विरोध: पिछले साल फ्रंटलाइन वर्कर माना था इस साल नही विरोध, 8 मांगो को लेकर प्रर्दशन - Pichhore News

पिछोर। बिजली कंपनी के आउटसोर्स कर्मचारियों ने आठ सूत्रीय मांगों को लेकर संगठन के आह्वान पर सभी साथियों के साथ काली पट्टी बांधकर मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड शिवपुरी सर्किल अंतर्गत डिवीजन पिछोर में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया।

समस्त आउटसोर्स कर्मचारियों ने सरकार को गैरमियादी हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी। सभी कर्मचारी सोमवार को एक दिवसीय हड़ताल पर रहे, जिसमें प्रदेश के सभी कर्मचारियों ने सहयोग दिया।

मध्य प्रदेश बिजली निजीकरण विरोधी संयुक्त मोर्चा और मध्य प्रदेश यूनाइटेड फोरम फॉर पावर एंप्लॉय और इंजीनियर के आह्वान पर प्रदेशभर के 45 हजार बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों ने 10 मई से बिजली से संबंधित कार्य का बहिष्कार कर रहे है।

कर्मचारियों ने मांग की है कि उन्हें भी फ्रंटलाइन वर्कर में शामिल किया जाए। बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों ने बताया कि पिछले साल बिजली कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर के तौर पर कोरोना योद्धा में शामिल किया गया था, लेकिन इस बार इन्हें शामिल नहीं किया गया।

शिवपुरी सर्किल सहित पिछोर के आउटसोर्स कर्मचारियों ने कहा लंबे समय से सरकार से कई मांगों को लेकर बातचीत चल रही थी, लेकिन सालों बाद भी मांगों को नहीं माना गया इसलिए अब हड़ताल के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा हैं। सरकार को हमारी मांगें पूरी करनी चाहिए। यदि कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए तो प्रदेश में बिजली गुल हो जाएगी और इसकी जिम्मेदार सरकार खुद होगी।

ये हैं मांगे
बिजली कंपनियों से ठेकेदारी प्रथा खत्म कर नई भर्ती में बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए।
बिजली कंपनियों में आउटसोर्स कर्मचारियों के जो नए टेंडर हुए हैं उसमें आउट सोर्स कंपनियों द्वारा अवैध वसूली की जा रही है उस पर तुरंत लगाम लगाई जाए। पुराने बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों को यथावत नौकरी पर रखा जाए।

बिजली विभाग को मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना में शामिल किया जाए।

बिजली आउट सोर्स कर्मचारी का बिजली कंपनियों में संविलियन किया जाए।

विद्युत दुर्घटना में मृत कर्मचारी के परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा राशि प्रदान की जाए।

बिजली कंपनियों ने नियमित कर्मचारियों, संविदा कर्मचारियों को अग्रिम चिकित्सा राशि प्रदान की हैं। बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों ने उन्हें भी अग्रिम चिकित्सा राशि में शामिल करने की मांग की हैं।

बिजली कंपनियों के निजीकरण पर रोक लगाई जाए।