शिवपुरी के लोगो की मदद कर अपनी माटी का कर्ज उतारने का प्रयास कर रह हैं यह डॉक्टर - Shivpuri News

शिवपुरी। कहते है कि अपनी मातृभूमि को छोडकर अपनी नौकरी में कही भी किसी भी उंचाई पर पहुंच जाए लेकिन उसे हमेश अपनी माटी की याद आती हैं,और इस कोरोना काल में इस कहावत का सत्य करते कुछ उदाहरण हमारे सामने आ रहे हैं। शिवपुरी में पले बढे और अपनी कैरियर की प्राथमिक सीढियो पर कदम रखे यह डॉक्टर फोन पर ही शिवपुरी के मरीजो को कोरोना का इलाज करते हुए उनकी समस्या का समाधाना भी कर रहे हैं बल्कि मनोबल बढाने का काम भी कर रहे हैं।

डॉ.अमित कोचेटा भोपाल के नोबल कार्डियक अस्पताल में कार्यरत हैं और वहां पर कोविड केयर के इंचार्ज हैं। डॉ. कौशल कबीर इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर होने के साथ क्रिटिकल केयर संभालते हैं। शाम को वे थोड़ा समय वॉट्सएप और फोन कॉल के जरिए अपने शहर के मरीजों के लिए निकालते हैं।

चिकित्सकों का कहना है कि इस बीमारी का डर बड़ा है और दूसरी महत्वपूर्ण बात इसमें प्राथमिक उपचार की है। यदि प्राथमिक उपचार समय पर मिल जाए, तो मरीज सीवियर (गंभीर) स्थिति में जाने से बच जाता है। इन लोगों ने मिलकर शहर के 500 से भी ज्यादा लोगों को उपचार उपलब्ध कराया है।

फोन पर ही चर्चा कर करते हैं समाधान करते हैं कोविड के मरीजो का

एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ.कबीर कौशल इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर हैं। डॉ.कौशल ने बताया कि एमजीएम में छह ब्लॉक हैं और यहां पर कोरोनाकाल के दौरान शिवपुरी के भी कई मरीज हमारे पास आए। शिवपुरी से ही पला बढ़ा हूं तो यहां से एक अलग ही जुड़ाव है। हर मरीज हमारे लिए समान है, लेकिन जैसे ही पता चलता है कि मरीज शिवपुरी से है तो उससे एक अपनापन महसूस होता है।

यहां आने वालों की जो मदद संभव थी वह की भी। उन्होंने बताया कि कोरोना में मरीजों को प्राइमरी ट्रीटमेंट नहीं पता है। यदि कोई अपने लक्षण बता दे तो हम उसे प्राइमरी ट्रीटमेंट बता सकते हैं। इस दौरान मैंने यही किया। शिवपुरी से किसी मरीज का फोन आता था तो सबसे पहले उसे प्राइमरी ट्रीटमेंट बताते थे।

इसके बाद मरीज की काउंसलिंग की भी जरूरत होती है कि उसे हॉस्पिटलाइज होने की जरूरत है या नहीं। इस जानकारी के अभाव में मरीज बिना जाने रेमडेसिविर और अन्य महंगी दवाओं की ओर भागता है व परेशान होता है, जबकि उसे इसकी जरूरत ही नहीं होती है। इस दौरान यही कोशिश रहती है कि मरीज को सही रास्ता दिखा दें।

डॉ.कोचेटा ने फोन पर ही दिया 300 से अधिक मरीजो को परामर्श

नोबल मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल भोपाल में कार्डियक एनेस्थेटिस्ट व क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ. अमित कोचेटा ने बताया कि उन्होंने करीब 27 साल पहले शिवपुरी छोड़ दी थी। यहां पर आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। भले ही 27 साल हो गए, लेकिन अभी भी बचपन के दोस्तों से लेकर परिवार तक यहीं रहता है, तो जुड़ाव गहरा है।

उन्होंने बताया कि दिसंबर में कोरोना हुआ था,लेकिन उस दौरान आइसीयू में भर्ती मरीजो को देखते रहे। इसके बाद वैक्सीन के दोनों डोज लगे और दूसरी लहर की शुरुआत में दोबारा से संक्रमित हो गए। इस दौरान भी मरीजों से बात करने का सिलसिला चलता रहा। डॉ. कोचेटा ने बताया कि नोबल में करीब 800 कोरोना संक्रमितों को इलाज दे चुका हूं। वहीं करीब 300 मरीजों को फोन पर परामर्श दिया है।

कई बार परामर्श पर्याप्त नहीं होता और मरीज सीवियर स्टेज में पहुंच रहा होता है तो चिकित्सकों से भी उसके इलाज के संबंध में बात कर लेते हैं। इसके चलते कई मरीजों की जान बची जो सोचकर अच्छा महसूस होता है। दिनभर पूरा अस्पताल में निकल जाता है, इसके बाद शाम को फोन पर मरीजों से बात कर लेते हैं।

शिवपुरी के एक सामाजिक ग्रुप में जुड़ा हूं जो कोरोना मरीजों की मदद के लिए बना है। उसमें मैसेज पढ़ते ही जहां पर भी जरूरत होता है वहां चिकित्सकीय सलाह देते हैं। यहीं से फिर मरीज फोन कर लेता है। इस कोरोनाकाल में शिवपुरी के कई मरीजों की कार्डियक सर्जरी भोपाल में की। इसमें खासतौर पर बच्चे भी शामिल थे। वहां के लोग मेरे पास विश्वास के साथ आते हैं तो अच्छा लगता है, क्योंकि यह मेरी जन्मभूमि भी है।

एनजीओ से जोड़े अमेरिका के भारतवंशी चिकित्सक,डीएच में मरीजों से कर रहे बात

एनजीओ संचालक रवि गोयल ने वॉट्सएप ग्रुप के जरिए देशभर के ख्यातिनाम चिकित्सकों को जोड़ा है। इसमें विदेशों में बसे भारतवंशी चिकित्सक भी शामिल हैं। यह चिकित्सक नियत समय पर जिला अस्पताल के मरीजों से बात करते हैं और उन्हें परामर्श देते हैं। इस दौरान वे स्थानीय चिकित्सकों को देश-विदेश में कोरोना और ब्लैक फंगस पर चल रहे शोधों और इलाज की नई तकनीकों की जानकारी भी देते हैं।