक्टर कोई गलती कर सकते हैं। यदि कर रहे हैं तो फिर उन्हें डॉक्टर होने का हक नहीं है। किसी ने दवाई के पर्चे पर ऐसी गलती कर दी तो...।

शिवपुरी में लाशें अंतिम संस्कार के लिए इंतजार कर रही हैं

शिवपुरी का स्वास्थ्य विभाग जिला चिकित्सालय में बने आईसोलेशन वार्ड से उगलती लाशों में से केवल 10 की ही गिनती कर पाया है। जबकि हालात यह है कि शिवपुरी शहर के मुक्तिधाम में अतिरिक्त चबूतरे बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। यानी एक चिता शांत नहीं हो पाती तब तक दूसरी अर्थी चबूतरे के खाली होने का इंतजार करती दिखाई देती है। दूसरे शब्दों में कहें तो शिवपुरी में लाशें अंतिम संस्कार के लिए इंतजार कर रही हैं। 

विशेष नोट:- इस समाचार का उद्देश्य केवल इतना है कि आम नागरिक हालात की गंभीरता को समझें। 35% पॉजिटिविटी रेट बहुत ज्यादा होती है फुल है। देहाती भाषा में इसे 'मरई पड़ना' कहते हैं और बुजुर्गों ने भी बताया है कि जब गांव में मरई पड़ रही हो तो घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। एक बात और, इस बार मरने वालों में नेता, साधु, किसान, मजदूर, अमीर और गरीब सब शामिल है। कोरोनावायरस का नया स्ट्रेन उम्र का लिहाज नहीं कर रहा। 15 महीने के बच्चे से लेकर 65 साल के मुखिया तक सब को शिकार बना रहा है।