कोविड वार्ड में लगे कैमरे,कंट्रोल रूम से बता रहे वॉलेंटियर मरीजो का हाल: काम कर रहा हैं व्यवस्था का नया डोज - Shivpuri News

शिवपुरी। कोरोना का इलाज करा रहे मरीजों के स्वजनों की लगातार इलाज को लेकर शिकायत बनी हुई है। जब अटेंडरों को बाहर निकाल दिया जाता है तो हंगामे की स्थिति बन जाती है। यदि उन्हें रोका नहीं जाता है तो वे संक्रमण के वाहक बनते हैं। ऐसे में अब जिला अस्पताल ने नई व्यवस्था लागू कर दी है। यह व्यवस्था का नया डोज अब काम कर रहा हैं।

हर मरीज के साथ सिर्फ एक ही अटेंडर को अनुमति दी गई है। साथ ही अब सभी कोविड वार्ड और आइसीयू में सीसीटीवी कैमरे लगाकर एक कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है। कंट्रोल रूम में अस्पताल का स्टाफ नहीं, बल्कि वालेंटियर बैठ रहे हैं, जिससे पारदर्शिता बनी हुई है।

जो स्वजन अपने मरीज के बारे में जानकारी हासिल करना चाहता है उसे यह जानकारी कंट्रोल रूम से मिलेगी। यहां पर वालेंटियर कैमरे के जरिये देखकर बताएंगे कि अभी आपका मरीज क्या कर रहा है। जरूरत होने पर वे मरीज से वीडियो कॉल के माध्यम से बात भी करा सकेंगे।

बुधवार को जिला अस्पताल में वालेंटियर्स की बैठक भी हुई। इसमें अधिकारियों ने उन्हें काम करने के दिशा-निर्देश दिए। साथ ही बताया कि टीशर्ट के बजाए शर्ट पहनें, हमेशा दो मास्क लगाएं, फेसशील्ड का इस्तेमाल करें। बहुत अधिक जरूरत होने पर ही कोविड वार्ड के अंदर जाएं। अधिकारियों ने वालेंटियर्स से खुद की सुरक्षा का भी ध्यान रखने की बात कही। कंट्रोल रूम में किसी भी तरह की जानकारी लेने के लिए 7869242222 पर कॉल किया जा सकता है।

30 वालेंटियर कर रहे दो-दो घंटे की शिफ्ट

इस व्यवस्था में कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी जिला अस्पताल के स्टाफ के बजाय वालेंटियर्स को दी गई है। इससे मरीजों के स्वजन पारदर्शिता को लेकर सवाल नहीं उठा पाएंगे। इस काम के लिए 30 समाजसेवी स्वेच्छा से आगे गए हैं और यह 30 लोग दो-दो घंटे की शिफ्ट में सुबह 9 से रात 10 बजे तक वहां पर काम कर रहे हैं। इन्हें कोविड वार्ड में अंदर जाने के लिए पीपीई किट भी प्रशासन की ओर से उपल्ब्ध कराई गई है।

स्टाफ का भी रखेंगे ध्यान

वालेंटियर्स की भूमिका सिर्फ मरीजो और स्वजनों के बीच संवाद स्थापित करने तक सीमित नहीं है। उन्हें सभी चिकित्सकों और नर्सों की सूची दी गई है। साथ ही मरीजों व अटेंडरों के नंबर भी उपलब्ध कराए हैं। यदि किसी वार्ड में फुटेज देखकर लगता है कि किसी मरीज को परेशानी आ रही है तो तत्काल संबंधित चिकित्सक को इसकी सूचना देंगे।

वहीं यदि कोई अटेंडर अस्पताल के स्टाफ के साथ अभद्रता करता है तो इस पर भी वे नजर रखेंगे। अस्पताल में फीवर क्लीनिक के पास पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया है।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिर्फ वीडियो कॉल की व्यवस्था

जिला अस्पताल ने तो अपनी व्यवस्थाएं सुधार ली हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों के अटेंडरों को बिल्कुल भी अंदर जाने नहीं दिया जाता है। मेडिकल कॉलेज के अस्पताल के पास स्टाफ बहुत कम है, जबकि गंभीर मरीजों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी अटेंडर की आवश्यकता होती है, लेकिन वे जा नहीं सकते हैं।

इतना ही नहीं उन्हें यह भी नहीं पता होता है कि अंदर उनके मरीज को सही ट्रीटमेंट दिया जा रहा है या नहीं। कोई उसकी देखभाल कर रहा है या नहीं। इसके चलते मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में कई बार हंगामा हो चुका है।

मेडिकल कॉलेज स्टाफ की लापरवाही की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इसके बाद भी अभी सिर्फ दिन में दो घंटे मरीजों से वीडियो कॉल पर बात करने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए भी अटेंडर को मेडिकल कॉलेज तक जाना आवश्यक है।

इनका कहना है
शुरुआत में हमारे पास स्टाफ की कमी आई थी और मरीजों की संख्या अधिक थी। इसलिए हम क्वांटिटी पर फोकस कर रहे थे। अब हमारे पास अन्य जगहों से स्टाफ आ गया है तो पूरा ध्यान क्वालिटी के ऊपर है कि कितना बेहतर इलाज और सुविधाएं दे सकते हैं।

इसके चलते सीसीटीवी कैमरे लगाकर कंट्रोल रूम बनाया है। अब मरीज के अटेंडर यह शिकायत नहीं कर सकते हैं कि अंदर लापरवाही हो रही है। अब पूरी व्यवस्था पारदर्शी है और सभी चीजें सामने हैं। आगे जो भी बेहतर व्यवस्था बनाई जा सकती है उसके लिए भी प्रयास करेंगे।
डॉ.राजकुमार ऋषिश्वर,सिविल सर्जन।